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आंधी ने खोली भ्रष्टाचार की पोल! लखनऊ अग्निकांड: 2016 में ही गिरनी थी मौत की इमारत, एलडीए वीसी ने कबूली विभाग की घोर लापरवाही

by on | 2026-06-24 16:47:11

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आंधी ने खोली भ्रष्टाचार की पोल! लखनऊ अग्निकांड: 2016 में ही गिरनी थी मौत की इमारत, एलडीए वीसी ने कबूली विभाग की घोर लापरवाही

लखनऊ: देश में जब भी कोई बड़ा अग्निकांड होता है और मासूमों की जान दांव पर लगती है, तब-तब प्रशासनिक अमला नींद से जागता है और कागजी जांच का खेल शुरू होता है। राजधानी लखनऊ के कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर अब एक ऐसा ही चौंकाने वाला और शर्मनाक सच सामने आया है, जिसने व्यवस्थागत भ्रष्टाचार की कलई खोलकर रख दी है।

​लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने खुद ऑन-कैमरा यह स्वीकार किया है कि जिस इमारत में यह दर्दनाक हादसा हुआ, उसे तो आज से 10 साल पहले यानी साल 2016 में ही जमींदोज हो जाना चाहिए था! लेकिन, अफसरों की 'विशेष मेहरबानी' और लापरवाही के चलते यह मौत का ढांचा खड़ा रहा और आखिरकार मासूमों की जिंदगी निगल गया।

​ 'विशेष परिस्थितियों' में बदला गया था गिराने का आदेश

​एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार के मुताबिक, इस पूरी लापरवाही की स्क्रिप्ट साल 2014 से ही लिखी जा रही थी:

  • 2014 (आवासीय नक्शा): इमारत के मालिक ने इस जमीन पर केवल रहने (Residential) के लिए नक्शा पास कराया था।
  • 2016 (कमर्शियल निर्माण और नोटिस): भवन मालिक ने नियमों को ताक पर रखकर वहां धड़ल्ले से व्यावसायिक (Commercial) निर्माण शुरू कर दिया। एलडीए ने नोटिस जारी किया और अवैध निर्माण को ढहाने (ध्वस्तीकरण) का बकायदा आदेश भी पारित हो गया।
  • साठगांठ का खेल: वीसी ने साफ किया कि साल 2016 में ही कुछ 'विशेष परिस्थितियों' और एक साधारण से प्रार्थना पत्र के आधार पर ध्वस्तीकरण का आदेश वापस ले लिया गया। मालिक ने सिर्फ लिखित आश्वासन दिया कि वह वहां केवल रहेगा, और अधिकारियों ने बिना किसी जमीनी जांच या वेरिफिकेशन के फाइल बंद कर दी।

​ आंतरिक जांच पूरी, दोषी अधिकारियों की हुई पहचान

​इस घोर लापरवाही पर चौतरफा घिरने के बाद एलडीए उपाध्यक्ष ने माना कि आदेश वापस लेने के बाद कभी मौके पर जाकर निरीक्षण करने की जहमत नहीं उठाई गई।

"अगर ध्वस्तीकरण का आदेश वापस लिया गया था, तो उसकी जमीनी स्तर पर जांच होनी चाहिए थी जो नहीं की गई। एलडीए ने इस मामले में सघन आंतरिक जांच पूरी कर ली है और इसके लिए जिम्मेदार सभी तत्कालीन दोषी अधिकारियों को चिन्हित कर लिया गया है।"

— प्रथमेश कुमार, उपाध्यक्ष, एलडीए


​ बेबाक सवाल: आंखें मूंदे क्यों बैठे रहे जिम्मेदार विभाग?

​यह हादसा केवल एक बिल्डिंग का गिरना या जलना नहीं है, बल्कि यह लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), शिक्षा विभाग, बिजली विभाग और दमकल विभाग की कार्यशैली पर एक बहुत बड़ा तमाचा है।

  • सवाल नंबर 1: जब इमारत का नक्शा केवल आवासीय था, तो सालों से उसके अंदर सैकड़ों बच्चों का कोचिंग सेंटर और कमर्शियल एक्टिविटीज कैसे चल रही थीं?
  • सवाल नंबर 2: फायर डिपार्टमेंट ने बिना मानकों के एनओसी कैसे दे दी? या फिर बिना एनओसी के ही यह मौत का धंधा फल-फूल रहा था?
  • सवाल नंबर 3: शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन इतने सालों तक क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था?

​दोषी अधिकारियों की पहचान तो हो गई है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इन पर सिर्फ कागजी कार्रवाई होगी या इन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजकर एक कड़ा संदेश दिया जाएगा? 'बेबाक 24' इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है।



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