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कमलेश बिंद के खात्मे के बाद अब 'बुलडोजर एक्शन' की तैयारी, सियासी और कानूनी मोर्चे पर बढ़ा तनाव

by on | 2026-06-08 21:56:28

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 कमलेश बिंद के खात्मे के बाद अब 'बुलडोजर एक्शन' की तैयारी, सियासी और कानूनी मोर्चे पर बढ़ा तनाव

गाजीपुर। गाजीपुर पुलिस मुठभेड़ में एक लाख रुपये के इनामी बदमाश कमलेश बिंद उर्फ कमलेश चौधरी के मारे जाने के बाद यह मामला अब महज एक पुलिसिया कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। इस घटनाक्रम ने अब एक गंभीर कानूनी और राजनीतिक मोड़ ले लिया है। एक तरफ जहां इस एनकाउंटर को लेकर सूबे की सियासत गरमाई हुई है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन ने आरोपियों के आर्थिक और भौतिक साम्राज्य पर चोट करने के लिए 'बुलडोजर' की तैयारी शुरू कर दी है।

​अवैध निर्माण पर प्रशासन का शिकंजा: 12 जून की समयसीमा

​गोंड़ा देहाती स्थित मृतक कमलेश बिंद के पैतृक मकान पर अब ध्वस्तीकरण की तलवार लटक रही है। मास्टर प्लान विभाग ने कमलेश के बड़े भाई संजय बिंद को एक आधिकारिक नोटिस जारी किया है।

  • नोटिस का आधार: विभाग के मुताबिक, मकान के भू-तल (Ground Floor) और प्रथम तल (First Floor) का निर्माण बिना किसी आवश्यक और वैध अनुमति के कराया गया है।
  • पक्ष रखने का मौका: संजय बिंद को 12 जून को विभाग के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से या अपने प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है।
  • कड़ी चेतावनी: प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि निर्धारित तिथि तक संतोषजनक जवाब या वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, तो उत्तर प्रदेश रेगुलेटरी ऑफ बिल्डिंग ऑपरेशंस (RBO) एक्ट के तहत अवैध निर्माण को ढहाने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
  • जिलाधिकारी (DM) का सख्त रुख: "विनीत राय हत्याकांड के सभी नामजद आरोपियों के मकानों और संपत्तियों की गहन जांच-पड़ताल की जा रही है। सबकी संपत्तियों को आरबीओ (RBO) एक्ट के दायरे में लाकर खंगाला जा रहा है। कानून अपना काम पूरी कड़ाई से करेगा।"



    ​कटरा गैंग की कुंडली: सरगना शंकर पांडेय समेत तीन अब भी फरार

    ​कमलेश बिंद महज एक अपराधी नहीं, बल्कि इलाके में दहशत का पर्याय बन चुके कुख्यात 'कटरा गैंग' का एक सक्रिय और खूंखार सदस्य था। वह बहुचर्चित विनीत राय हत्याकांड में नामजद आरोपी था और उस पर इससे पहले भी कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे।

    ​कमलेश के सफाए के बाद भी पुलिस की चुनौती कम नहीं हुई है। कटरा गैंग का सरगना शंकर पांडेय और उसके तीन अन्य साथी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। इन सभी फरार आरोपियों पर शासन की ओर से एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित है। सूत्रों के मुताबिक, फरार चल रहे इन तीनों आरोपियों के घरों पर भी प्रशासन ने ठीक ऐसा ही नोटिस चस्पा कर दिया है, जिससे साफ है कि आने वाले दिनों में कार्रवाई और तेज होगी।

    ​रक्षक ही भक्षक? भाई और सियासी 'आकाओं' की भूमिका पर सवाल

    ​इस पूरे घटनाक्रम में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। कमलेश बिंद का भाई संजय बिंद, जो स्थानीय स्तर पर प्रधान है, उस पर आरोप है कि वह न सिर्फ कमलेश बल्कि गैंग के अन्य अपराधियों को भी संरक्षण और शह देता रहा है।

    ​इतना ही नहीं, अब इस आपराधिक मामले को बचाने के लिए पर्दे के पीछे से सियासी 'आकाओं' की लामबंदी भी शुरू हो गई है। पुलिस सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, अपराधियों को कानूनी और सामाजिक मोर्चे पर बचाने के लिए रणनीति तैयार की जा रही है।

    ​'मुठभेड़' पर मची सियासी रार: अफजाल अंसारी के तीखे तेवर

    ​कमलेश बिंद के एनकाउंटर के बाद समाजवादी पार्टी और स्थानीय विपक्षी नेता लगातार सूबे की कानून व्यवस्था और पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठा रहे हैं। मृतक के परिजन भी इसे 'सुनियोजित हत्या' करार दे रहे हैं।

    ​इस सियासी जंग में अंसारी गैंग के पितामह और सांसद अफजाल अंसारी खुलकर सामने आ गए हैं। वह मृतक के घर पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाने के साथ-साथ पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ कानूनी बचाव के कई नुस्खे भी गढ़ते नजर आए।

    एक बड़ा अनुत्तरित सवाल:

    विपक्ष और सियासी आका भले ही इस एनकाउंटर को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन इस बीच एक बड़ा और गंभीर सवाल यह भी उठता है कि यदि वे कानून के इतने ही खैरख्वाह हैं, तो उनके अपने प्रभाव क्षेत्र और गैंग के अनेकों अपराधी आज भी कानून से भागते हुए क्यों फिर रहे हैं? उन्हें अब तक अदालत के सामने हाजिर क्यों नहीं कराया गया?

    ​जातीय और राजनीतिक रंग देने वालों को DM की दोटूक

    ​मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गाजीपुर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि एक जघन्य हत्याकांड और अपराधियों के खिलाफ हो रही वैधानिक कार्रवाई को जातीय अथवा राजनीतिक रंग देने की कोशिश करने वाले तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा। सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक, माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    ​अब गाजीपुर की जनता की नजरें सिर्फ इस बात पर नहीं हैं कि फरार अपराधी कब पकड़े जाते हैं, बल्कि इस पर भी हैं कि 12 जून की म्याद खत्म होने के बाद प्रशासन का बुलडोजर किस तरह अपनी दिशा तय करता है।



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