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UP बोर्ड परीक्षा: 'जीरो टॉलरेंस' को ठेंगा! कलंकित मच्छटी कॉलेज को मिला 'इनाम', बेदाग जगनारायण कॉलेज को 'वनवास'

by on | 2026-02-04 16:33:21

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UP बोर्ड परीक्षा: 'जीरो टॉलरेंस' को ठेंगा! कलंकित मच्छटी कॉलेज को मिला 'इनाम', बेदाग जगनारायण कॉलेज को 'वनवास'

गाजीपुर | यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर खुद शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी कालिख पोतने में लगे हैं। जनपद में यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 के लिए परीक्षा केंद्रों का जो खेल खेला गया है, उसने विभाग और शिक्षा माफिया की जुगलबंदी को सरेआम बेनकाब कर दिया है।

कलंक पर मेहरबानी, सफाई पर हैरानी!

हैरानी की बात देखिए, जगनारायण इंटर कॉलेज, वीरपुर जैसा बेदाग संस्थान, जिस पर आज तक कोई आरोप नहीं लगा, उसे इस साल केंद्र की सूची से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। वहीं दूसरी ओर, एस.एम.एस. नेशनल इंटर कॉलेज, मच्छटी, जो RO-ARO पेपर लीक मामले में पूरी तरह कलंकित हो चुका है, उसे दोबारा परीक्षा केंद्र बनाकर 'सम्मानित' किया गया है।

DM के आदेश को कूड़ेदान में डाला?

बता दें कि पूर्व जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने मच्छटी कॉलेज की अनियमितताओं को देखते हुए इसे परीक्षाओं के लिए डिबार (Debar) करने का सख्त निर्देश दिया था। लेकिन लगता है कि शिक्षा विभाग के साहबों के लिए जिलाधिकारी के आदेश से ज्यादा कीमती 'माफिया की सेटिंग' है। पिछले साल भी भारी जद्दोजहद के बाद इसे डिबार किया गया था, मगर 2026 में फिर से इस कॉलेज पर मेहरबानी विभाग की नीयत पर गंभीर सवाल खड़ा कर रही है।

अखंड राज: माफिया का 'मैनेजर' और बेनामी साम्राज्य

सूत्रों की मानें तो इस पूरे खेल के पीछे माफिया मुख्तार अंसारी के गैंग का कथित मैनेजर अखंड प्रताप राय है। मुख्तार की मौत के बाद अब वह सांसद अफजाल अंसारी का खास सिपहसालार बताया जाता है। आरोप है कि अमरीश जायसवाल के साथ मिलकर अखंड राय अफजाल अंसारी के कई बेनामी पेट्रोल पंपों का संचालन कर रहा है।

अखंड का रसूख ऐसा है कि वह कागजों पर मच्छटी स्कूल का टिचर है, लेकिन असलियत में वह 'करोड़ों का सौदागर' बनकर फॉर्च्यूनर से कॉलेज आता है। चर्चा तो यहाँ तक है कि वह हफ्तों कॉलेज नहीं जाता और 'कृत्रिम अंगूठे' के जरिए हाजिरी लगवाकर सिस्टम को ठेंगा दिखा रहा है।

साहब का फोन नहीं उठा!

इस पूरे घालमेल और भ्रष्टाचार की दास्तान पर जब बेबाक 24 ने जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) का पक्ष जानने के लिए उन्हें फोन किया, तो साहब ने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। शायद साहब के पास इस 'नंगनाच' का कोई जवाब नहीं है।

बड़ा सवाल: क्या सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ तक यह खबर पहुँचेगी? क्या पेपर लीक के दोषियों और उनके संरक्षकों को फिर से केंद्र सौंपकर लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की खुली छूट दी जाएगी?




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