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अलविदा 'हरीश' जी: गाजीपुर के साहित्यिक मंचों पर अब सिर्फ यादें शेष, मौन हुआ ओज का पर्याय!

by on | 2026-04-21 12:05:52

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अलविदा 'हरीश' जी: गाजीपुर के साहित्यिक मंचों पर अब सिर्फ यादें शेष, मौन हुआ ओज का पर्याय!


गाजीपुर: जनपद के साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में आज एक खालीपन सा छा गया है। शब्द साधना और मंच संचालन की दुनिया के एक चमकते हस्ताक्षर स्व. हरिनारायण सिंह 'हरीश' पंचतत्व में विलीन हो गए। वे केवल एक कवि नहीं, बल्कि गाजीपुर की उस परंपरा के संवाहक थे, जहाँ शब्दों का सम्मान और सिद्धांतों की पवित्रता सर्वोपरि होती है।

सत्ता और सत्य को आईना दिखाती लेखनी

​हरिनारायण सिंह 'हरीश' जी ने अपनी लेखनी को कभी झुकने नहीं दिया। वे व्यवस्था की विसंगतियों पर प्रहार करने से कभी नहीं चूके। उनकी पंक्तियाँ आज उनकी अनुपस्थिति में और भी अधिक प्रासंगिक हो गई हैं:

"अंधों के हाथों जब-जब सत्ता होगी,

सत्ता के अधिकारी निर्वासित होंगे।"


​और समाज को चेतावनी देते हुए उनका वह प्रसिद्ध शेर:

"जब-जब सच को झूठ बताया जाएगा,

यहाँ महाभारत दुहराया जाएगा।"


​ये शब्द भविष्य में भी अन्याय के विरुद्ध खड़े होने वालों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

सौम्यता और ओज का संगम

​हरीश जी के व्यक्तित्व में एक अजीब सा आकर्षण था। जहाँ उनकी कविताओं में 'ओज' और 'क्रांति' थी, वहीं उनका व्यक्तिगत व्यवहार अत्यंत 'सौम्य' और 'मृदु' था। मंच संचालन के क्षेत्र में उनका कोई सानी नहीं था; अपनी प्रभावशाली आवाज और मर्मस्पर्शी टिप्पणियों से वे किसी भी महफिल की रूह बन जाते थे।

एक युग का अवसान

​उनके जाने से गाजीपुर ने अपना एक अनमोल रत्न खो दिया है। साहित्यकारों और उनके प्रशंसकों का कहना है कि हरीश जी का जाना एक व्यक्तिगत क्षति नहीं, बल्कि एक विचार का मौन हो जाना है। गाजीपुर की मिट्टी की सोंधी खुशबू उनकी कविताओं में हमेशा महकती रहेगी।

बेबाक भावभीनी श्रद्धांजलि

​'बेबाक 24' परिवार साहित्य जगत के इस अनमोल सेनानी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है। शरीर नश्वर है, परंतु हरीश जी अपने ओजस्वी विचारों और क्रांतिकारी कविताओं के रूप में सदैव हमारे दिलों में जीवित रहेंगे। ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।



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