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सुधर जाओ ! पीएम के आने से पहले डीएम का 'हंटर' तैयार, लापरवाही की तो खैर नहीं!

by on | 2026-04-20 21:21:50

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सुधर जाओ ! पीएम के आने से पहले डीएम का 'हंटर' तैयार, लापरवाही की तो खैर नहीं!

​वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों की सुस्ती अब अधिकारियों पर भारी पड़ने वाली है। एक तरफ बीजेपी पीएम के स्वागत की तैयारियों में जुटी है, वहीं दूसरी ओर लटके हुए प्रोजेक्ट्स को देख जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सोमवार को कलेक्ट्रेट की बैठक में डीएम ने साफ शब्दों में 'अंतिम चेतावनी' जारी कर दी है— या तो काम चमकाओ, या कार्रवाई के लिए तैयार रहो!
पीएम की यात्रा से पहले 'ग्राउंड जीरो' पर सख्ती
​सूत्रों की मानें तो पीएम मोदी की आगामी यात्रा को देखते हुए प्रशासन कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। डीएम ने स्पष्ट कर दिया कि काशी में हो रहे निर्माण कार्यों में 'क्वालिटी' से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीएमआईएस पोर्टल पर लटके प्रोजेक्ट्स को देखकर डीएम ने संबंधित संस्थाओं की जमकर क्लास लगाई।
​डीएम के कड़े निर्देश, जो बदल देंगे प्रोजेक्ट्स की रफ्तार:
​साइट पर पसीना बहाएं साहब: अब एसी कमरों से फाइलें नहीं चलेंगी। अधिकारियों को हर हाल में साइट विजिट करनी होगी।
​डेडलाइन का 'डेथ वारंट': जो प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हुए, उनकी रिपोर्ट सीधे शासन को भेजी जाएगी और संबंधित संस्था पर गाज गिरना तय है।
​हस्तांतरण में खेल खत्म: जो भवन बनकर तैयार हैं, उन्हें तुरंत हैंडओवर करने का आदेश दिया गया है ताकि जनता को उनका लाभ मिल सके।
जनप्रतिनिधियों को 'इग्नोर' करना पड़ेगा भारी
​अक्सर देखा जाता है कि ठेकेदार और विभाग अपनी मनमर्जी से काम करते हैं। डीएम ने इस पर नकेल कसते हुए निर्देश दिया कि किसी भी नई परियोजना की शुरुआत या समापन की जानकारी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को अनिवार्य रूप से दी जाए। पारदर्शिता ऐसी हो कि उंगली उठाने की गुंजाइश न रहे।
​इन विभागों की बढ़ी धड़कनें
​बैठक में PWD (लोक निर्माण विभाग), जल निगम, सेतु निगम और आवास विकास के दिग्गज शामिल थे। डीएम की तल्खी देख इन विभागों के अफसरों के पसीने छूट रहे हैं। संदेश साफ है— काशी में काम 'काशी' की गरिमा के अनुरूप ही होना चाहिए।
​बेबाक सवाल: जब सिर पर डीएम का डंडा और पीएम की यात्रा आती है, तभी विकास की याद क्यों आती है? क्या बिना सख्ती के बनारस को गड्ढा मुक्त और बेहतर बनाना मुमकिन नहीं? खैर, उम्मीद है कि इस घुड़की के बाद बनारस की सड़कों और भवनों की किस्मत बदलेगी।



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