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बजट 2026: आंकड़ों की बाजीगरी या इतिहास का नया अध्याय?

by on | 2026-01-31 19:53:49

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बजट 2026: आंकड़ों की बाजीगरी या इतिहास का नया अध्याय?

दिल्ली:  कल 1 फरवरी है। सुबह 11 बजते ही देश की धड़कनें तेज हो जाएंगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण हाथ में 'डिजिटल टैबलेट' लिए संसद की सीढ़ियां चढ़ेंगी, लेकिन इस बार मामला सिर्फ टैक्स और छूट का नहीं है। इस बार मामला 'ऐतिहासिक रिकॉर्ड' का है।

सीतारमण अपना लगातार नौवां बजट पेश करने जा रही हैं। एक ही प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) के साये में इतनी लंबी पारी खेलने वाली वह देश की पहली वित्त मंत्री बन चुकी हैं। पर क्या आप जानते हैं कि जिस बजट पर आज पूरा देश चर्चा कर रहा है, उसकी नींव एक अंग्रेज ने रखी थी और इसे पेश करने के लिए 'हलवा' क्यों खाना पड़ता है?

 1860 से अब तक: गुलामी के 'विल्सन' से 'आत्मनिर्भर' भारत तक

बजट की कहानी 166 साल पुरानी है।

 * 7 अप्रैल 1860: ब्रिटिश हुकूमत के जेम्स विल्सन ने पहला बजट पेश किया। मकसद था—1857 की क्रांति से हुए नुकसान की भरपाई।

 * 26 नवंबर 1947: आजाद भारत की पहली तिजोरी आर.के. षणमुखम चेट्टी ने खोली। वह सिर्फ 7 महीने का हिसाब था, लेकिन उसमें एक नए राष्ट्र की उम्मीदें थीं।

 रिकॉर्ड्स का दंगल: मोरारजी देसाई की बादशाहत को चुनौती!

यूनियन बजट के इतिहास में कुछ ऐसे नाम हैं जिन्होंने संसद के गलियारों में अपनी छाप छोड़ी है:


मोरारजी देसाई | 10 * सबसे ज्यादा बजट। अपने जन्मदिन (29 फरवरी) पर भी 2 बार बजट पेश किया। 

पी. चिदंबरम : 09 * सुधारों के दौर के 'नंबर 2' रिकॉर्ड होल्डर। 


निर्मला सीतारमण : 09*  2026 के बजट के साथ चिदंबरम की बराबरी और निरंतरता में सबसे आगे। 


 प्रणब मुखर्जी : 08 * 'संकटमोचक' जिन्होंने अर्थव्यवस्था को दिशा दी। 

 हलवा, ताले और 'लॉक-इन': बजट की रहस्यमयी परंपराएं

बजट पेश होने से कुछ दिन पहले वित्त मंत्रालय एक 'किले' में तब्दील हो जाता है।

 * हलवा सेरेमनी: यह सिर्फ मीठा खाने का कार्यक्रम नहीं है। यह इशारा है कि बजट की छपाई शुरू हो गई है।

 * कैद हो जाते हैं अफसर: हलवा खाने के बाद मंत्रालय के करीब 100 अधिकारी बेसमेंट में 'कैद' हो जाते हैं। फोन बंद, परिवार से संपर्क खत्म। मकसद सिर्फ एक—लीक प्रूफ बजट।

 बेबाक नजरिया

बजट सिर्फ यह नहीं है कि मोबाइल सस्ता होगा या इनकम टैक्स में छूट मिलेगी। बजट उस लोकतांत्रिक मजबूती का नाम है, जहाँ एक महिला वित्त मंत्री लगातार 9वीं बार देश की आर्थिक दिशा तय कर रही है। मोरारजी देसाई का '10 बजट' का रिकॉर्ड अब ज्यादा दूर नहीं लगता, लेकिन जनता की नजर इस पर है कि 2026 की पोटली से 'राहत' निकलेगी या सिर्फ 'आंकड़ों का मायाजाल'।

कल सुबह 11 बजे, इतिहास बनेगा भी और पढ़ा भी जाएगा। बने रहिए बेबाक 24 के साथ।




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