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अपनों से दूर बेसहारा वृद्धा के लिए 'खाकी' बनी सहारा, कराया पति का अंतिम संस्कार

by admin@bebak24.com on | 2025-12-23 19:54:34

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अपनों से दूर बेसहारा वृद्धा के लिए 'खाकी' बनी सहारा, कराया पति का अंतिम संस्कार


वाराणसी | मुख्य संवाददाता धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में मानवता की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने खाकी वर्दी के प्रति आम जनमानस का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। तमिलनाडु से मोक्ष की कामना लेकर आए एक बुजुर्ग दंपति पर जब दुखों का पहाड़ टूटा, तो वाराणसी पुलिस न केवल कानूनी रक्षक, बल्कि एक परिवार के सदस्य की भूमिका में खड़ी नजर आई।

संकट में साथ छोड़ गए थे अपने, पुलिस ने बढ़ाया हाथ तमिलनाडु के सेलम जनपद की रहने वाली 70 वर्षीय राजेश्वरी अपने 72 वर्षीय पति माणिकम के साथ काशी आई थीं। अचानक माणिकम के निधन ने राजेश्वरी को झकझोर कर रख दिया। न पास में संतान थी, न कोई संबंधी और न ही अंतिम संस्कार के लिए संसाधन। चितरंजन पार्क में पति के शव के पास असहाय बैठी राजेश्वरी की आंखों में अपनों को खोने का गम और लाचारी साफ झलक रही थी।

चौकी प्रभारी की तत्परता से हुआ ससम्मान अंतिम विदाई इस मानवीय संकट की सूचना मिलते ही दशाश्वमेध चौकी प्रभारी अनुज मणि तिवारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने न केवल वृद्धा को ढांढस बंधाया, बल्कि तत्काल शव को ससम्मान मणिकर्णिका घाट तक पहुंचाने के लिए वाहन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं कराईं। पुलिस की देखरेख में ही मणिकर्णिका घाट पर शव का विधि-विधान से दाह संस्कार संपन्न कराया गया।

​"हमारा कर्तव्य सिर्फ कानून व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि संकट में फंसे नागरिकों की सेवा करना भी है। माता जी की बेबसी देखकर पुलिस टीम ने वही किया जो एक इंसान को करना चाहिए।"

अनुज मणि तिवारी, चौकी प्रभारी (दशाश्वमेध)


कृतज्ञता से छलकीं राजेश्वरी की आंखें पति के अंतिम संस्कार के बाद राजेश्वरी की आंखों में आंसू थे, लेकिन इस बार ये आंसू सिर्फ दुख के नहीं बल्कि वाराणसी पुलिस के प्रति कृतज्ञता के भी थे। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने पुलिस के इस संवेदनशील व्यवहार की मुक्तकंठ से सराहना की है। लोगों का कहना है कि यह घटना साबित करती है कि काशी में कानून के साथ-साथ करुणा भी जीवंत है।



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