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होर्मुज में ड्रोन हमले से भारतीय नाविक की मौत, 22 साल पहले पिता भी समंदर में हुए थे लापता

by admin@bebak24.com on | 2026-11-07 14:06:36

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होर्मुज में ड्रोन हमले से भारतीय नाविक की मौत, 22 साल पहले पिता भी समंदर में हुए थे लापता

गुजरात | बेबाक24 न्यूज़

होर्मुज जलडमरूमध्य में एक भारतीय मालवाहक जहाज पर हुए ड्रोन हमले ने गुजरात के एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। हमले में 22 वर्षीय नाविक नईम अजीज गांधार की मौत हो गई, जबकि ओमान के तटरक्षक बल ने जहाज पर सवार 13 अन्य नाविकों को सुरक्षित बचा लिया। इस हादसे की सबसे दर्दनाक बात यह है कि करीब 22 साल पहले नईम के पिता भी समुद्र में जहाज पर काम करते समय लापता हो गए थे। अब परिवार ने अपने जवान बेटे को भी खो दिया है।

दुबई से पोरबंदर जा रहा था जहाज

'अल जुसुफी' नाम का यह जहाज गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले के सलाया बंदरगाह से जुड़ा था। जहाज के मालिक जुसाब अमद सुम्भानिया का परिवार लंबे समय से नौवहन कारोबार में है।

परिवार के सदस्य अकबरभाई सुम्भानिया के मुताबिक, जहाज 31 अक्टूबर को दुबई के हमरिया बंदरगाह से पोरबंदर के लिए रवाना हुआ था। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनावपूर्ण हालात को देखते हुए इसे ओमान के खासब बंदरगाह पर रुकने का निर्देश दिया गया। वहां एक दिन ठहरने के बाद जहाज ने पोरबंदर की ओर यात्रा दोबारा शुरू की।

अकबरभाई के अनुसार, ओमान के लीमा बंदरगाह के पास पहुंचने पर जहाज पर ड्रोन से हमला हुआ। उस समय जहाज का पहचान प्रसारण उपकरण चालू था और उस पर भारतीय तिरंगा भी फहरा रहा था।

केबिन से टकराया ड्रोन, आग में डूब गया जहाज

अकबरभाई ने बताया कि भारतीय समय के अनुसार शाम करीब 4:45 बजे जहाज के कप्तान सलीम अब्दुल सुम्भानिया का फोन आया। उन्होंने जानकारी दी कि जहाज पर ड्रोन हमला हुआ है और उसमें आग लग गई है। हमले के बाद चालक दल के सभी सदस्य जीवनरक्षक नौकाओं में सवार होकर जहाज छोड़ चुके थे।

जहाज मालिक के परिवार के मुताबिक, ड्रोन सीधे जहाज के केबिन से टकराया था। आग तेजी से फैल गई और जहाज पर लदा करीब 950 टन खजूर का माल नष्ट हो गया। आसपास कोई दूसरा जहाज या आग बुझाने की पर्याप्त सुविधा मौजूद नहीं थी। इस कारण आग पर काबू नहीं पाया जा सका और जहाज जलने के बाद समुद्र में डूब गया।

ओमान के तटरक्षक बल ने 13 नाविकों को बचाया

अकबरभाई के अनुसार, घटना की सूचना मिलने के करीब आधे घंटे के भीतर ओमान के तटरक्षक बल के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने जीवनरक्षक नौकाओं में मौजूद नाविकों को बचाया और सुरक्षित किनारे तक पहुंचाया।

नईम को भी घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई। उनके बाएं हाथ और बाएं पैर में चोटें आई थीं। नईम का शव फिलहाल ओमान के खासब स्थित अस्पताल में रखा गया है। परिवार ने उन्हें वहीं दफनाने का निर्णय लिया है। बाकी 13 नाविकों को भारत वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

22 साल पहले पिता भी समुद्र में हुए थे लापता

नईम के चचेरे भाई इरफान गांधार के मुताबिक, वह चार बहनों और दो भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके बड़े भाई निजाम भी मछली पकड़ने वाली नाव पर काम करते हैं। नईम पहले मछली पकड़ने के कारोबार से जुड़े थे, लेकिन 2-3 साल पहले उन्होंने यह काम छोड़कर मालवाहक जहाज पर नौकरी शुरू कर दी थी। इसमें उन्हें अपेक्षाकृत अधिक वेतन मिलता था।

जहाज मालिक के परिवार के अनुसार, नईम इसी साल मई में 'अल जुसुफी' के चालक दल में शामिल हुए थे। इस जहाज पर उनकी यह पहली यात्रा थी।

नईम के पिता अजीजभाई करीब 22 साल पहले समुद्र में लापता हो गए थे। परिवार के मुताबिक, वह लगभग 70 अन्य नाविकों के साथ कच्छ के टूना बंदरगाह से भेड़-बकरियों से लदे जहाज में दुबई के लिए रवाना हुए थे। रास्ते में उनका जहाज तूफान में फंसकर लापता हो गया। इसके बाद न तो जहाज का कोई पता चला और न ही अजीजभाई सहित उसमें सवार नाविकों की कोई जानकारी मिली।

नईम की मां जरीना पहले पति के लापता होने का दुख झेल चुकी थीं। अब जवान बेटे की मौत ने उन्हें गहरे सदमे में डाल दिया है।

होर्मुज में गुजरात के जहाजों पर हमलों की चौथी घटना

इंडियन सेलिंग वेसल्स एसोसिएशन के महासचिव आदम भाया के मुताबिक, गुजरात में इस समय करीब 270 और पूरे भारत में लगभग 450 पारंपरिक जहाज संचालित हैं। 'अल जुसुफी' इस साल मई के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में हमले का शिकार होने वाला गुजरात का चौथा जहाज है।

इससे पहले 8 मई को 'अल फैज नूर-ए-सुलेमानी' पर हुए हमले में 42 वर्षीय नाविक अल्ताफ खेर की मौत हुई थी और चार अन्य नाविक घायल हुए थे। इसके बाद 13 मई को 'हाजी अली' नामक जहाज पर हमला हुआ और वह डूब गया। उसके 14 नाविकों को बचा लिया गया, लेकिन जहाज पर लदी 1,800 भेड़-बकरियों की मौत हो गई।

करीब छह महीने की शांति के बाद 29 अक्टूबर को कच्छ के मांडवी बंदरगाह से जुड़े 'क्यूबा' नामक जहाज पर भी होर्मुज जलडमरूमध्य में हमला हुआ था।

'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद विभिन्न जहाजों और नौकाओं पर हुए हमलों में अब तक 14 भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है।

सुरक्षा उपायों के बावजूद जहाजों पर हमले

आदम भाया के अनुसार, गुजरात के जहाज भारतीय सरकार की ओर से जारी सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन कर रहे हैं। इन निर्देशों के तहत जहाज दिन के समय ही होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते हैं और अपनी पहचान प्रसारित करने वाले उपकरण चालू रखते हैं।

जहाज मालिक अकबरभाई सुम्भानिया ने भी चिंता जताई कि सभी सावधानियां बरतने के बावजूद भारतीय जहाजों पर हमले हो रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने 14 साल की उम्र से अपने पिता के साथ जहाज चलाना शुरू किया था और करीब 25 साल तक कप्तान के रूप में काम किया, लेकिन ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखा।

भारत सरकार ने 'अल जुसुफी' पर हुए हमले की निंदा की है। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने को चिंता का विषय बताया है।

बेबाक24 टेक

होर्मुज जलडमरूमध्य में 'अल जुसुफी' पर हुआ हमला भारतीय नाविकों की समुद्री सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंता को सामने लाता है। दिन में यात्रा करने और पहचान प्रसारण उपकरण चालू रखने जैसे सुरक्षा उपायों के बावजूद जहाज पर हमला हुआ। गुजरात के पारंपरिक जहाजों पर लगातार हो रही घटनाएं बताती हैं कि केवल सावधानियां पर्याप्त नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर भारतीय वाणिज्यिक जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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