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पीएनबी घोटाला: बीटेक पास महिला कर्मचारी गिरफ्तार, 10.24 करोड़ की हेराफेरी का आरोप

by admin@bebak24.com on | 2026-11-04 14:00:50

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पीएनबी घोटाला: बीटेक पास महिला कर्मचारी गिरफ्तार, 10.24 करोड़ की हेराफेरी का आरोप

ग्रेटर नोएडा | बेबाक24 न्यूज़

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में ग्राहकों के खातों से करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बैंक की महिला कर्मचारी दीपांशी शर्मा और उसके कथित सहयोगी आशुतोष कुमार पाठक को गिरफ्तार किया है। दीपांशी बीटेक पास है और बैंक के अभिलेखों में उसकी नियुक्ति चपरासी के पद पर बताई गई है। आरोप है कि उसने बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की यूजर आईडी तथा पासवर्ड का दुरुपयोग कर ग्राहकों के खातों से रकम दूसरे खातों में स्थानांतरित की।

अधिकारियों के पासवर्ड याद कर करती थी हेराफेरी

जांच से जुड़े विवरणों के अनुसार, दीपांशी ने बैंक प्रबंधक सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की यूजर आईडी तथा पासवर्ड याद कर लिए थे। आरोप है कि इसी जानकारी के आधार पर वह ग्राहकों के खातों से बिना अनुमति रकम निकालने और दूसरे खातों में भेजने में सफल रही।

दीपांशी ऐसे खाताधारकों को निशाना बनाती थी, जिन्हें जमीन अधिग्रहण के बदले मुआवजे की रकम मिली थी। इनमें कम पढ़े-लिखे लोग भी शामिल थे। आरोप है कि वह उनके खातों से पैसे निकालकर अन्य खातों में स्थानांतरित करती थी।

बैंक आने से पहले खाताधारकों को रोकती थी

बताया गया है कि दीपांशी ने कुछ खाताधारकों को अपना निजी मोबाइल नंबर दे रखा था। जब कोई ग्राहक बैंक आने की बात करता, तो वह पहले ही बैंक के बाहर पहुंच जाती थी। आरोप है कि वह कोई न कोई बहाना बनाकर ग्राहकों को बैंक के अंदर जाने से रोक देती थी।

हेराफेरी की रकम का लेनदेन छिपाने के लिए उसने गांव के परिचित लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया। जांच एजेंसियां अब इन खातों के माध्यम से हुए लेनदेन और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

सीबीआई ने पुणे से आशुतोष को किया गिरफ्तार

सीबीआई की 3 नवंबर को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, आशुतोष कुमार पाठक को महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार किया गया। उसे वहां की विशेष अदालत में पेश कर पारगमन रिमांड हासिल किया गया। दीपांशी और आशुतोष से पूछताछ के जरिए हेराफेरी में शामिल अन्य लोगों तथा धन के लेनदेन से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है।

सीबीआई के मुताबिक, ग्राहकों के खातों से अनधिकृत रूप से 10.24 करोड़ रुपये निकाले गए थे। हालांकि, शुरुआती शिकायतों में कथित हेराफेरी का दायरा 35 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया था। खाताधारकों का आरोप है कि यह गड़बड़ी करीब 3 साल तक चलती रही।

जांच एजेंसी के अनुसार, कार्यालय सहायक के पद पर तैनात दीपांशी ने निजी व्यक्ति और अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलीभगत कर खातों से रकम निकाली और स्थानांतरित की। इसी शिकायत के आधार पर सीबीआई ने 29 अक्टूबर को मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

कई अन्य लोगों के नाम भी जांच के दायरे में

बैंक अभिलेखों और जांच में सामने आए नामों के अनुसार, दीपांशी के अलावा प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी और शांती देवी के खिलाफ भी मामला दर्ज है। ये सभी साकीपुर गांव के निवासी बताए गए हैं।

वहीं, आशुतोष पाठक और सरोज देवी ऐच्छर गांव के रहने वाले हैं। दोनों को दीपांशी का पूर्व परिचित और करीबी बताया गया है। एक अन्य आरोपी शालिनी मंडी श्याम नगर की निवासी है।

सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि खातों से निकाली गई रकम किन-किन खातों में भेजी गई और इस पूरे मामले में अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।

70 प्रतिशत खाताधारकों को रकम लौटाने का दावा

घोटाले से प्रभावित खाताधारकों का नेतृत्व कर रहे बृजेश भाटी ने दावा किया है कि बैंक की ओर से अब तक करीब 70 प्रतिशत खाताधारकों के खातों में रकम लौटाने की बात कही गई है। बाकी लोगों को भी जल्द पैसा वापस करने का आश्वासन दिया गया है।

हालांकि, रकम वापस आने के बावजूद कई खाताधारक उसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। इसकी वजह अपने ग्राहक को जानें यानी केवाईसी प्रक्रिया पूरी होने में लग रहा समय है। खाताधारकों के अनुसार, इस प्रक्रिया में 2 से 3 दिन लग रहे हैं।

मंगलवार को भी बड़ी संख्या में पीड़ित अपनी रकम की स्थिति जानने और बैंक अधिकारियों से बातचीत करने पहुंचे। बैंक परिसर में दिनभर खाताधारकों की भीड़ लगी रही।

बेबाक24 टेक

ग्रेटर नोएडा का यह मामला बैंकिंग व्यवस्था में आंतरिक सुरक्षा और ग्राहकों के खातों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक कर्मचारी पर अधिकारियों के गोपनीय लॉगिन विवरण का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये की हेराफेरी करने का आरोप है। अब सीबीआई के सामने धन के वास्तविक प्रवाह, दूसरे खातों के इस्तेमाल और अन्य आरोपियों की भूमिका का पता लगाने की चुनौती है। पीड़ितों के लिए सबसे अहम सवाल है कि उनकी पूरी जमा पूंजी कब तक वापस मिलेगी।



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