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वाराणसी में साइबर ठगों पर बड़ी कार्रवाई, 283 गिरफ्तार

by on | 2026-11-03 12:42:01

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वाराणसी में साइबर ठगों पर बड़ी कार्रवाई, 283 गिरफ्तार

वाराणसी | बेबाक24 न्यूज़

वाराणसी में साइबर अपराध और संगठित ठगी के नेटवर्क के खिलाफ कमिश्नरेट पुलिस ने बीते एक वर्ष में व्यापक अभियान चलाने का दावा किया है। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में हुई कार्रवाई के दौरान 59 संगठित साइबर गिरोहों का पर्दाफाश कर 283 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा ठगी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे 15 फर्जी कॉल सेंटरों का भी खुलासा किया गया। पुलिस के अनुसार, इस अवधि में 28.30 करोड़ रुपये की संदिग्ध ठगी की रकम होल्ड कराई गई और 5.10 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए गए।

डिजिटल अरेस्ट और सिम-बॉक्स गिरोह का खुलासा

पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का भी पर्दाफाश किया। सामनेघाट के एकता नगर और कैलाशपुरी क्षेत्र में चल रहे अवैध सिम-बॉक्स सेटअप पर कार्रवाई के दौरान 32 पोर्ट वाले 6 सिम-बॉक्स बरामद किए गए। इनमें कुल 192 सिम स्लॉट थे। मौके से राउटर, गेटवे, वाई-फाई कैमरे और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी मिले। इस मामले में 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

पुलिस के मुताबिक, ठगी के इन नेटवर्कों में निवेश पर अधिक मुनाफे का लालच देने, सरकारी अधिकारी बनकर विदेशी नागरिकों को डराने और नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को निशाना बनाया जा रहा था।

28.30 करोड़ रुपये होल्ड, 5.10 करोड़ पीड़ितों को लौटाए

साइबर ठगी से जुड़े मामलों में आर्थिक नुकसान कम करने के लिए पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर मिली 12,282 शिकायतों का निस्तारण किया। पुलिस की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक:

  • 28.30 करोड़ रुपये की ठगी की रकम होल्ड कराई गई।

  • 5.10 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए गए।

  • 10,876 मोबाइल नंबर ब्लॉक कराए गए।

  • साइबर अपराध में इस्तेमाल 9,462 आईएमईआई नंबर ब्लॉक कराए गए।

  • 21 आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।

  • साइबर अपराधियों के चंगुल से 550 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

  • अपराध में इस्तेमाल 17 चारपहिया वाहन बरामद किए गए।

48 हजार से अधिक लोगों को किया जागरूक

साइबर अपराध से बचाव के लिए पुलिस ने स्कूलों, शिक्षण संस्थानों, सार्वजनिक स्थलों और विभिन्न शिविरों में जागरूकता अभियान चलाया। इस दौरान 48 हजार से अधिक लोगों को ऑनलाइन ठगी के तरीकों और उनसे बचने के उपायों की जानकारी दी गई। लोगों तक संदेश पहुंचाने के लिए पर्चे और पुस्तिकाएं भी बांटी गईं।

2026 में साइबर ठगी की रकम में 47.02 प्रतिशत कमी का दावा

पुलिस के तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 की तुलना में 2026 में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की रकम में 47.02 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। वहीं, होल्ड या लियन कराई गई धनराशि में 55.6 प्रतिशत और पीड़ितों को वापस दिलाई गई रकम में 73.4 प्रतिशत की वृद्धि बताई गई है। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2026 में साइबर अपराध से जुड़े 219 मुकदमे भी दर्ज किए गए।

अक्टूबर में दो मामलों में 1.65 करोड़ रुपये से अधिक होल्ड

अक्टूबर 2026 में साइबर क्राइम सेल और संबंधित थानों की कार्रवाई में दो बड़े मामलों में कुल 1 करोड़ 65 लाख 54 हजार रुपये होल्ड कराए गए।

सिगरा थाना क्षेत्र: पुलिस के अनुसार, पेट्रोल पंप की फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देकर एक व्यक्ति से 1.10 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी। शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करते हुए 75.77 लाख रुपये होल्ड कराए गए।

भेलूपुर थाना क्षेत्र: शेयर बाजार में निवेश के नाम पर एक डॉक्टर से 2.99 करोड़ रुपये की ठगी की शिकायत मिली थी। पुलिस ने संबंधित बैंकों और साइबर अपराध समन्वय केंद्र से संपर्क कर 89.77 लाख रुपये होल्ड कराए।

बेहतर काम करने वाले पुलिसकर्मियों को मिलेगी प्राथमिकता

पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने साइबर अपराध से जुड़ी टीमों को कार्रवाई और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी केवल शिकायतों के निस्तारण तक सीमित न रहें, बल्कि संगठित साइबर गिरोहों, फर्जी कॉल सेंटरों और अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भी पर्दाफाश करें।

पुलिस आयुक्त ने तकनीकी दक्षता, डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण और जटिल मामलों के खुलासे में विशेष क्षमता दिखाने वाले पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहित करने की बात कही। ऐसे कर्मियों को भविष्य में थाना प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर प्राथमिकता के आधार पर अवसर देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनजान लिंक पर क्लिक न करें, किसी के साथ ओटीपी या बैंकिंग संबंधी जानकारी साझा न करें। साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

बेबाक24 टेक

59 गिरोहों का पर्दाफाश और करोड़ों रुपये की रकम होल्ड कराना पुलिस की कार्रवाई का अहम हिस्सा है, लेकिन साइबर अपराध के खिलाफ सफलता का पैमाना केवल गिरफ्तारियां या दर्ज मुकदमे नहीं होने चाहिए। असली सवाल है कि ठगी का शिकार हुए कितने लोगों को उनकी पूरी रकम वापस मिल पाई और कितने मामलों में अपराधियों तक पहुंचकर उन्हें सजा दिलाई जा सकी? 28.30 करोड़ रुपये होल्ड कराना राहत की दिशा में कदम है, लेकिन पीड़ितों को समय पर पैसा लौटाना भी उतना ही जरूरी है। अब चुनौती इन गिरोहों के नए नेटवर्क बनने से रोकने और डिजिटल सुरक्षा के प्रति आम लोगों का भरोसा मजबूत करने की है।



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