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रामबहादुर राय का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा: राजनाथ सिंह

by on | 2026-09-25 22:30:43

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रामबहादुर राय का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा: राजनाथ सिंह

सन्तोष राय

​वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा द्वारा संपादित पुस्तक 'अस्सी के राय साहब' का डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में हुआ विमोचन


​रक्षा मंत्री बोले— कबीर, तुलसी और हरिश्चंद्र की परंपरा को रामबहादुर राय ने पत्रकारिता में किया चरितार्थ


​समारोह में बोले रामबहादुर राय— संविधान के 73वें और 74वें संशोधन की समीक्षा करे केंद्र सरकार


​नई दिल्ली।

वरिष्ठ पत्रकार और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के अध्यक्ष रामबहादुर राय के 80 वर्ष पूर्ण होने पर उनके जीवन और पत्रकारीय अवदान को रेखांकित करती पुस्तक 'अस्सी के राय साहब' का नई दिल्ली स्थित डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में भव्य विमोचन हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि रामबहादुर राय का पत्रकारीय जीवन मूल्यों, निष्ठा और समर्पण की एक ऐसी अनूठी मिसाल है, जिससे आज की युवा पीढ़ी को गहरा सबक लेने की जरूरत है।

​वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा, मनोज मिश्रा, संदीप जोशी और संजीव कुमार द्वारा संपादित इस कृति के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास को याद किया। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता का उदय देश में नवजागरण के उद्घोष के रूप में हुआ था, जिसने केवल भाषा को समृद्ध करने का काम नहीं किया, बल्कि एक व्यावहारिक, समावेशी और लोकतांत्रिक समाज की नींव रखी।

​कबीर, तुलसी और हरिश्चंद्र का मेल हैं राय साहब: रक्षा मंत्री

​पत्रकारिता में आ रहे नैतिक बदलावों पर चिंता व्यक्त करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि जब भी वर्तमान दौर की पत्रकारिता के मूल्यों से भटकाव पर मन में कोई संदेह उठता है, तब रामबहादुर राय का निष्पक्ष व्यक्तित्व एक विशाल पर्वत की तरह सामने खड़ा हो जाता है।

​उन्होंने कहा, "रामबहादुर राय ने संन्यासी की भांति पत्रकारिता के व्रत को निभाया है। उन्होंने कबीर की तरह पत्रकारिता की चादर को बेदाग रखा, बोलने की कला तुलसीदास जी से ली और सत्य के मार्ग पर राजा हरिश्चंद्र की भांति अडिग रहे। उनकी नजर हमेशा अर्जुन की तरह मुख्य खबर पर टिकी रही और कोई भी प्रलोभन या प्रभाव उन्हें उनके पथ से डिगा नहीं सका। उनके लिए पत्रकारिता कोई व्यापार नहीं, बल्कि एक पवित्र मिशन थी, है और रहेगी।"

​भूपेंद्र यादव बोले— सत्य और धरातल के संघर्षों को दी आवाज

​समारोह में उपस्थित केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने राय साहब को हिंदी पत्रकारिता का अप्रतिम हस्ताक्षर बताया। उन्होंने कहा कि रामबहादुर राय ने हमेशा धरातल के संघर्षों को ईमानदारी और सत्यनिष्ठा के साथ कलमबद्ध किया है। यह पुस्तक उनके जीवन के कई अनदेखे और प्रेरणादायी पहलुओं से पाठकों को रूबरू कराएगी।

​वहीं वरिष्ठ पत्रकार बनवारी ने कहा कि राय साहब आत्म-प्रशंसा से दूर रहने वाले व्यक्तित्व हैं और वे इस पुस्तक के भी पक्ष में नहीं थे, लेकिन समाज के गुणी जनों का सम्मान करना परंपरा का दायित्व है।

​विमोचन मंच से राय साहब का सत्ता विकेंद्रीकरण पर बड़ा सुझाव

​कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए रामबहादुर राय ने कहा कि वे इस तरह के व्यक्तिगत आयोजनों के पक्षधर नहीं थे, परंतु सहयोगियों के स्नेह के कारण उन्हें इसकी सहमति देनी पड़ी।

​अपने वक्तव्य में  राय साहब ने मंच पर मौजूद केंद्रीय मंत्रियों का ध्यान देश में सत्ता के विकेंद्रीकरण की ओर आकृष्ट कराया। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि भारतीय संविधान के 73वें और 74वें संशोधन अधिनियम (पंचायती राज एवं स्थानीय निकाय व्यवस्था) की समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि जमीनी स्तर पर लोकतंत्र और मजबूत हो सके।



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