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कैंची से कटा ताला, 12 साइकिलें बरामद—BHU परिसर को चोर बाजारी का केंद्र बनाने वाले 3 शातिर पुलिस के हत्थे चढ़े!

by on | 2026-09-24 17:52:58

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कैंची से कटा ताला, 12 साइकिलें बरामद—BHU परिसर को चोर बाजारी का केंद्र बनाने वाले 3 शातिर पुलिस के हत्थे चढ़े!

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थान का सुरक्षा तंत्र एक बार फिर सवालों के घेरे में है। परिसर में छात्रों की मेहनत और जरूरत की साइकिलों पर हाथ साफ करने वाले एक गिरोह का लंका पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। ताला काटने के लिए किसी बड़े कटर की नहीं, महज एक कैंची की जरूरत पड़ती थी—और सेकेंडों में छात्रों की गाढ़ी कमाई से खरीदी गई साइकिल गायब!

​पुलिस ने घेराबंदी कर 12 चोरी की साइकिलों के साथ तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पढ़ाई का धाम या चोरों की चरागाह?

​BHU कैंपस में पिछले काफी समय से साइकिल चोरी का सिलसिला जारी था। छात्र लगातार प्रॉक्टोरियल बोर्ड के चक्कर काट रहे थे, अर्जियां लगा रहे थे और लंका थाने में NCR दर्ज हो रही थी। सवाल उठना लाजमी है कि जिस कैंपस की सुरक्षा पर लाखों-करोड़ों रुपए खर्च होते हैं, वहां बेखौफ होकर चोर कैंची से ताले काट रहे थे और किसी को भनक तक नहीं लगी?

​अगर CCTV और मुखबिर की सूचना पर ही पुलिस को चलना था, तो प्रॉक्टोरियल बोर्ड की गश्त आखिर किस काम की?

ऐसे चढ़े पुलिस के हत्थे

​ACP भेलूपुर गौरव कुमार के मुताबिक, 23 सितंबर की रात मुखबिर की पक्की सूचना पर लंका पुलिस ने अकेला बाबा मंदिर वाले रास्ते के पास घेराबंदी की। मौके से तीन युवकों को दबोचा गया, जिनकी पहचान सूरज कन्नौजिया (20), शिवम कुमार (20) और सोहम रंगीले मिश्रा (19) के रूप में हुई। तीनों वाराणसी के फूलपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले बताए जा रहे हैं।

​पूछताछ में आरोपियों ने कबूला कि वे कैंपस में खड़ी साइकिलों के लॉक कैंची से काटते थे, आराम से बाहर निकालते थे और राहगीरों को औने-पौने दामों में बेच देते थे। गिरफ्तार सूरज कन्नौजिया का तो पुराना आपराधिक इतिहास भी है—2023 में भी लंका और फूलपुर थाने में उस पर चोरी के मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। यानी बेखौफ अपराधी बेझिझक कैंपस में टहल रहे थे।

प्रशासन फेल, छात्रा ने खुद खोज निकाली थी साइकिल!

​इस पूरी कार्रवाई से ठीक सात दिन पहले कैंपस सुरक्षा के दावों की पोल तब खुली थी, जब अंग्रेजी परास्नातक की छात्रा सायरा दत्ता की साइकिल चोरी हुई। छात्रा को पुलिस या सिक्योरिटी से उम्मीद लगाने के बजाय खुद मोर्चा संभालना पड़ा। साइकिल में GPS लगा था—छात्रा ने अपनी सहेली के साथ स्कूटी दौड़ाई, लोकेशन ट्रैक की और रोहनिया बाजार की एक बस्ती से खुद अपनी साइकिल बरामद कर ली। चोर भाग खड़े हुए, लेकिन यह घटना व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा थी।

बेबाक सवाल:

  1. ​क्या BHU कैंपस में बाहरी और संदिग्ध तत्वों की एंट्री पर कोई ठोस चेकिंग व्यवस्था नहीं है?
  2. ​एक शातिर अपराधी बार-बार कैंपस में आकर चोरी की घटनाओं को अंजाम देता रहा, सिक्योरिटी क्या सो रही थी?
  3. ​12 साइकिलें तो बरामद हो गईं, लेकिन क्या भविष्य में छात्रों की साइकिलें सुरक्षित रहेंगी या फिर हर छात्र को अपनी साइकिल में GPS लगवाना पड़ेगा?

​फिलहाल तीनों आरोपियों के खिलाफ लंका थाने में BNS की धारा 317(2) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। देखना यह है कि इस कार्रवाई के बाद कैंपस का सुरक्षा ढांचा सुधरता है या फिर यह महज एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा।



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