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रुद्रांक्ष पाटिल: शतरंज-फुटबॉल से निशानेबाजी तक, विश्व चैंपियन ने एशियाई खेलों में जीता कांस्य

by on | 2026-09-21 14:02:01

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रुद्रांक्ष पाटिल: शतरंज-फुटबॉल से निशानेबाजी तक, विश्व चैंपियन ने एशियाई खेलों में जीता कांस्य

नागोया | बेबाक24 न्यूज़

महाराष्ट्र के ठाणे से निकले रुद्रांक्ष पाटिल ने एशियाई खेल 2026 में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। 2022 में महज 18 साल की उम्र में विश्व चैंपियन बनने वाले रुद्रांक्ष एक समय स्वर्ण पदक की दौड़ में आगे चल रहे थे, लेकिन 9.7 अंक के एक निशाने के बाद वह तीसरे स्थान पर खिसक गए।

शतरंज और फुटबॉल से शुरू हुआ सफर

16 दिसंबर 2003 को ठाणे में जन्मे रुद्रांक्ष की खेल यात्रा निशानेबाजी से नहीं, बल्कि शतरंज और फुटबॉल से शुरू हुई थी। परिवार के प्रोत्साहन से उन्होंने निशानेबाजी को चुना और कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी।रंगों के फेर में फंसी सियासत: अखिलेश के भगवा रंग पर मायावती का निशाना; बोलीं- मुस्लिम वोटरों से भरोसा उठ गया! पिता बालासाहेब पाटिल और मां हेमांगिनी पाटिल के समर्थन ने उनके खेल करियर को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

18 साल की उम्र में बने विश्व चैंपियन

रुद्रांक्ष के करियर को बड़ा मोड़ 2022 में मिला। काहिरा में हुई विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। वह इस स्पर्धा में अभिनव बिंद्रा के बाद विश्व चैंपियन बनने वाले दूसरे भारतीय बने।

इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने पेरिस ओलंपिक के लिए कोटा भी हासिल किया। कम उम्र में मिली इस सफलता ने उन्हें भारतीय निशानेबाजी के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल कर दिया।

एशियाई खेलों में दो पदक

एशियाई खेल 2026 में रुद्रांक्ष ने पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में हिमांशु ढिल्लन और पार्थ माने के साथ मिलकर भारत को रजत पदक दिलाया। इसके बाद व्यक्तिगत स्पर्धा में भी उन्होंने पदक हासिल किया।

व्यक्तिगत फाइनल में रुद्रांक्ष लंबे समय तक स्वर्ण की दौड़ में बने रहे। चीन के शेन लिहाओ की वापसी और 9.7 अंक के एक निशाने के बाद स्थिति बदली और रुद्रांक्ष तीसरे स्थान पर आ गए। उन्होंने 230.9 अंक के साथ कांस्य जीता। हिमांशु ढिल्लन ने रजत, जबकि शेन लिहाओ ने 254.2 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता।

हर पदक की अपनी कहानी

रुद्रांक्ष के लिए यह कांस्य पदक उस सफर की अगली कड़ी है, जो शतरंज और फुटबॉल से शुरू होकर विश्व चैंपियन बनने तक पहुंचा। एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक से चूकने के बावजूद उन्होंने प्रतियोगिता में भारत के लिए एक और पदक जोड़ा।

बेबाक24 की राय

रुद्रांक्ष की कहानी बताती है कि शीर्ष स्तर के खेल में सफलता केवल एक मुकाबले के परिणाम से तय नहीं होती। विश्व चैंपियन बनने के बाद एशियाई खेलों में टीम और व्यक्तिगत दोनों स्पर्धाओं में पदक हासिल करना उनके निरंतर प्रदर्शन को दर्शाता है। आने वाले मुकाबलों में उनके प्रदर्शन पर भारतीय निशानेबाजी की नजर रहेगी।



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