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चुनाव आयोग पर रिपोर्ट के बाद सियासी घमासान, विपक्ष ने दोबारा चुनाव की मांग उठाई

by admin@bebak24.com on | 2026-09-24 14:08:02

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चुनाव आयोग पर रिपोर्ट के बाद सियासी घमासान, विपक्ष ने दोबारा चुनाव की मांग उठाई

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। रिपोर्ट में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई मामलों पर आपत्ति जताए जाने का दावा किया गया है। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कुछ राज्यों में दोबारा चुनाव कराने की मांग की है।

रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और आदेशों को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इनमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने, मतदाता पंजीकरण फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता आंकड़ों के प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि दोनों आयुक्तों ने मतदाता आंकड़ों और चुनावी सॉफ्टवेयर के केंद्रीकरण को लेकर चिंता जताई तथा इस संबंध में कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा।

विपक्ष ने उठाई दोबारा चुनाव की मांग

रिपोर्ट सामने आने के बाद शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी के संस्थापक अरविंद केजरीवाल समेत कई विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए।

उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव दोबारा कराने की मांग की। उन्होंने इन चुनावों को मतपत्र के जरिए कराने की बात भी कही।

ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर से पहले वाली मतदाता सूची के आधार पर फिर से चुनाव कराने की मांग की। वहीं अरविंद केजरीवाल ने हाल के वर्षों में हुए चुनावों को रद्द कर दोबारा कराने की मांग रखी।

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, एसआईआर रोकने और चुनाव आयोग के कामकाज की जांच की मांग की है।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

चुनाव आयोग ने रिपोर्ट के बाद कहा कि लिखित टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और अलग-अलग राय उसकी सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, किसी मुद्दे पर तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच चर्चा के दौरान अलग-अलग विचार सामने आ सकते हैं, लेकिन अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

आयोग ने कहा कि पिछले एक साल में एसआईआर समेत प्रमुख मामलों पर लिए गए फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से हुए हैं।

भाजपा ने विपक्ष पर साधा निशाना

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव नहीं जीत पाने की वजह से विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें आयोग ने एसआईआर से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही है।

वहीं, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत और एसवाई कुरैशी ने भी इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताया है। उनके बयानों के अनुसार, मतदाता पंजीकरण से जुड़े बदलावों और आयोग की आंतरिक प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों की गंभीरता से जांच की जरूरत है।

बेबाक24 की राय: विवाद का केंद्र चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनावी फैसलों की प्रक्रिया है। आयोग ने अंतिम फैसलों में तीनों सदस्यों की सहमति होने की बात कही है, जबकि विपक्ष इन दावों और रिपोर्ट के आधार पर जांच तथा कुछ चुनाव दोबारा कराने की मांग कर रहा है। आगे की कानूनी और संस्थागत प्रक्रिया से ही इन दावों की स्थिति स्पष्ट होगी।



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