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सोन के पानी पर 'डाका' डालने की तैयारी? सांसद सुधाकर सिंह ने खोला मोर्चा, केंद्रीय मंत्री को चिट्ठी लिख उठाए गंभीर सवाल

by on | 2026-09-16 08:09:52

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सोन के पानी पर 'डाका' डालने की तैयारी? सांसद सुधाकर सिंह ने खोला मोर्चा, केंद्रीय मंत्री को चिट्ठी लिख उठाए गंभीर सवाल

बक्सर/पटना: सोन नदी के पानी के बंटवारे को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 'जल उपलब्धता के पुनर्निर्धारण' के नाम पर बिहार के हिस्से का पानी घटाने की कथित आड़ पर बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने सीधा हमला बोला है। उन्होंने केंद्रीय जलशक्ति मंत्री को एक कड़ा पत्र भेजकर चल रही मौजूदा प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने की पुरजोर मांग की है। सांसद का साफ कहना है कि कागजी आंकड़ों का खेल खेलकर बिहार के हक पर किसी भी कीमत पर कैंची नहीं चलने दी जाएगी।

1973 के बाणसागर समझौते का सच और आंकड़ों का झोल

सांसद सुधाकर सिंह ने बाणसागर एकरारनामा (1973) का हवाला देते हुए केंद्र सरकार के आंकड़ों पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि 1973 में सोन बेसिन में कुल जल उपलब्धता 14.25 MAF आंकी गई थी, लेकिन अब इसे अचानक बढ़ाकर 19.6335 MAF बताया जा रहा है।

​सुधाकर सिंह ने तीखा सवाल दागा—“आखिर यह 5.38 MAF अतिरिक्त पानी रातों-रात कहां से टपक पड़ा? इसका वैज्ञानिक आधार क्या है?” उन्होंने आरोप लगाया कि कागज पर अतिरिक्त पानी दिखाकर बिहार के वास्तविक जल अधिकार में कटौती करने की पटकथा लिखी जा रही है।

SCADA प्रणाली और कागजी 'सरप्लस' पर घेरा

इंद्रपुरी बराज पर लगी SCADA प्रणाली के आंकड़ों को खारिज करते हुए सांसद ने कहा कि इसमें ‘Unmanaged Surplus Discharge’ (अनियंत्रित अतिरिक्त बहाव) को भी शामिल कर लिया जाता है, जो पूरी तरह गलत है। नदी के वास्तविक प्रवाह, नहरों के आउटफ्लो, जलाशयों की स्थिति और जमीनी सिंचाई जरूरतों को समझे बिना जल का सही आकलन हो ही नहीं सकता।

​उन्होंने कैमूर के रामगढ़ इलाके की जमानियां पंप नहर परियोजना का जिक्र करते हुए पूछा कि यदि सोन नदी में वाकई में इतना 'अतिरिक्त पानी' मौजूद है, तो बिहार की बरसों से अटकी सिंचाई परियोजनाओं को सूखा क्यों मारा जा रहा है?

UP की कमर्शियल परियोजनाओं पर मेहरबानी क्यों?

उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित 'पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स' (Pumped Storage Projects) के लिए सोन नदी से पानी मांगे जाने पर भी बक्सर सांसद ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने इस मांग की स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा कराने की बात कही। सुधाकर सिंह ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि बिहार के किसानों के खेतों की प्यास मारकर और सोन नदी के पर्यावरणीय प्रवाह (Environmental Flow) से खिलवाड़ करके किसी भी व्यावसायिक (कमर्शियल) प्रोजेक्ट को पानी नहीं दिया जाना चाहिए।

उच्चस्तरीय बैठक और आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग

सांसद ने केंद्र सरकार से मांग की है कि बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के प्रतिनिधियों समेत स्वतंत्र जल विशेषज्ञों की उपस्थिति में तत्काल एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई जाए और जल उपलब्धता के सभी आंकड़े पारदर्शी तरीके से जनता के सामने रखे जाएं।

​उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि 'सरप्लस वॉटर' के नाम पर बिहार के हिस्से का एक बूंद पानी भी छीना गया, तो इसे किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



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