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ब्रिक्स डिनर में शाकाहारी भोजन पर रामदेव बोले- इसे धर्म से जोड़ना बौद्धिक दिवालियापन

by on | 2026-09-15 19:34:13

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ब्रिक्स डिनर में शाकाहारी भोजन पर रामदेव बोले- इसे धर्म से जोड़ना बौद्धिक दिवालियापन

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित गाला डिनर में शाकाहारी भोजन पर उठे सवालों के बीच योग गुरु रामदेव ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि दुनिया मांसाहार से शाकाहार और अब वीगन जीवनशैली की ओर बढ़ रही है। रामदेव ने इस मुद्दे को धर्म से जोड़ने के बजाय स्वास्थ्य और विज्ञान के नजरिए से देखने की बात कही।

रामदेव ने मंगलवार को समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि भोजन को लेकर सवाल उठाने वाले लोगों का नजरिया उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि दुनिया में खान-पान की आदतों में बदलाव हो रहा है और वीगन जीवनशैली की ओर भी लोगों का रुझान बढ़ रहा है।

'क्या खाना है, यह व्यक्ति की अपनी पसंद'

रामदेव ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के भोजन का चुनाव उसकी व्यक्तिगत इच्छा का विषय है। हालांकि, उनके मुताबिक विज्ञान और स्वास्थ्य के लिहाज से शाकाहारी भोजन लाभकारी है और वीगन भोजन को वह उससे भी बेहतर मानते हैं।

उन्होंने कहा कि खाने की पसंद को धार्मिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक इस तरह के मुद्दों को धर्म से जोड़ने के बजाय स्वास्थ्य और जीवनशैली के संदर्भ में समझना चाहिए।

ब्रिक्स डिनर में क्या परोसा गया?

भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान आयोजित गाला डिनर में कई पारंपरिक भारतीय शाकाहारी व्यंजन परोसे गए। इनमें पनीर लबाबदार, गुच्छी मार्मिक, कैरट बीन पोरियल, ठक्कली बेले सारू, मिलेट पुलाव और बीट रूट रायता शामिल थे।

डिनर का भोजन भारतीय व्यंजनों और स्थानीय स्वाद को केंद्र में रखकर तैयार किया गया था।

राहुल गांधी ने भी उठाया था सवाल

ब्रिक्स डिनर के बाद कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भारतीयों के खान-पान को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि 80% भारतीय मांसाहारी हैं

इस बयान के बाद ब्रिक्स डिनर में परोसे गए भोजन और भारत की खान-पान की विविधता को लेकर चर्चा तेज हो गई। भारत में अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में भोजन की परंपराएं अलग हैं, ऐसे में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक बहस का हिस्सा बन गया है।

बेबाक24 टेक: ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भोजन केवल मेन्यू का हिस्सा नहीं, बल्कि मेजबान देश की सांस्कृतिक पहचान दिखाने का माध्यम भी होता है। इस बार शाकाहारी व्यंजनों को लेकर राजनीतिक बहस जरूर छिड़ी, लेकिन रामदेव की टिप्पणी ने चर्चा को स्वास्थ्य और जीवनशैली के नजरिए से देखने की कोशिश की है।



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