ब्रेकिंग न्यूज़
झांसी हादसे में छोटे बेटे अबान की मौत, कसारी-मसारी में पिता-चाचा की कब्रों के पास ही होगा सुपुर्द-ए-खाक
राष्ट्रीय राष्ट्रीय

9/11 से पहले ओसामा के निशाने पर था भारत? सीआईए के दस्तावेजों में सामने आया बड़ा खुलासा

by admin@bebak24.com on | 2026-09-13 13:18:20

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3079


9/11 से पहले ओसामा के निशाने पर था भारत? सीआईए के दस्तावेजों में सामने आया बड़ा खुलासा

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की ओर से सार्वजनिक किए गए पुराने दस्तावेजों में अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन की आतंकी योजनाओं को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। 28 अगस्त 1998 के एक प्रेसिडेंशियल डेली ब्रीफ में भारत का नाम उन देशों में शामिल बताया गया, जहां बिन लादेन का नेटवर्क हमले की संभावना पर विचार कर रहा था। हालांकि, दस्तावेज में भारत में किसी खास जगह, तारीख या हमले की विस्तृत योजना का उल्लेख नहीं है।

सीआईए ने 9/11 हमलों की 25वीं बरसी के मौके पर ओसामा बिन लादेन से संबंधित 70 से अधिक प्रेसिडेंशियल इंटेलिजेंस ब्रीफ सार्वजनिक किए हैं। इनमें 100 से अधिक पन्नों की सामग्री शामिल है। दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि अमेरिकी एजेंसियों को 1998 से 2001 के बीच अलकायदा से जुड़े संभावित हमलों को लेकर लगातार चेतावनियां मिल रही थीं।

1998 की रिपोर्ट में भारत समेत कई देशों का जिक्र

28 अगस्त 1998 की रिपोर्ट में भारत के साथ पाकिस्तान, मिस्र, कुवैत, सऊदी अरब, यमन, युगांडा और संभावित रूप से नाइजीरिया का भी उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट का आकलन था कि ओसामा बिन लादेन का आतंकी नेटवर्क अमेरिका की कार्रवाई के बावजूद सक्रिय बना हुआ था।

दस्तावेज में संचार नेटवर्क के सक्रिय रहने और कुछ आतंकी प्रशिक्षण शिविरों में गतिविधियां दोबारा शुरू होने की जानकारी भी दी गई थी। अमेरिकी खुफिया आकलन के मुताबिक, अलकायदा प्रमुख भविष्य में अमेरिका और ब्रिटेन के खिलाफ हमलों की कोशिश जारी रख सकता था।

60 से ज्यादा देशों तक फैले नेटवर्क का दावा

सीआईए के दस्तावेजों में बिन लादेन से जुड़े नेटवर्क की व्यापक पहुंच का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, उसके पास कम से कम 60 देशों में मौजूद लोगों और सहयोगी आतंकी संगठनों के नेटवर्क का इस्तेमाल करने की क्षमता थी।

इससे यह संकेत मिलता है कि 9/11 से कई साल पहले ही अमेरिकी खुफिया एजेंसियां अलकायदा को केवल एक क्षेत्र तक सीमित संगठन नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय आतंकी नेटवर्क के तौर पर देख रही थीं।

अमेरिका को पहले से मिल रही थीं हमले की चेतावनियां

जारी किए गए प्रेसिडेंशियल ब्रीफ से यह भी सामने आता है कि अमेरिकी राष्ट्रपतियों को 1998 से 2001 के बीच संभावित आतंकी हमलों को लेकर कई बार खुफिया चेतावनियां दी गई थीं। इन दस्तावेजों का सिलसिला तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल से शुरू होकर जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के शासन तक पहुंचता है।

इन रिपोर्टों में अलकायदा की बढ़ती क्षमताओं, उसके अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और अमेरिका पर संभावित हमले के जोखिम का आकलन किया गया था। बावजूद इसके, 11 सितंबर 2001 को अमेरिका की धरती पर वह हमला हुआ, जिसने वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को हमेशा के लिए बदल दिया।

11 सितंबर 2001 को क्या हुआ था?

11 सितंबर 2001 को अलकायदा के 19 आतंकियों ने चार यात्री विमानों का अपहरण किया था। इनमें से दो विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की ट्विन टावर से टकराए, जबकि तीसरा विमान पेंटागन से जा टकराया। चौथा विमान पेंसिल्वेनिया में दुर्घटनाग्रस्त हुआ।

9/11 हमले में हजारों लोगों की मौत हुई और इसके बाद अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी सैन्य, खुफिया और आंतरिक सुरक्षा नीति में व्यापक बदलाव किए।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खुलासा?

सीआईए दस्तावेजों में भारत का उल्लेख यह दिखाता है कि 9/11 से पहले भी अलकायदा की गतिविधियों और उसके अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को लेकर भारत समेत कई देशों के लिए खतरे की आशंका मौजूद थी। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेज भारत में किसी निश्चित हमले की विस्तृत योजना की पुष्टि नहीं करते।

बेबाक24 टेक: इस खुलासे की सबसे अहम बात सिर्फ भारत का नाम सामने आना नहीं है, बल्कि यह है कि 9/11 से वर्षों पहले ही अमेरिकी खुफिया एजेंसियां एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क के विस्तार को लेकर चेतावनी दे रही थीं, जिसकी क्षमता कई देशों तक पहुंच चुकी थी। ऐसे दस्तावेज यह भी दिखाते हैं कि खुफिया चेतावनी और समय पर कार्रवाई के बीच की खाई कितनी गंभीर हो सकती है।



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment