ब्रेकिंग न्यूज़
झांसी हादसे में छोटे बेटे अबान की मौत, कसारी-मसारी में पिता-चाचा की कब्रों के पास ही होगा सुपुर्द-ए-खाक
राज्य उत्तर प्रदेश

155 दिन में 23 मृत्युदंड: मुजफ्फरनगर के जज बोले- डर के आगे नहीं झुकूंगा

by admin@bebak24.com on | 2026-09-08 11:43:22

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3000


155 दिन में 23 मृत्युदंड: मुजफ्फरनगर के जज बोले- डर के आगे नहीं झुकूंगा

मुजफ्फरनगर | बेबाक24 न्यूज़

मुजफ्फरनगर फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने 155 दिनों के भीतर 10 चर्चित मामलों में 23 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया है। इसी सिलसिले में दिए एक फैसले में जज ने कहा कि वह किसी दबाव या भय के आगे झुककर फैसला नहीं करेंगे।

जज दिवाकर के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ माफिया और गैंगस्टरों की ओर से उन्हें संदेश भेजे जाने का दावा किया गया कि उनके खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ाने पर उनका न्यायालय बदलवा दिया जाएगा या उनका तबादला करा दिया जाएगा।

'डरकर काम करना पड़े तो इस्तीफा बेहतर'

एक फैसले में जज ने लिखा कि उनके माता-पिता ने उन्हें भगवान के अलावा किसी से न डरने की सीख दी है। उन्होंने कहा कि यदि न्यायाधीश बाहुबलियों, माफिया या अपराधियों के दबाव में काम करने लगे तो न्यायपालिका पर जनता का भरोसा कमजोर होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि वह ऐसे दबाव से भयभीत होकर काम करने लगें तो न्यायिक संस्था से इस्तीफा देना उनके लिए बेहतर होगा।

शहजादी हत्याकांड में मृत्यु पूर्व बयान बना आधार

शाहपुर क्षेत्र में करीब 8 वर्ष पहले घरेलू विवाद में शहजादी को कथित तौर पर जिंदा जलाने के मामले में अदालत ने उसके पति नदीम को मृत्युदंड सुनाया।

इस मामले में शिकायतकर्ता के पिता समेत कुछ गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए थे। इसके बावजूद अदालत ने मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज मृत्यु पूर्व बयान को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना और उसके आधार पर दोषसिद्धि की।

किन मामलों में सुनाई गईं सजा?

रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने 6 अप्रैल से 7 सितंबर के बीच कई चर्चित हत्याकांडों में मृत्युदंड सुनाया। इनमें प्रमुख मामले शामिल हैं:

समीर सैफी हत्याकांड: वर्ष 2019 में लेन-देन के विवाद में अधिवक्ता समीर सैफी की हत्या के मामले में सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान और शालू उर्फ अरबाज को मृत्युदंड दिया गया।

शेखर हत्याकांड: 2019 में 70 हजार रुपये के लेन-देन के विवाद से जुड़े हत्या मामले में मुकेश, प्रदीप, संदीप और सोनू को मृत्युदंड सुनाया गया।

राजेश देवी-हिमांशु हत्याकांड: 2011 में मां राजेश देवी और उनके 6 वर्षीय बेटे हिमांशु की हत्या के मामले में रईस को मृत्युदंड दिया गया।

राजेंद्र सैनी हत्याकांड: 2018 में राजेंद्र सैनी की हत्या कर शव जलाने के मामले में रामकरण उर्फ सावन गिरी और गीलू को मृत्युदंड सुनाया गया। एक अन्य आरोपी वीरसैन की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी थी।

होमगार्ड रतिराम हत्याकांड: 2020 में गश्त के दौरान होमगार्ड रतिराम की चाकू मारकर हत्या के मामले में दोषी दीपक को भी मृत्युदंड सुनाया गया।

155 दिनों में 23 मृत्युदंड का दावा

अदालत के उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक, 6 अप्रैल से 7 सितंबर 2026 के बीच 155 दिनों में 10 मामलों में 23 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया गया। इसे मुजफ्फरनगर में न्यायालय की स्थापना के बाद का उल्लेखनीय रिकॉर्ड बताया जा रहा है।

हालांकि, मृत्युदंड के मामलों में दोषसिद्धि के बाद भी संबंधित पक्षों को ऊपरी अदालतों में अपील का कानूनी अधिकार रहता है। इसलिए अंतिम परिणाम न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगा।



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment