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भोपाल में गरबा को लेकर नई मांग, दुर्गा प्रतिमा-आरती और पंचगव्य प्रवेश पर जोर

by admin@bebak24.com on | 2026-09-13 12:51:23

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भोपाल में गरबा को लेकर नई मांग, दुर्गा प्रतिमा-आरती और पंचगव्य प्रवेश पर जोर

भोपाल | बेबाक24 न्यूज़

नवरात्रि से पहले भोपाल में गरबा आयोजनों को लेकर हिंदू उत्सव समिति ने आयोजकों के सामने कई मांगें रखी हैं। समिति ने गरबा पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने, सुबह-शाम आरती कराने और धार्मिक गीतों व भजनों पर गरबा आयोजित करने की अपील की है। समिति ने प्रवेश से पहले वराह अवतार की पूजा और पंचगव्य देने की व्यवस्था की मांग भी की है।

समिति अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी के अनुसार, गरबा को केवल मनोरंजन का आयोजन न बनाकर नवरात्रि की धार्मिक और पारंपरिक भावना के अनुरूप आयोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने आयोजकों से पंडालों में पूजा-पाठ की नियमित व्यवस्था रखने की अपील की।

प्रवेश से पहले पंचगव्य देने की मांग

समिति ने पंडालों के प्रवेश द्वार पर भगवान विष्णु के वराह अवतार की प्रतिमा स्थापित करने और उसके पूजन के बाद लोगों को पंचगव्य देने की मांग की है। पंचगव्य में दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र शामिल होते हैं।

समिति का कहना है कि इससे आयोजनों में धार्मिक वातावरण को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह फिलहाल संगठन की मांग है, किसी सरकारी आदेश का हिस्सा नहीं।

धार्मिक गीतों पर गरबा कराने पर जोर

हिंदू उत्सव समिति ने गरबा आयोजकों से धार्मिक गीतों और भजनों को प्राथमिकता देने को कहा है। साथ ही आयोजन में अश्लीलता और फूहड़ता रोकने की अपील की गई है।

समिति के अनुसार नवरात्रि देवी आराधना का पर्व है और सार्वजनिक गरबा आयोजनों में इसकी धार्मिक भावना का ध्यान रखा जाना चाहिए।

नियम नहीं माने तो कार्रवाई की चेतावनी

समिति ने कहा है कि आयोजकों को इन मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। संगठन की ओर से यह भी चेतावनी दी गई है कि मांगों की अनदेखी होने पर वह अपनी ओर से कार्रवाई करेगा।

भोपाल में नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में गरबा और डांडिया आयोजन होते हैं। ऐसे में समिति की मांगों के बाद पंडालों की प्रवेश व्यवस्था और आयोजन के स्वरूप को लेकर बहस तेज हो गई है।

बेबाक24 दृष्टिकोण: गरबा के धार्मिक स्वरूप को लेकर संगठनों की अपनी मांगें हो सकती हैं, लेकिन किसी भी सार्वजनिक आयोजन में प्रवेश की शर्तें, सुरक्षा और व्यवस्थाएं कानूनी दायरे में ही तय होनी चाहिए। प्रशासन और आयोजकों की जिम्मेदारी होगी कि परंपरा के साथ कानून-व्यवस्था और सभी प्रतिभागियों की सुविधा का संतुलन बना रहे।



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