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सेवा ही परमो धर्मः राजेश शुक्ला ने जताया आभार, कहा— 'समाज को जोड़ना प्राथमिक संकल्प'

by on | 2026-09-12 20:35:14

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सेवा ही परमो धर्मः राजेश शुक्ला ने जताया आभार, कहा— 'समाज को जोड़ना प्राथमिक संकल्प'

अंजनी राय

लालगंज, आजमगढ़। भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा द्वारा राजेश शुक्ला को प्रदेश महामंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपे जाने पर उन्होंने संगठन के शीर्ष नेतृत्व, वरिष्ठजनों, कार्यकर्ताओं और समाज के प्रबुद्ध जनों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। जिम्मेदारी मिलने के बाद अपने पहले वक्तव्य में उन्होंने स्पष्ट किया कि 'सेवा ही परमो धर्मः' के मूल मंत्र को आधार बनाकर वे समाज और राष्ट्र हित में निरंतर कार्य करेंगे।

पद त्याग और समर्पण का प्रतीक

​नवनियुक्त प्रदेश महामंत्री राजेश शुक्ला ने कहा कि कोई भी पद केवल प्रतिष्ठा या सम्मान का विषय नहीं होता, बल्कि यह त्याग, समर्पण, समय और गहरी जिम्मेदारी का प्रतीक है। ब्राह्मण समाज को एक सूत्र में पिरोना एक चुनौतीपूर्ण दायित्व है, लेकिन यदि निष्ठा, कर्मठता और सबको साथ लेकर चलने की भावना हो तो हर कठिन लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

जरूरतमंदों की मदद ही वास्तविक सफलता

​उन्होंने जोर देते हुए कहा कि किसी भी सामाजिक संगठन की सार्थकता पदाधिकारियों की संख्या से नहीं, बल्कि समाज के प्रति उसके सेवा-भाव से तय होती है। संगठन का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना होना चाहिए।

​उन्होंने प्राथमिकताएं गिनाते हुए कहा:

  • शिक्षा का अधिकार: धन के अभाव में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
  • सामूहिक सहयोग: आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में हर संभव सहायता।
  • चिकित्सा सहायता: इलाज के अभाव में जूझ रहे असहाय लोगों को समय पर मदद पहुंचाना।
  • न्याय की लड़ाई: किसी भी पीड़ित या अन्याय से परेशान व्यक्ति के साथ मजबूती से खड़ा होना।

सामाजिक सद्भाव और भाईचारे पर बल

​राजेश शुक्ला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जातीय संगठनों का काम समाज को जोड़ना और मजबूत करना है, किसी वर्ग में कटुता या वैमनस्य फैलाना नहीं। हम सभी ईश्वर की संतान और सर्वप्रथम मानव हैं। दूसरी जातियों के प्रति सम्मान और भाईचारा बनाए रखना ही एक संस्कारित समाज की असली पहचान है।

​उन्होंने अंत में कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि आइए, साथ मिलकर जरूरतमंदों का सहारा बनें, शिक्षा और सेवा को बढ़ावा दें और एक संगठित, समर्थ व संस्कारित समाज के निर्माण में अपनी आहुति दें।



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