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दिल्ली में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, 11 देशों के बीच व्यापार और वित्त पर होगा मंथन

by admin@bebak24.com on | 2026-09-08 11:44:10

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दिल्ली में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, 11 देशों के बीच व्यापार और वित्त पर होगा मंथन

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

भारत में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियां तेज हो गई हैं। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर 2026 को होने वाली बैठक में 11 सदस्य देशों के नेता वैश्विक व्यापार, वित्तीय सहयोग, डिजिटल अर्थव्यवस्था और कृत्रिम बुद्धिमत्ता समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

ब्रिक्स की स्थापना के 20 वर्ष पूरे होने के बाद यह पहला बड़ा सम्मेलन है, जिसमें संगठन अपने विस्तारित स्वरूप में एक साथ आएगा। भारत इस बार सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसकी अध्यक्षता करेंगे।

11 देशों का विस्तारित ब्रिक्स

विस्तार के बाद ब्रिक्स में अब भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हैं। इसके अलावा कई देशों को साझेदार देश का दर्जा दिया गया है।

भारत का जोर ऐसे सहयोग पर है, जिससे विकासशील देशों की आर्थिक प्राथमिकताओं और वैश्विक मंच पर उनकी भूमिका को मजबूती मिले।

व्यापार में डॉलर पर निर्भरता घटाने पर जोर

शिखर सम्मेलन में सीमा पार भुगतान को आसान बनाने और कारोबार में राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर चर्चा हो सकती है। इसके साथ वैश्विक आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने और न्यू डेवलपमेंट बैंक की भूमिका बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए बेहतर अवसर, डिजिटल व्यापार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सुरक्षित उपयोग से जुड़े विषय भी एजेंडे में महत्वपूर्ण रहेंगे।

भारत-चीन संबंधों पर भी नजर

सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भागीदारी को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच शीर्ष स्तर की संभावित बातचीत पर भी नजर रहेगी।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि हो चुकी है। ऐसे में भारत-रूस व्यापार और आर्थिक सहयोग से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की संभावना है।

भारत के सामने बड़ी कूटनीतिक चुनौती

भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच मौजूद भू-राजनीतिक मतभेदों के बावजूद आर्थिक सहयोग को मजबूत करना होगी। संगठन के विस्तार से इसका आर्थिक प्रभाव बढ़ा है, लेकिन सदस्य देशों के हित और वैश्विक दृष्टिकोण कई मुद्दों पर अलग-अलग हैं।

भारत की कोशिश होगी कि सम्मेलन को किसी एक देश या शक्ति के खिलाफ मंच के रूप में पेश करने के बजाय व्यापार, विकास, वित्त और तकनीकी सहयोग पर केंद्रित रखा जाए।

20 साल बाद ब्रिक्स की नई दिशा

ब्रिक्स की स्थापना के 20 वर्ष पूरे होने के साथ संगठन एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। भारत के लिए यह सम्मेलन अपनी कूटनीतिक भूमिका मजबूत करने और विस्तारित समूह के भीतर आर्थिक सहयोग का व्यावहारिक ढांचा तैयार करने का अवसर भी है।

अब नजर इस बात पर होगी कि 12-13 सितंबर की बैठक से कौन से ठोस फैसले सामने आते हैं और 11 देशों का विस्तारित ब्रिक्स वैश्विक व्यापार व वित्तीय व्यवस्था में अपनी सामूहिक भूमिका को कितना प्रभावी बना पाता है।



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