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JSSC-CGL रद्द होने के बाद नौकरी पा चुके अभ्यर्थियों का विरोध, प्रोजेक्ट भवन में धरना; बोले- हमारा क्या दोष?

by admin@bebak24.com on | 2026-08-18 11:54:24

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JSSC-CGL रद्द होने के बाद नौकरी पा चुके अभ्यर्थियों का विरोध, प्रोजेक्ट भवन में धरना; बोले- हमारा क्या दोष?

रांची | बेबाक24 न्यूज़

झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के बाद विवाद का नया मोड़ सामने आया है। परीक्षा पास कर नियुक्त हो चुके और फिलहाल अपने पदों पर काम कर रहे अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में नियुक्त अभ्यर्थी रांची के प्रोजेक्ट भवन पहुंचे और धरने पर बैठकर अपनी नियुक्ति को लेकर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन पूरी परीक्षा रद्द करने का असर उन उम्मीदवारों पर क्यों पड़े जिन्होंने चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद नियुक्ति हासिल की और अपने पद पर सेवा दे रहे हैं?

परीक्षा रद्द होते ही बढ़ी बेचैनी

झारखंड सरकार ने सोमवार को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (JSSC-CGL) को रद्द करने का फैसला लिया था। भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सरकार का यह निर्णय सामने आया।

एक ओर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने परीक्षा रद्द किए जाने को अपनी मांगों की दिशा में बड़ी सफलता माना, वहीं दूसरी ओर पहले से नियुक्त उम्मीदवारों के सामने अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता खड़ी हो गई।

इसी चिंता के चलते नियुक्त अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन में धरना शुरू किया।

‘निष्पक्ष तरीके से परीक्षा पास की, हमारा क्या दोष?’

धरने में शामिल एक नियुक्त अभ्यर्थी ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि उन्होंने निष्पक्ष प्रक्रिया के जरिए परीक्षा पास की और उसके बाद नियुक्ति मिली। उनका सवाल था कि अगर भर्ती प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी उन अभ्यर्थियों पर क्यों डाली जा रही है जिन्होंने मेहनत से परीक्षा पास की?

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि वे भी कथित अनियमितताओं की जांच के पक्ष में हैं, लेकिन जांच का परिणाम आने से पहले पूरी भर्ती को रद्द कर देना उनके लिए अन्यायपूर्ण है।

एक अन्य अभ्यर्थी ने कहा कि सरकार के फैसले के बाद उन्हें दोबारा संघर्ष के लिए सड़क पर उतरना पड़ा है। उन्होंने सरकार से फैसला वापस लेने और नियुक्त अभ्यर्थियों के हितों को सुरक्षित करने की अपील की।

सरकार ने 2014 से TDPL के जरिए हुई परीक्षाओं पर भी लिया फैसला

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार शाम JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की घोषणा की थी। सरकार ने इसके साथ ही 2014 से आउटसोर्स एजेंसी TDPL (TSR Data Processing Pvt Ltd) के माध्यम से आयोजित कराई गई सभी नौकरी परीक्षाओं को भी रद्द करने का निर्णय लिया है।

सरकार का यह फैसला भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच आया है।

आंदोलन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगों में भर्ती परीक्षाओं की कथित गड़बड़ियों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच और JSSC-CGL परीक्षा रद्द करना शामिल था।

एक फैसले से दो अलग-अलग पक्ष आमने-सामने

JSSC-CGL विवाद में अब अभ्यर्थियों के दो अलग-अलग पक्ष सामने आ गए हैं।

एक तरफ वे छात्र हैं जो कथित अनियमितताओं की जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे। दूसरी तरफ वे अभ्यर्थी हैं जिन्होंने इसी परीक्षा के जरिए नियुक्ति पाई और अब परीक्षा रद्द होने के बाद अपनी नौकरी को लेकर चिंतित हैं।

नियुक्त अभ्यर्थियों का तर्क है कि यदि जांच में अनियमितता साबित होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों, एजेंसी या अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। लेकिन जिन उम्मीदवारों की नियुक्ति किसी व्यक्तिगत गलती या अनियमितता के कारण नहीं हुई, उन्हें भी उसी फैसले का नुकसान उठाना पड़े तो उनके सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

अब नियुक्त अभ्यर्थियों की नजर सरकार के अगले कदम पर

परीक्षा रद्द होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि पहले से नियुक्त उम्मीदवारों की स्थिति क्या होगी। क्या उनकी नियुक्तियां जारी रहेंगी, क्या उन्हें दोबारा परीक्षा देनी होगी या सरकार इस पूरे मामले में कोई वैकल्पिक व्यवस्था करेगी—इस पर अभ्यर्थी स्पष्ट जवाब चाहते हैं।

फिलहाल नियुक्त अभ्यर्थियों का धरना इसी मांग को लेकर जारी है कि सरकार उनके भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति सामने रखे और उनके पक्ष को भी सुने।

बेबाक24 का नजरिया

JSSC-CGL विवाद में सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की मांगों का समाधान जरूरी है, वहीं दूसरी ओर उन उम्मीदवारों के अधिकारों और भविष्य की रक्षा भी महत्वपूर्ण है जिन्होंने चयन प्रक्रिया पूरी करके नियुक्ति हासिल की है।

बेबाक24 का मानना है कि भर्ती में गड़बड़ी का दोषी कौन है, यह जांच से तय होना चाहिए। लेकिन किसी भी व्यवस्था में ईमानदारी से चयनित अभ्यर्थियों को बिना स्पष्ट प्रक्रिया और वैकल्पिक व्यवस्था के अनिश्चितता में छोड़ना भी उचित नहीं होगा। सरकार को जांच के साथ-साथ नियुक्त अभ्यर्थियों के भविष्य पर तत्काल स्पष्ट फैसला देना चाहिए।



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