by admin@bebak24.com on | 2026-08-15 13:09:48
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नई दिल्ली: हल्दी को भारतीय रसोई के सबसे पुराने और लोकप्रिय मसालों में गिना जाता है। इसका इस्तेमाल भोजन के स्वाद और रंग के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा में भी लंबे समय से होता आया है। लेकिन हल्दी और उसमें पाए जाने वाले करक्यूमिन को हर बीमारी का इलाज या स्वास्थ्यवर्धक सप्लीमेंट मानना वैज्ञानिक रूप से कितना सही है? विशेषज्ञों का कहना है कि इस बारे में किए गए शोधों से अब तक इतने मजबूत प्रमाण नहीं मिले हैं कि करक्यूमिन को किसी बीमारी का प्रमाणित इलाज माना जा सके।
हल्दी के सामान्य खाद्य इस्तेमाल को लेकर विशेषज्ञों को बड़ी आपत्ति नहीं है, लेकिन महंगे करक्यूमिन सप्लीमेंट खरीदने से पहले उनके प्रभाव और सुरक्षा को लेकर उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों को समझना जरूरी है।
हल्दी का इस्तेमाल एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई व्यंजनों में होता है। दक्षिण एशिया में इसे हजारों वर्षों से भोजन और पारंपरिक उपचार का हिस्सा माना जाता रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में पश्चिमी देशों में भी हल्दी और करक्यूमिन आधारित उत्पादों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। बाजार में ऐसे सप्लीमेंट उपलब्ध हैं, जिन्हें जोड़ों की सेहत, सूजन कम करने और प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत करने जैसे कई दावों के साथ बेचा जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर लोगों के व्यक्तिगत अनुभवों ने भी इन उत्पादों की लोकप्रियता बढ़ाने में भूमिका निभाई है।
करक्यूमिन हल्दी में पाया जाने वाला प्रमुख यौगिक है और अक्सर इसके कथित स्वास्थ्य लाभों का श्रेय इसी को दिया जाता है।
हालांकि, अमेरिका की रसायन विशेषज्ञ डॉ. कैथरीन नेल्सन के अनुसार, करक्यूमिन पर हुए 100 से अधिक शोधपत्रों की समीक्षा में यह सामने आया कि इसके बारे में किए जाने वाले दावे वैज्ञानिक प्रमाणों की तुलना में कहीं अधिक बड़े हैं।
उनके मुताबिक, करक्यूमिन की रासायनिक प्रकृति के कारण इसके प्रभावों का अध्ययन करना भी जटिल हो सकता है। प्रयोगशाला में यह कई प्रक्रियाओं के साथ प्रतिक्रिया कर सकता है, जिससे कभी-कभी ऐसा प्रतीत हो सकता है कि इसका प्रभाव है, जबकि वास्तविक स्थिति अलग हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मुंह के जरिए लेने पर करक्यूमिन की बहुत कम मात्रा रक्त में पहुंचती है। इसे कम जैव-उपलब्धता कहा जाता है।
इसी वजह से कई करक्यूमिन उत्पादों में अवशोषण बढ़ाने के लिए अलग-अलग तकनीकों या सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। हल्दी को काली मिर्च के साथ लेने की लोकप्रिय धारणा भी इसी बेहतर अवशोषण से जुड़ी है।
लेकिन किसी पदार्थ का शरीर में अधिक अवशोषित होना और उसका बीमारी में प्रभावी इलाज साबित होना, दोनों अलग बातें हैं।
कनाडा के लंदन हेल्थ साइंसेज सेंटर के प्रोफेसर अमित गर्ग और उनके सहयोगियों ने करक्यूमिन से जुड़े बड़े चिकित्सीय परीक्षण किए।
एक अध्ययन में करीब 600 मरीजों पर यह जांच की गई कि क्या करक्यूमिन बड़े रक्त वाहिका संबंधी उपचार के बाद गुर्दे को होने वाली चोट और सूजन से बचा सकता है। अध्ययन में अपेक्षित लाभ नहीं मिला।
इसके बाद गुर्दे की बीमारी वाले लोगों पर करक्यूमिन के एक विशेष सूक्ष्म-कण रूप का परीक्षण किया गया। इस अध्ययन में भी ऐसा पर्याप्त प्रमाण नहीं मिला कि करक्यूमिन गुर्दे की सेहत बेहतर करता है या बीमारी की प्रगति रोकता है।
प्रोफेसर गर्ग के मुताबिक, इन परिणामों से यह सवाल जरूर उठता है कि लंबे समय से पारंपरिक रूप से इस्तेमाल की जा रही हल्दी और उसके किसी एक यौगिक को अलग करके दवा के रूप में इस्तेमाल करने के बीच कितना अंतर है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भोजन में मसाले के रूप में इस्तेमाल होने वाली हल्दी और अधिक मात्रा वाले करक्यूमिन सप्लीमेंट को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए।
किसी पारंपरिक खाद्य पदार्थ का लंबे समय से इस्तेमाल होना यह साबित नहीं करता कि उसके एक विशेष रासायनिक तत्व से बनी उच्च मात्रा वाली गोली या कैप्सूल किसी बीमारी का इलाज भी करेगी।
यही वजह है कि विशेषज्ञ हल्दी वाले सामान्य भोजन और करक्यूमिन सप्लीमेंट के स्वास्थ्य दावों के बीच अंतर करने की सलाह देते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा जरूरी नहीं है। यदि किसी व्यक्ति को हल्दी वाला खाना पसंद है तो वह सामान्य मात्रा में इसका सेवन जारी रख सकता है।
समस्या मुख्य रूप से तब होती है जब करक्यूमिन सप्लीमेंट को किसी बीमारी की दवा समझकर इस्तेमाल किया जाने लगे या उसके बड़े-बड़े स्वास्थ्य दावों को बिना पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण के सच मान लिया जाए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी सप्लीमेंट के प्रभाव का दावा मजबूत और उच्च गुणवत्ता वाले मानव परीक्षणों से समर्थित होना चाहिए। केवल प्रयोगशाला परीक्षण, छोटे अध्ययन या व्यक्तिगत अनुभव किसी उत्पाद को प्रभावी इलाज साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
इसलिए बीमारी के इलाज के लिए करक्यूमिन या किसी अन्य सप्लीमेंट पर निर्भर होने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित है।
बेबाक24 टेक : हल्दी भारतीय भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे मसाले के रूप में इस्तेमाल करने में विशेषज्ञों को सामान्य तौर पर आपत्ति नहीं है। लेकिन करक्यूमिन सप्लीमेंट को हर बीमारी का इलाज मानने से पहले सावधानी जरूरी है, क्योंकि उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक प्रमाण इसके व्यापक स्वास्थ्य दावों की पुष्टि नहीं करते।
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