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फेफना में गर्माई सियासत: स्व. विनोद राय को न्याय दिलाने मैदान में उतरे पूर्व मंत्री नारद राय, फेफना की जंग हुई दिलचस्प

by on | 2026-08-11 23:24:15

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फेफना में गर्माई सियासत: स्व. विनोद राय को न्याय दिलाने मैदान में उतरे पूर्व मंत्री नारद राय, फेफना की जंग हुई दिलचस्प

​बलिया (फेफना)। 12-13 अगस्त 2016 को हुए चर्चित नरही कांड में जान गंवाने वाले भाजपा कार्यकर्ता विनोद राय की शहादत पर एक बार फिर फेफना विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए क्षेत्र में सियासी बढ़त बनाने की होड़ शुरू हो चुकी है। एक तरफ जहां पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी लगातार जमीनी पैठ बनाने में जुटे हैं, वहीं समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए पूर्व मंत्री नारद राय ने शहादत के मुद्दे पर बड़ा दांव खेल दिया है।

​शहादत दिवस की पूर्व संध्या पर नरही, नारायणपुर, लक्ष्मणपुर और सुहांव क्षेत्र से सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और समर्थक नारद राय के आवास पर एकत्रित हुए। इस दौरान विनोद राय को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी गई।

​'10 साल बाद भी पीड़ित परिवार को नहीं मिला इंसाफ'

​नारद राय ने मीडिया से बातचीत में कहा कि 2016 में जब यह दर्दनाक हादसा हुआ था, तब वह प्रदेश सरकार में मंत्री थे। उस दौरान उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए विनोद राय की पत्नी को सरकारी नौकरी दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी और दोषियों को सजा दिलाने का प्रण लिया था।

​उन्होंने कहा कि बेहद दुख की बात है कि 10 साल का लंबा वक्त बीत जाने और कई सरकारें बदलने के बावजूद पीड़ित परिवार आज भी न्याय का इंतजार कर रहा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में सोशल मीडिया पर आई बातों, क्षेत्रवासियों की मांग और मामले के वादी (विनोद राय के भतीजे) गोपाल राय के बयानों ने उन्हें इस लड़ाई को दोबारा शुरू करने के लिए प्रेरित किया है।

​मुख्यमंत्री से मुलाकात की तैयारी, लेकिन परिवार की सहमति जरूरी

​नारद राय ने ऐलान किया कि वह इस मामले को लेकर जल्द ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे। इस दौरान उनके साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रदेश सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह, सांसद नीरज शेखर, पूर्व सांसद और भाजपा संगठन के वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे।

​जब उनसे सवाल पूछा गया कि 10 साल बाद यह मुद्दा क्यों उठाया जा रहा है, तो उन्होंने साफ कहा कि न्याय की यह लड़ाई बिना पीड़ित परिवार के सहयोग के नहीं जीती जा सकती। वह जल्द ही विनोद राय के परिजनों से मिलेंगे और यदि परिवार अपनी रजामंदी देता है, तो इस मामले को शासन के सबसे बड़े मंच तक मजबूती से ले जाया जाएगा।

​क्या था नरही कांड?

​12-13 अगस्त 2016 की रात नरही थाना परिसर के सामने स्थानीय मुद्दों को लेकर उग्र विरोध-प्रदर्शन चल रहा था। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई और गोलीबारी की घटना घटी। इसी गोलीबारी में भाजपा कार्यकर्ता विनोद राय को गोली लग गई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। तब से हर साल 12-13 अगस्त को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाती है।

​बेबाक विश्लेषण

​विनोद राय की शहादत का मुद्दा फेफना के राजनीतिक पटल पर हमेशा से असरदार रहा है। लेकिन इस बार शहादत दिवस से ठीक पहले नारद राय की इस आक्रामक सक्रियता ने भाजपा के भीतर और बाहर—दोनों जगह हलचल तेज कर दी है। क्या यह पहल विनोद राय के परिवार को उनका हक दिला पाएगी या फेफना की विधानसभा सीट पर अपनी पकड़ मजबूत करने का जरिया बनकर रह जाएगी, यह आने वाला वक्त तय करेगा।



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