ब्रेकिंग न्यूज़
यूपी को पहली शयनयान वंदे भारत की सौगात, बनारस से दिल्ली का सफर होगा आसान
अंतरराष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय

इसराइल में सत्ता की नई जंग: आइज़नकोट को सरकार बनाने का न्योता

by on | 2026-11-08 14:19:52

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3001


इसराइल में सत्ता की नई जंग: आइज़नकोट को सरकार बनाने का न्योता

इसराइल | बेबाक24 न्यूज़

इसराइल में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने विपक्षी नेता गादी आइज़नकोट को गठबंधन सरकार बनाने का अवसर देने का फैसला किया है। पिछले सप्ताह हुए चुनाव में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। ऐसे में राष्ट्रपति ने विभिन्न राजनीतिक दलों से चर्चा के बाद आइज़नकोट के पक्ष में निर्णय लिया।

आइज़नकोट को सरकार बनाने के लिए 28 दिन का समय मिलेगा। जरूरत पड़ने पर उन्हें 14 दिन की अतिरिक्त मोहलत भी दी जा सकती है। उन्होंने सामाजिक माध्यम एक्स पर कहा कि अब राष्ट्रीय आपातकालीन सरकार बनाने का समय है और वह इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।

चुनाव में किसी गठबंधन को नहीं मिला बहुमत

इसराइल की 120 सदस्यीय संसद में प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी और उसके अति-दक्षिणपंथी तथा अति-रूढ़िवादी यहूदी सहयोगियों को कुल 53 सीटें मिलीं।

वहीं, आइज़नकोट की मध्यमार्गी याशर पार्टी और उनके साथ गठबंधन में शामिल तीन अन्य यहूदी विपक्षी दलों ने 48 सीटें हासिल कीं। दोनों ही पक्ष सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से दूर रह गए।

राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, नवनिर्वाचित सांसदों के प्रतिनिधिमंडलों से बातचीत के दौरान आइज़नकोट को प्रधानमंत्री पद के लिए 67 और नेतन्याहू को 46 समर्थन की सिफारिशें मिलीं। इसके बाद हर्ज़ोग ने आइज़नकोट को सरकार गठन का मौका देने का निर्णय लिया।

इसराइल में राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वह उस नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करें, जिसके पास गठबंधन तैयार करने की सबसे बेहतर संभावना हो। इसके लिए सबसे अधिक सीटें जीतने वाली पार्टी का नेता होना अनिवार्य नहीं है।

अरब दलों की भूमिका पर टिकी निगाहें

चुनाव में अरब मतदाताओं की बड़ी भागीदारी के बाद अरब नेतृत्व वाले दो गठबंधनों- यूनाइटेड अरब लिस्ट और जॉइंट लिस्ट ने मिलकर 19 सीटें जीतीं। इस नतीजे ने उन्हें सरकार गठन की प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका में ला दिया है।

हालांकि, यहूदी राजनीतिक दलों में से एक को छोड़कर बाकी सभी ने चुनाव से पहले अरब दलों के साथ मिलकर सरकार बनाने का विरोध किया था। आइज़नकोट के गठबंधन के अधिकांश सदस्य भी पहले अरब पार्टियों के साथ सरकार में शामिल होने से इनकार कर चुके हैं। इसके बावजूद राजनीतिक हलकों में किसी संभावित समझौते की चर्चा है।

नेतन्याहू ने बताया देश के लिए खतरा

राष्ट्रपति के फैसले की घोषणा से करीब एक घंटे पहले कार्यवाहक प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने विपक्षी दलों और अरब पार्टियों के संभावित गठबंधन को लेकर चेतावनी दी थी।

उन्होंने कहा कि ऐसा गठबंधन इसराइल के पतन का कारण बन सकता है। एक वीडियो संदेश में नेतन्याहू ने दावा किया कि इस्लामवादी विचारधारा से जुड़े दलों के समर्थन वाली सरकार देश को भीतर से कमजोर कर देगी और स्थिति यूरोपीय देशों से भी अधिक खराब हो सकती है।

नेतन्याहू ने आइज़नकोट के नेतृत्व में बनने वाली संभावित सरकार का विरोध किया है।

सरकार गठन के सामने कई चुनौतियां

चुनाव परिणामों के बाद सरकार बनाने के तीन प्रमुख रास्ते सामने आए थे। पहला, नेतन्याहू और आइज़नकोट के बीच सत्ता-साझेदारी वाली राष्ट्रीय एकता सरकार। दूसरा, नेतन्याहू और आइज़नकोट के गुटों से अलग हुए सदस्यों के साथ दक्षिणपंथी गठबंधन। तीसरा, अरब पार्टियों के समर्थन से आइज़नकोट के नेतृत्व में सरकार का गठन।

आइज़नकोट अति-रूढ़िवादी दलों के साथ समझौते की कोशिश भी कर सकते हैं, लेकिन इस विकल्प में भी कई राजनीतिक अड़चनें हैं।

इससे पहले 2020 में भी इसराइल में राष्ट्रीय एकता सरकार का प्रयोग हो चुका है। लगातार तीन चुनावों के बाद बहुमत नहीं मिलने पर नेतन्याहू और उनके मध्यमार्गी प्रतिद्वंद्वी बेनी गैंट्ज़ ने सत्ता साझा करने का समझौता किया था। इसके तहत दोनों नेताओं ने बारी-बारी से सरकार का नेतृत्व किया था।

बार-बार चुनाव से बचने की चुनौती

इसराइल में 2019 से 2022 के बीच राजनीतिक अस्थिरता का दौर रहा था। इस अवधि में पांच बार आम चुनाव कराने पड़े, क्योंकि नेतन्याहू और उनके विरोधी दल सरकार गठन के लिए जरूरी सहमति नहीं बना सके थे।

राष्ट्रपति हर्ज़ोग ने राजनीतिक दलों से बातचीत के दौरान कहा था कि यदि एक और चुनाव से बचना है और स्थिर सरकार बनानी है, तो सभी दलों को अपनी कुछ मांगों और वादों में लचीलापन दिखाना होगा।

बेबाक24 टेक

आइज़नकोट को सरकार बनाने का न्योता मिलना नेतन्याहू के लिए बड़ा राजनीतिक झटका है, लेकिन इससे सत्ता परिवर्तन अभी तय नहीं हुआ है। 67 सांसदों की सिफारिशें उनके पक्ष में जरूर हैं, मगर असली चुनौती अलग-अलग विचारधारा वाले दलों को एक साथ लाकर बहुमत साबित करने की होगी। अरब दलों की 19 सीटें इस पूरी प्रक्रिया में निर्णायक साबित हो सकती हैं।



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment