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मोदी का दावा: नक्सलवाद से मुक्त हुआ हर जिला, अब ‘दिमागी नक्सलियों’ से सतर्क रहने की जरूरत

by on | 2026-11-08 14:21:55

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मोदी का दावा: नक्सलवाद से मुक्त हुआ हर जिला, अब ‘दिमागी नक्सलियों’ से सतर्क रहने की जरूरत

बस्तर, छत्तीसगढ़ | बेबाक24 न्यूज़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीपावली के अवसर पर छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ त्योहार मनाया। करनपुर स्थित कोबरा अभियान केंद्र में जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ दशकों से जारी लड़ाई में देश ने बड़ी सफलता हासिल की है। मोदी के मुताबिक, यह पहली दीपावली है जब देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त है। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि हथियारबंद नक्सलियों के कमजोर पड़ने के बाद भी वैचारिक स्तर पर खतरा बना हुआ है।

प्रधानमंत्री ने जवानों के त्याग और बलिदान की सराहना करते हुए कहा कि देश का हर सुरक्षाकर्मी उनके परिवार का हिस्सा है। उन्होंने 140 करोड़ देशवासियों की ओर से सुरक्षा बलों के प्रति आभार भी जताया।

‘हथियारबंद नक्सली खत्म, अब दिमागी नक्सलियों का खतरा’

प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जंगलों में सक्रिय हथियारबंद माओवादी नक्सलियों का सफाया हो चुका है, लेकिन अब वैचारिक स्तर पर नक्सलवाद एक चुनौती बना हुआ है।

उन्होंने दावा किया कि ऐसे तत्वों ने कई राजनीतिक दलों और संगठनों में घुसपैठ कर ली है। उनके अनुसार, ये लोग संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ लोगों को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे तत्वों की पहचान कर उन्हें परास्त करना जरूरी है।

कोबरा अभियान केंद्र पहुंचे प्रधानमंत्री

मोदी ने करनपुर स्थित कोबरा (CoBRA) अभियान केंद्र का दौरा किया। यह केंद्र बस्तर और अबूझमाड़ क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियानों के लिए प्रशिक्षण और अभियान संचालन के प्रमुख ठिकानों में शामिल रहा है।

जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दीपावली परिवारों के साथ खुशियां बांटने का त्योहार है। देश और दुनिया में करोड़ों लोग इस पर्व को मना रहे हैं, लेकिन सीमाओं और देश के भीतर सुरक्षा में तैनात जवान अपने परिवारों से दूर रहकर राष्ट्र की रक्षा करते हैं। इसी भावना के साथ वह इस बार बस्तर के जंगलों में दीपावली मनाने पहुंचे हैं।

मोदी ने कहा कि देश की रक्षा में लगे जवान उनके परिवार के सदस्य हैं और उनके त्याग के लिए पूरा देश उनका ऋणी है।

आंतरिक सुरक्षा को बताया राष्ट्रीय सुरक्षा की बुनियाद

प्रधानमंत्री ने संस्कृत की एक सूक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होने पर बाहरी दुश्मन भी प्रभावी चुनौती नहीं दे पाते। उन्होंने कहा कि सीमाओं पर सेना जिस तरह देश की रक्षा करती है, उसी तरह देश के भीतर सुरक्षा बल राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने सीआरपीएफ, कोबरा, सीमा सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, सशस्त्र सीमा बल, राज्य पुलिस और बस्तर फाइटर्स के जवानों के योगदान की सराहना की। महिला सुरक्षा कर्मियों की भूमिका का भी उल्लेख किया।

पिछली सरकारों पर नक्सलवाद को नजरअंदाज करने का आरोप

मोदी ने 2004 से 2013 के बीच के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि उस दौरान हर साल नक्सलियों के हाथों मारे जाने वाले जवानों की संख्या, नक्सलियों के मारे जाने की संख्या से अधिक थी। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकारों ने नक्सलवाद को ऐसी समस्या मान लिया था जिसका समाधान संभव नहीं है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सली हमलों के कारण लोगों का मतदान का अधिकार भी प्रभावित होता था और एक वर्ष में हमलों की संख्या 2,000 तक पहुंच गई थी।

उन्होंने वर्ष 2010 की दंतेवाड़ा की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि एक मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 76 जवान बलिदान हुए थे, जबकि उसी वर्ष एक अन्य घटना में 44 नागरिकों की जान गई थी। मोदी ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा के दौरान 1,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी बलिदान हुए।

पिछले एक साल में सीआरपीएफ का कोई जवान बलिदान नहीं हुआ: मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में रणनीति और राजनीतिक इच्छाशक्ति के स्तर पर बदलाव आया। उन्होंने दावा किया कि 47 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि पिछले एक साल के दौरान ड्यूटी पर सीआरपीएफ का एक भी जवान बलिदान नहीं हुआ।

मोदी ने इसे सरकार की नीतियों और सुरक्षा बलों के साहस, धैर्य तथा समर्पण की उपलब्धि बताया।

नक्सलियों के आर्थिक नेटवर्क पर कार्रवाई का दावा

प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा बलों को आवश्यक फैसले लेने की स्वतंत्रता दी गई। उन्होंने दावा किया कि नकली नोटों के नेटवर्क पर कार्रवाई और नक्सलियों को मिलने वाली आर्थिक मदद रोकने के प्रयासों से उनकी ताकत कमजोर हुई।

उनके मुताबिक, इन कदमों से नक्सलियों तक हथियार और जरूरी सामान पहुंचाने, उनकी आवाजाही तथा नए लोगों की भर्ती करने की क्षमता पर असर पड़ा।

मोदी ने यह भी कहा कि सरकार ने व्यवस्था के भीतर से वामपंथी उग्रवाद को मिलने वाले समर्थन को रोकने के लिए कदम उठाए और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के जीवन में बदलाव लाने पर काम किया।

12 वर्षों में 50 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर आने का दावा

प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के साथ गरीबी उन्मूलन को भी सरकार की उपलब्धि बताया। उन्होंने विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में भारत के 50 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आए हैं।

मोदी ने कहा कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं ने गरीबों को सशक्त बनाने में भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोग अब सरकार और सुरक्षा बलों के साथ खड़े हैं।

बस्तर में विकास की नई राह का संदेश

प्रधानमंत्री ने कहा कि कभी नक्सलवाद के डर से प्रभावित रहे बस्तर में अब विकास की नई लहर शुरू हो रही है। उन्होंने इस बदलाव में स्थानीय नागरिकों के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया और नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग देने वाले लोगों के प्रति आभार जताया।

बेबाक24 टेक

बस्तर में जवानों के साथ दीपावली मनाकर प्रधानमंत्री मोदी ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को सरकार की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया। हालांकि, नक्सलवाद से मुक्ति और सुरक्षा की स्थिति को लेकर उनके सभी आंकड़े और दावे प्रधानमंत्री के संबोधन पर आधारित हैं। उनका ‘दिमागी नक्सली’ वाला बयान राजनीतिक बहस को भी नया मुद्दा दे सकता है। अब चुनौती नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ विकास, नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत बनाए रखने की है।



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