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झारखंड में छात्र आंदोलन 16वें दिन भी जारी, सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच फिर बातचीत; मांगों पर अब भी नहीं बनी सहमति

by admin@bebak24.com on | 2026-08-09 15:10:33

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झारखंड में छात्र आंदोलन 16वें दिन भी जारी, सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच फिर बातचीत; मांगों पर अब भी नहीं बनी सहमति

रांची | बेबाक24 न्यूज़

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन रविवार को 16वें दिन भी जारी है। आंदोलनकारी अभ्यर्थी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जबकि राज्य सरकार प्रदर्शनकारी छात्र संगठनों के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है।

रविवार को रांची स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच एक बार फिर बातचीत चल रही है। इससे पहले शनिवार को भी दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बैठक हुई, लेकिन किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन सकी।

प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी सभी प्रमुख मांगों पर निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

शनिवार को कई छात्र संगठनों से हुई बातचीत

राज्य सरकार ने शनिवार को आंदोलन से जुड़े अलग-अलग छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं।

सरकार की 5 सदस्यीय समिति ने सबसे पहले झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की।

महतो पिछले 8 दिनों से आमरण अनशन पर हैं। वह भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।

इसके बाद सरकार ने कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई, एसीएस और जेसीएम समेत अन्य छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की।

बैठक के बाद राज्य मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मांगों और चिंताओं को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने रखा जाएगा।

सरकार ने सुझाव के लिए जारी किया ई-मेल

छात्र संगठनों के साथ बातचीत के बाद राज्य सरकार ने आंदोलन को लेकर आम सुझाव लेने की पहल भी की है।

राज्य सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने बताया कि सरकार ने छात्र-छात्राओं और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव लेने के लिए एक ई-मेल जारी किया है।

सरकार के मुताबिक, कोई भी छात्र, व्यक्ति या संबंधित पक्ष अपनी बात इस माध्यम से सरकार तक पहुंचा सकता है।

सरकार का कहना है कि इन सुझावों के आधार पर सुधार की नीति तैयार करने और सभी पक्षों की राय को ध्यान में रखते हुए सामूहिक निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा।

3 अलग-अलग मंचों से चल रहा प्रदर्शन

आंदोलन के बीच अब रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठनों के अलग-अलग मंचों की संख्या बढ़कर 3 हो गई है।

शनिवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी आइसा ने भी यहां अलग मंच बनाकर आंदोलन को तेज करने का ऐलान किया।

आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी प्रदर्शन में शामिल हुईं। संगठन ने 14वीं जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द करने समेत अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।

इससे पहले जेएसएससी सुधार मंच और जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी मंच के बैनर तले छात्र 25 जुलाई से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे हैं।

अभिनेता पीयूष मिश्रा भी पहुंचे आंदोलन स्थल

छात्र आंदोलन को कुछ सार्वजनिक हस्तियों का समर्थन भी मिल रहा है।

शनिवार को अभिनेता और गायक पीयूष मिश्रा रांची के प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और आंदोलन कर रहे छात्र-छात्राओं से मुलाकात की।

उन्होंने प्रदर्शनकारी युवाओं के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि उन्होंने कुछ छात्रों के साक्षात्कार देखे थे और उनकी परेशानियों तथा भावनात्मक स्थिति ने उन्हें आंदोलन स्थल तक आने के लिए प्रेरित किया।

पीयूष मिश्रा के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से वह अपनी क्षमता के अनुसार आंदोलनकारियों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने छात्रों के लिए आर्थिक सहायता के साथ भोजन, चटाई और तिरपाल जैसी जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने की बात भी कही।

एबीवीपी के मार्च के दौरान पुलिस से झड़प

इस आंदोलन को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों की सक्रियता भी बढ़ गई है।

शुक्रवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास की ओर मार्च निकाला।

मार्च डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से शुरू हुआ था। मुख्यमंत्री आवास के पास पुलिस बैरिकेड पार करने की कोशिश के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई।

पुलिस ने करीब 8 से 10 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।

एबीवीपी का कहना है कि उसका मार्च भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के समर्थन में था।

नेहा बोरा पर स्याही फेंकने का आरोप

शुक्रवार को ही विधानसभा की ओर निकाले गए मार्च के दौरान आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंके जाने की घटना सामने आई।

नेहा बोरा ने इस घटना के लिए भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोगों पर आरोप लगाए। हालांकि, यह उनके द्वारा लगाया गया आरोप है और संबंधित पक्षों का जवाब इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं से छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और आंदोलन जारी रहेगा।

आइसा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक संगठन छात्र मुद्दों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों के लिए कर रहे हैं।

सरकार के सामने बड़ी चुनौती

झारखंड में चल रहा यह आंदोलन अब केवल एक छात्र संगठन तक सीमित नहीं रहा है। अलग-अलग छात्र संगठन अपने-अपने मंचों के जरिए आंदोलन में शामिल हैं और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं।

दूसरी ओर, सरकार बातचीत और सुझावों के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश कर रही है।

लेकिन अभी सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच किसी साझा समाधान पर सहमति बन पाएगी।

अब आगे क्या?

रविवार को सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत जारी है। सरकार की ओर से छात्र संगठनों की मांगों और सुझावों पर विचार करने का भरोसा दिया गया है।

वहीं प्रदर्शनकारी संगठनों ने साफ कर दिया है कि केवल बातचीत से आंदोलन खत्म नहीं होगा। उनका कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।

फिलहाल झारखंड में छात्र आंदोलन का अगला रुख सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच होने वाली बातचीत के नतीजे पर निर्भर करेगा।



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