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दालमंडी चौड़ीकरण: सियासी बयानबाज़ी से गर्माया माहौल, योगी सरकार ‘विकास’ के एजेंडे पर अडिग

by admin@bebak24.com on | 2025-11-21 23:04:31

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दालमंडी चौड़ीकरण: सियासी बयानबाज़ी से गर्माया माहौल, योगी सरकार ‘विकास’ के एजेंडे पर अडिग

वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में दालमंडी चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अब राजनीतिक पिच पर आ गया है। इस विकास कार्य के विरोध और भवनों के ध्वस्तीकरण को लेकर पैदा हुए विवाद के बीच, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शुक्रवार को सरकार की विकास योजनाओं पर सवाल उठाकर माहौल को गर्मा दिया।

हालांकि, योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार इस परियोजना को वाराणसी के भविष्य, वैश्विक पर्यटन और स्थानीय व्यापार के दीर्घकालिक हित से जुड़ा एक अडिग विकास मिशन बता रही है, जो शहर की भीड़भाड़ को कम करने और विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के उद्देश्य से चल रहा है।

 व्यापारी पहुंचे अखिलेश के पास, छिड़ी सियासी बहस

दालमंडी क्षेत्र के कुछ व्यापारी अपनी विस्थापन और आजीविका पर पड़ने वाले संभावित असर की चिंताएं लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मिले। अखिलेश यादव ने इस मौके को राजनीतिक रूप से भुनाते हुए सीधे योगी सरकार पर निशाना साधा।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई महज 'राजनीतिक साजिश' है और भाजपा दालमंडी को निशाना बना रही है क्योंकि यह क्षेत्र पार्टी को कम समर्थन देता है। उन्होंने व्यापारियों के लिए पर्याप्त मुआवजे, वैकल्पिक दुकानों की व्यवस्था और विकास के मास्टर प्लान की पारदर्शिता पर सरकार की नीयत पर सवाल उठाए।

योगी सरकार का स्पष्ट पक्ष:

 'विकास सबका, विरोध कुछ का'

सियासी आरोपों के बीच, सरकारी पक्ष ने जोरदार पलटवार किया है। सरकार का कहना है कि दालमंडी का पुनर्विकास न तो राजनीति है, न साजिश, बल्कि यह काशी के वैश्विक पर्यटन सुधार का एक महत्वपूर्ण कदम है।

सरकार के विकास एजेंडे के मुख्य बिंदु:

- मॉडल स्ट्रीट का लक्ष्य: दालमंडी जैसे ऐतिहासिक स्थान को 'मॉडल स्ट्रीट' के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें 3.2 मीटर चौड़ा हरित फुटपाथ, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और आधुनिक पर्यटक सुविधाएं शामिल होंगी।

- सुविधा और सुरक्षा: चौड़ीकरण के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर जाने वाला यह मार्ग श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए सुगम और सुरक्षित बन जाएगा।

- मुआवजा और सहमति: यह स्पष्ट किया गया है कि 187 चिह्नित भवनों का मुआवजा नियमानुसार दिया जा रहा है, और कई दुकान मालिकों ने स्वेच्छा से मुआवजा स्वीकार कर ध्वस्तीकरण को मंजूरी दी है।

- काशी कॉरिडोर की तर्ज पर विकास: सरकार का मानना है कि यह परियोजना काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर काशी के ऐतिहासिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखते हुए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करेगी।

"विकास के लिए परिवर्तन आवश्यक है। दालमंडी के व्यापारियों को व्यवस्थित, सुरक्षित और आधुनिक ढांचा मिलेगा, जिससे भविष्य में व्यापार और बढ़ेगा।" — सरकारी प्रवक्ता 

 सियासी बयानबाज़ी बनाम विकास का एजेंडा

अखिलेश यादव ने अपनी बयानबाजी में योगी सरकार पर इंजीनियरिंग गुणवत्ता और विकास योजनाओं को लेकर तंज कसे हैं, लेकिन शहर के विशेषज्ञ और जनता का एक बड़ा वर्ग मानता है कि सरकार की परियोजनाएं काशी को विश्वस्तरीय पर्यटन शहर बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

सरकार का फोकस स्पष्ट है: आने वाले वर्षों में वाराणसी का ट्रैफिक कम हो, पर्यटन और व्यापार को बेहतर और आधुनिक सुविधाएं मिलें, और ऐतिहासिक क्षेत्रों का संरक्षण और आधुनिक विकास साथ-साथ हो।

निष्कर्ष:

दालमंडी का मुद्दा भले ही राजनीतिक खींचतान का केंद्र बन गया हो, लेकिन योगी सरकार अपनी "विकास के लिए परिवर्तन" की नीति पर अडिग है। यह परियोजना करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा और वाराणसी के दीर्घकालिक विकास मिशन के रूप में देखी जा रही है, जहां राजनीतिक विरोध को दरकिनार कर प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और निर्माण कार्य को प्राथमिकता दी है।



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