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जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक से मिले अरविंद केजरीवाल; धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर दिया बड़ा प्रस्ताव— 'वांगचुक को बनाया जाए देश का शिक्षा मंत्री'

by on | 2026-07-16 21:17:04

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जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक से मिले अरविंद केजरीवाल; धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर दिया बड़ा प्रस्ताव— 'वांगचुक को बनाया जाए देश का शिक्षा मंत्री'

नई दिल्ली (बेबाक24): नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) परीक्षा में कथित धांधली और देश में लगातार हो रहे पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे प्रख्यात शिक्षाविद सोनम वांगचुक का आंदोलन अब केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्ष के 'महा-मोर्चे' में तब्दील हो चुका है। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव के बाद, गुरुवार (16 जुलाई 2026) शाम दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी प्रदर्शनकारियों के बीच जंतर-मंतर पहुंचे।

सोनम वांगचुक के अनशन के 19वें दिन उनसे मुलाकात के बाद अरविंद केजरीवाल ने मंच से केंद्र सरकार पर सीधा और तीखा हमला बोला। उन्होंने न केवल वर्तमान शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की, बल्कि राजनीतिक गलियारों में हलचल मचाने वाला एक बड़ा प्रस्ताव भी रख दिया। 'बेबाक24' के दिल्ली ब्यूरो की यह विशेष ग्राउंड रिपोर्ट:

'धर्मेंद्र प्रधान हटें, सोनम वांगचुक बनें शिक्षा मंत्री' — केजरीवाल का बड़ा प्रस्ताव

जंतर-मंतर पर आंदोलनकारी छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने एक नया सियासी पासा फेंका:

  • शिक्षा मंत्री पर प्रस्ताव: केजरीवाल ने मीडिया और जनता के सामने कहा, "देश की शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए मैं आज यहां से एक बड़ा प्रस्ताव देना चाहता हूं और इस पर आप सभी की सहमति चाहूंगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और उनके स्थान पर सोनम वांगचुक जी को देश का नया शिक्षा मंत्री बनाया जाना चाहिए।"

  • बीजेपी को 2014 की याद दिलाई: सत्तापक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "युवाओं, सोनम वांगचुक और इस आंदोलन की बात सुन लो, नहीं तो तीन साल बाद (आगामी चुनावों में) आपका भी वही हश्र होगा जो 2014 में तत्कालीन सत्ताधारी दल का हुआ था।"

पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या पर उठाए गंभीर सवाल

केजरीवाल ने देश के परीक्षा सिस्टम की कमियों को उजागर करते हुए सरकार को 'अहंकारी' करार दिया:

  • 20 छात्रों की आत्महत्या का जिक्र: आप संयोजक ने भावुक होते हुए कहा, "देश में लगातार हर दिन परीक्षा के पेपर लीक हो रहे हैं। मूल्यांकन प्रक्रिया (Evaluation System) में गंभीर कमियां हैं। जब नीट का पेपर लीक हुआ, तो हताशा में आकर 20 मासूम छात्रों ने आत्महत्या कर ली। इसके बावजूद सरकार ने युवाओं को यह भरोसा दिलाने के लिए एक भी ठोस कदम नहीं उठाया कि भविष्य में पेपर लीक नहीं होंगे।"

  • कार्रवाई न होने पर उठाए सवाल: उन्होंने आगे आरोप लगाया कि नीट की घटना के बाद भी कई अन्य परीक्षाओं के पेपर लीक हुए और सीबीएसई की मूल्यांकन प्रणाली भी प्रभावित हुई, फिर भी परीक्षा आयोजित करने वाली जिम्मेदार संस्था या कंपनी के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई। ऐसा लगता है कि सरकार पूरी तरह अहंकार में डूबी हुई है।

2029 की दी बड़ी चेतावनी, 20 जुलाई के मार्च को समर्थन

संसद के मानसून सत्र (20 जुलाई 2026) से ठीक पहले केजरीवाल ने सरकार को सीधे तौर पर राजनीतिक चेतावनी दी:

  • सत्ता से बाहर करने की चेतावनी: केजरीवाल ने कड़े शब्दों में कहा, "मैं सरकार को आगाह करना चाहता हूं— या तो समय रहते इन युवाओं की जायज आवाज को सुनें, वरना यही आक्रोशित युवा साल 2029 के लोकसभा चुनावों में आपको पूरी तरह सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा देंगे।"

  • विपक्षी एकजुटता: केजरीवाल ने भी सोनम वांगचुक द्वारा 20 जुलाई को आयोजित किए जा रहे 'चलो संसद' मार्च को अपनी पार्टी की तरफ से पूरा नैतिक और जमीनी समर्थन देने का एलान किया है।

सोनम वांगचुक अनशन: जंतर-मंतर पर सियासी हलचल

राजनीतिक घटनाक्रममुख्य विवरण (16 जुलाई 2026 तक)
मुलाकात करने वाले शीर्ष नेताडिंपल यादव (सपा सांसद) और अरविंद केजरीवाल (AAP संयोजक)।
केजरीवाल का मुख्य एजेंडाशिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाने का प्रस्ताव।
उठाए गए मुख्य मुद्देNEET/सीबीएसई पेपर लीक, छात्रों की आत्महत्याएं और सरकार की संवेदनहीनता।
आगामी राजनीतिक मोर्चा20 जुलाई 2026 को संसद सत्र के पहले दिन 'चलो संसद' महा-मार्च की तैयारी।

बेबाक24 टेक

सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाने का अरविंद केजरीवाल का प्रस्ताव एक बेहद चतुर और प्रतीकात्मक (Symbolic) राजनीतिक कदम है। केजरीवाल अच्छी तरह जानते हैं कि तकनीकी रूप से ऐसा होना संभव नहीं है, लेकिन इस बयान के जरिए उन्होंने देश के युवाओं और छात्रों के बीच यह संदेश देने की कोशिश की है कि विपक्ष देश की शिक्षा व्यवस्था की कमान किसी राजनेता के बजाय एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद के हाथों में देखना चाहता है।

बेबाक24 का मानना है कि मानसून सत्र से ठीक चार दिन पहले जंतर-मंतर पर डिंपल यादव और अरविंद केजरीवाल की बैक-टू-बैक एंट्री ने इस छात्र आंदोलन को पूरी तरह से एक बड़े राष्ट्रीय राजनीतिक आंदोलन में तब्दील कर दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा वांगचुक की सेहत पर दैनिक चिकित्सा निगरानी के आदेश और अब विपक्षी दिग्गजों के इस चौतरफा घेराव के बाद, सरकार के लिए इस गतिरोध को नजरअंदाज करना अब संभव नहीं होगा। 20 जुलाई को संसद के भीतर और बाहर का नजारा बेहद टकरावपूर्ण होने की उम्मीद है।



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