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'अभी मेरा दिल ठीक चल रहा है, इतनी जल्दी नहीं मानूंगा हार'— अनशन के 19वें दिन सोनम वांगचुक का वीडियो संदेश

by admin@bebak24.com on | 2026-07-16 18:48:53

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'अभी मेरा दिल ठीक चल रहा है, इतनी जल्दी नहीं मानूंगा हार'— अनशन के 19वें दिन सोनम वांगचुक का वीडियो संदेश

नई दिल्ली/लेह (बेबाक24): लद्दाख को छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने और पर्यावरण संरक्षण की मांगों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर डटे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन का आज (16 जुलाई 2026) 19वां दिन है।

बुधवार देर रात सोशल मीडिया पर जारी एक बेहद भावुक लेकिन दृढ़ वीडियो संदेश में वांगचुक ने अपनी सेहत से जुड़ा बड़ा अपडेट दिया है। इसके साथ ही उन्होंने देश की जनता और राजनीतिक नेताओं से 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन एक बड़ा कदम उठाने की पुरजोर अपील की है।

'अनशन तोड़ने से सरकार की जवाबदेही खत्म हो जाएगी'

हजारों शुभचिंतकों, सामाजिक संगठनों, बड़े-बुजुर्गों और राजनीतिक नेताओं द्वारा लगातार अनशन तोड़ने की अपीलों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं:

  • जवाबदेही का सवाल: वांगचुक ने कहा, "हजारों लोगों के संदेश आए कि मैं अनशन तोड़ दूं। कुछ लोगों ने तो अदालत से भी गुहार लगाई है कि सरकार मुझे जबरदस्ती खाना खिलाए। लेकिन इसके दो पहलू हैं। पहला तो यह कि अगर मैं आज खाना खा लूं, तो इससे सरकार को क्या संदेश जाएगा? सरकार को यही संदेश जाएगा कि उन्हें जनता के प्रति जवाबदेह होने की जरूरत नहीं है; लोग बैठेंगे और खुद ही उठकर चले जाएंगे।"

मेडिकल रिपोर्ट्स पर बोले— 'अभी दो-चार दिन में मरने वाला नहीं हूं'

अपनी सेहत को लेकर उड़ रही अफवाहों और चिंताओं को खारिज करते हुए उन्होंने हंसते हुए कहा:

  • सामान्य पैरामीटर्स: "मेरी हालत अभी ऐसी नहीं है कि मैं दो-चार दिन में मर जाऊं। लगातार कई मेडिकल टेस्ट हो रहे हैं और 18-19 दिनों के कड़े अनशन के हिसाब से मेरे टेस्ट के नतीजे काफी सामान्य (Normal) आए हैं।"

  • दिल अभी मजबूत है: वांगचुक ने आगे कहा, "मैं अभी कई दिनों तक संघर्ष जारी रख सकता हूं। शरीर में कमजोरी जरूर है और मेरे मसल्स (मांसपेशियां) खत्म हो रहे हैं, लेकिन मेरा दिल अभी भी बिल्कुल ठीक चल रहा है। इसलिए मेरी फिक्र करने के बजाय संघर्ष में साथ दें।"

20 जुलाई के लिए देशवासियों और सांसदों से बड़ी अपील

सोनम वांगचुक ने जंतर-मंतर पर बैठे रहने के बजाय लोगों से एक ठोस कदम उठाने की मांग की है:

"सिर्फ मुझसे अनशन तोड़ने की विनती करने के बजाय, मैं आप सभी से अपील करता हूं कि आप भी इस आंदोलन के लिए एक छोटा कदम उठाएं। 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन इतनी बड़ी संख्या में दिल्ली आएं कि सरकार तक हमारी आवाज और संदेश सीधे पहुंचे।"

उन्होंने देश के सांसदों से भी इस मुहिम से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि जब हजारों लोग और सांसद मिलकर इस मुद्दे को संसद के हवाले करेंगे, तभी उन्हें विश्वास होगा कि अब लद्दाख का भविष्य सही हाथों में जा चुका है और वे अपना अनशन समाप्त कर सकेंगे।

20 जुलाई को 'संसद चलो' अभियान से और गरमाएगा माहौल

गौरतलब है कि 20 जुलाई 2026 को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन दिल्ली में प्रदर्शनों का एक बड़ा सैलाब उमड़ने की उम्मीद है:

  • 'चलो संसद' मार्च: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित धांधलियों (जैसे NEET-UG पेपर लीक विवाद) के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी जंतर-मंतर से संसद भवन तक एक बड़े शांतिपूर्ण मार्च का आह्वान किया है।

  • लद्दाख और छात्र आंदोलन का मिलन: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 20 जुलाई को लद्दाख के अधिकारों के लिए लड़ रहे सोनम वांगचुक के समर्थक और देश के आक्रोशित छात्र एक साथ सड़क पर उतर सकते हैं, जिससे संसद सत्र के पहले ही दिन दिल्ली पुलिस और प्रशासन के लिए कानून व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।

बेबाक24 टेक

सोनम वांगचुक का यह आंदोलन केवल लद्दाख की जमीन या नौकरियों का नहीं है, बल्कि यह इस बात की परीक्षा है कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण सत्याग्रह की आवाज को सरकार कितनी अहमियत देती है। 19 दिनों तक केवल पानी के सहारे देश की राजधानी की सड़कों पर बैठे रहना किसी भी व्यक्ति के संकल्प की पराकाष्ठा है।

बेबाक24 का मानना है कि सरकार द्वारा इस आंदोलन को लगातार नजरअंदाज करना लोकतंत्र की सेहत के लिए अच्छा नहीं है। वांगचुक का यह कहना कि 'अनशन तोड़ने से सरकार की जवाबदेही खत्म हो जाएगी', भारतीय राजनीति के वर्तमान परिदृश्य पर एक बड़ा और गंभीर कटाक्ष है। 20 जुलाई को जब संसद का सत्र शुरू होगा, तब केवल अंदर ही नहीं, बल्कि सड़कों पर भी लद्दाख के स्वाभिमान और छात्रों के भविष्य को लेकर बड़ा संग्राम छिड़ना तय है। अब देखना यह होगा कि क्या विपक्ष संसद के भीतर सोनम वांगचुक की आवाज को बुलंद कर सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर कर पाता है या नहीं।



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