by admin@bebak24.com on | 2026-07-16 14:51:32
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रोम/कोलकाता (बेबाक24): करीब पांच साल पहले इटली को झकझोर कर रख देने वाले पाकिस्तानी मूल की 18 वर्षीय युवती समन अब्बास की 'झूठी शान के लिए हत्या' के मामले में वहां की न्यायपालिका ने अपना अंतिम और ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। इटली की सर्वोच्च अपीलीय अदालत, 'सुप्रीम कोर्ट ऑफ कैसेशन' ने बुधवार को समन के माता-पिता समेत पांचों रिश्तेदारों की सजा को पूरी तरह बरकरार रखा है।
इस संवेदनशील और कड़े अदालती फैसले का स्वागत करते हुए इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने अपनी सरकार और देश का रुख साफ किया है।
इटली के सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए समन अब्बास की बर्बर हत्या के मामले में परिवार के पांचों सदस्यों को अंतिम रूप से कसूरवार माना:
माता-पिता को उम्रकैद: अदालत ने समन के पिता शब्बर अब्बास और मां नाजिया शाहीन की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है।
चचेरे भाई और चाचा को जेल: समन के दो चचेरे भाइयों— इजाज इकराम और नोमानुल हक की उम्रकैद की सजा भी कायम रखी गई है। वहीं, इस घिनौने अपराध में मदद करने वाले उसके चाचा दानिश हसनैन की 22 साल की जेल की सजा को भी सर्वोच्च अदालत ने सही माना है।
अदालत का अंतिम फैसला आते ही इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक बेहद कड़ा और भावुक संदेश जारी किया। मेलोनी ने कहा:
"समन अब्बास की हत्या के मामले में अंतिम फैसला आने के साथ ही एक बेहद दर्दनाक न्यायिक संघर्ष का अंत हो गया है। समन की हत्या उसके अपने ही माता-पिता और रिश्तेदारों ने सिर्फ इसलिए कर दी, क्योंकि उसने जबरन कराई जा रही शादी का विरोध किया और अपने भविष्य का फैसला खुद करने के अधिकार पर जोर दिया।"
प्रधानमंत्री मेलोनी ने आगे लिखा: "कोई भी फैसला उसकी जिंदगी वापस नहीं ला सकता, लेकिन दोषियों को कानून के तहत अंतिम रूप से सजा मिलना जरूरी था। इटली में उन लोगों के लिए कोई जगह नहीं है, जो कथित सांस्कृतिक या धार्मिक कारणों का हवाला देकर किसी महिला की आजादी, गरिमा और जीवन के अधिकार को नकारने की कोशिश करते हैं। ये ऐसे मूलभूत सिद्धांत हैं, जिन पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।"
पाकिस्तानी मूल का यह परिवार साल 2016 में इटली के नोवेलारा कस्बे में आकर रहने लगा था। समन अब्बास इटली में अपनी मर्जी से जिंदगी जीना चाहती थी:
तस्वीर पर विवाद: समन पाकिस्तानी मूल के ही एक अन्य युवक के साथ रिश्ते में थी। बोलोन्या शहर की एक सड़क पर दोनों की 'किस' करते हुए एक तस्वीर सामने आने के बाद उसका परिवार बेहद नाराज हो गया था।
जबरन शादी का विरोध: साल 2020 में माता-पिता ने समन को जबरन शादी के लिए पाकिस्तान भेजने की योजना बनाई। समन ने इसका कड़ा विरोध किया और नाबालिग होने के कारण इटली के सोशल सर्विस डिपार्टमेंट से मदद मांगी, जिसके बाद उसे शेल्टर होम भेज दिया गया।
धोखे से बुलाकर हत्या: अप्रैल 2021 के आखिर में परिवार के लगातार संदेशों के बाद समन वापस घर लौटी, लेकिन 5 मई 2021 को वह अचानक गायब हो गई। सीसीटीवी फुटेज में परिवार के लोग 29 अप्रैल 2021 की रात फावड़े, लोहे की रॉड और बाल्टी लेकर जाते दिखे थे।
समन के गायब होने के तुरंत बाद उसके माता-पिता पाकिस्तान भाग गए थे, जबकि अन्य रिश्तेदार फ्रांस और स्पेन भाग गए। नवंबर 2022 में चाचा दानिश हसनैन की निशानदेही पर घर के पास एक फार्महाउस से जमीन में दफन समन का शव बरामद हुआ। पोस्टमार्टम में खुलासा हुआ कि उसकी गर्दन की हड्डी टूटी हुई थी, जिसका मतलब था कि गला घोंटकर उसकी जान ली गई थी।
बाद में भारत और अंतरराष्ट्रीय दबाव व प्रत्यर्पण संधि के तहत समन के पिता शब्बर अब्बास को अगस्त 2023 में पाकिस्तान से गिरफ्तार कर इटली लाया गया, जहां उन पर मुकदमा चला।
| मुख्य कानूनी बिंदु | वर्तमान स्थिति (16 जुलाई 2026 तक) |
| सर्वोच्च अदालत का आदेश | माता-पिता और दो चचेरे भाइयों की उम्रकैद की सजा अंतिम रूप से बरकरार। |
| अपराध का कारण | पाकिस्तान में तय की गई जबरन शादी से इनकार और आधुनिक जीवनशैली चुनना। |
| अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण | पिता शब्बर अब्बास को पाकिस्तान से प्रत्यर्पित कर इटली में सजा दिलाई गई। |
| इटली सरकार का रुख | महिलाओं के अधिकारों और आजादी को सर्वोपरि मानते हुए सांस्कृतिक कुरीतियों को खारिज किया। |
समन अब्बास की हत्या और उस पर आया इटली के सुप्रीम कोर्ट का यह अंतिम फैसला यूरोप में रह रहे प्रवासी समाजों और वहां की मूल लोकतांत्रिक व्यवस्था के बीच चल रहे सांस्कृतिक टकराव की एक बानगी है। तथाकथित 'ऑनर किलिंग' जैसी कुप्रथाओं के लिए आधुनिक और सभ्य समाज में कोई स्थान नहीं हो सकता।
बेबाक24 का मानना है कि प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी का यह बयान कि 'सांस्कृतिक कारणों की आड़ में महिलाओं की आजादी पर समझौता नहीं होगा', उन रूढ़िवादी परिवारों के लिए एक कड़ा कानूनी संदेश है जो पश्चिमी देशों में रहकर भी अपनी सामंतवादी सोच नहीं छोड़ पाते। पाकिस्तान से आरोपी पिता का प्रत्यर्पण कराना और उसकी गैर-मौजूदगी में भी मां को सजा सुनाना यह साबित करता है कि इटली की न्याय प्रणाली ने इस मामले को नजीर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। शिक्षा और प्रगति के इस दौर में किसी बेटी की जान सिर्फ इसलिए ले लेना कि वह अपना जीवनसाथी खुद चुनना चाहती थी, इंसानियत को शर्मसार करने वाला है।
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