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'फार्म की मुर्गियां' बोलने पर भड़के छात्र! बांग्लादेश में बाढ़ के बीच परीक्षाओं को लेकर कोहराम, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर सड़कों पर उतरी युवा फौज

by admin@bebak24.com on | 2026-07-15 20:09:23

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'फार्म की मुर्गियां' बोलने पर भड़के छात्र! बांग्लादेश में बाढ़ के बीच परीक्षाओं को लेकर कोहराम, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर सड़कों पर उतरी युवा फौज

ढाका (बेबाक24): पड़ोसी देश बांग्लादेश में एक बार फिर छात्रों का गुस्सा ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा है। देश में आई भीषण बाढ़ और मूसलाधार बारिश के बीच माध्यमिक उच्च बोर्ड (HSC) की परीक्षाओं को जबरन जारी रखने के सरकारी फैसले और छात्रों पर की गई एक आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए हैं।

छात्रों का यह आक्रोश अब सीधे शिक्षा मंत्री एएनएम एहसानुल हक मिलन के खिलाफ केंद्रित हो गया है, और प्रदर्शनकारी छात्र उनसे तुरंत इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। 'बेबाक24' की यह विशेष अंतरराष्ट्रीय ग्राउंड रिपोर्ट:

"फार्म की मुर्गियां": शिक्षा मंत्री के इस एक बयान ने सुलगाई आग

इस बड़े छात्र आंदोलन के पीछे दो मुख्य कारण हैं—पहला सरकार का अड़ियल रवैया और दूसरा शिक्षा मंत्री का गैर-जिम्मेदाराना बयान:

  • अपमानजनक टिप्पणी का आरोप: प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि शिक्षा मंत्री एएनएम एहसानुल हक मिलन ने एचएससी (HSC) की परीक्षा दे रहे छात्रों को 'फार्म की मुर्गियां' (Broiler Chickens) कहकर संबोधित किया था, जिससे छात्रों के स्वाभिमान को गहरी ठेस पहुंची है।

  • शिक्षा मंत्री की सफाई: चौतरफा घिरने के बाद शिक्षा मंत्री मिलन ने अपनी इस 'निजी' टिप्पणी पर खेद जताते हुए कहा है कि अगर उनके शब्दों से किसी को ठेस पहुंची है, तो उन्हें इसका अफसोस है। हालांकि, छात्र इस मौखिक खेद को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं और उनके इस्तीफे पर अड़े हैं।

ढाका से शुरू हुआ आंदोलन पूरे बांग्लादेश में फैला

यह विरोध प्रदर्शन किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है:

  • आंदोलन के मुख्य केंद्र: प्रदर्शन की शुरुआत राजधानी के प्रतिष्ठित ढाका विश्वविद्यालय के सामने से हुई, लेकिन देखते ही देखते यह आक्रोश सावर, बरिशाल, कुमिला, नारायणगंज, जशोर और बोगुरा जैसे देश के तमाम बड़े शहरों और शैक्षणिक केंद्रों में फैल गया है।

  • बाढ़ और कुप्रबंधन का दोहरा संकट: छात्र इस बात से बेहद खफा हैं कि देश का एक बड़ा हिस्सा भीषण बाढ़ की चपेट में है, जिससे यातायात और बुनियादी ढांचा ध्वस्त हो चुका है। ऐसे संकट के समय परीक्षा आयोजित करना छात्रों की जान जोखिम में डालने जैसा है।

  • गलत प्रश्न पत्र: बाढ़ के साथ-साथ छात्र इस बात को लेकर भी नाराज हैं कि बोर्ड द्वारा जारी किए गए कई प्रश्न पत्रों में गंभीर गलतियां और खामियां पाई गई हैं, जो शिक्षा मंत्रालय के लचर प्रबंधन को उजागर करती हैं।

बांग्लादेश छात्र प्रदर्शन 2026: मुख्य कारण और प्रभाव

विरोध के मुख्य बिंदुछात्रों की मांग और वर्तमान स्थिति
शिक्षा मंत्री का बयानछात्रों को 'फार्म की मुर्गियां' कहने पर भारी आक्रोश; इस्तीफे की मांग
प्राकृतिक आपदा का संकटभीषण बाढ़ और बारिश के बावजूद जबरन परीक्षा कराने का विरोध।
प्रशासनिक लापरवाहीबोर्ड परीक्षाओं के कई प्रश्न पत्रों में कथित रूप से गंभीर गलतियां
आंदोलन का दायराढाका यूनिवर्सिटी से शुरू होकर बरिशाल, कुमिला और जशोर समेत पूरे देश में प्रसार

बेबाक24 टेक

बांग्लादेश का इतिहास गवाह है कि जब भी वहां की छात्र शक्ति और युवा फौज सड़कों पर उतरती है, तो बड़े से बड़े सत्ताधीशों के सिंहासन डोल जाते हैं। ऐसे समय में जब देश का युवा बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा हो, शिक्षा मंत्री द्वारा उनके लिए 'फार्म की मुर्गियां' जैसे संवेदनहीन शब्दों का इस्तेमाल करना बेहद शर्मनाक और उनकी सामंती मानसिकता को दर्शाता है।

बेबाक24 का मानना है कि केवल 'खेद प्रकट' करने से छात्रों का यह गुस्सा शांत होने वाला नहीं है। सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करते हुए न सिर्फ परीक्षाओं को बाढ़ की स्थिति सुधरने तक स्थगित करना चाहिए, बल्कि प्रश्न पत्रों की गलतियों की जांच कराकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए। अगर शेख हसीना प्रशासन ने इस छात्र असंतोष को हल्के में लिया, तो यह आंदोलन बांग्लादेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिरता के लिए एक नया और बड़ा संकट खड़ा कर सकता है।



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