by admin@bebak24.com on | 2026-07-15 18:55:52
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नई दिल्ली (बेबाक24): फ़रवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में से एक—इंटेलेंस ब्यूरो (IB) के जांबाज कर्मचारी अंकित शर्मा की निर्मम हत्या के केस में कड़कड़डूमा कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई 2026) को अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। अदालत ने मुख्य आरोपी व पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच अभियुक्तों को हत्या का दोषी करार दिया है।
इस बहुप्रतीक्षित फैसले के आने के बाद, डर और दहशत के साए में दिल्ली छोड़कर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में शरण लेने वाले अंकित शर्मा के पीड़ित परिवार का दर्द एक बार फिर छलक उठा। 'बेबाक24' की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट:
कोर्ट का फैसला आने के बाद बीबीसी न्यूज हिंदी से बातचीत में अंकित शर्मा के बड़े भाई अंकुर शर्मा ने भावुक होते हुए परिवार के मौजूदा हालात और संघर्ष को बयां किया:
दहशत में छोड़ा दिल्ली का घर: अंकुर ने बताया, "अंकित की बेरहमी से हत्या के बाद हमें अपना वो घर और इलाका छोड़ना पड़ा जहां हमारी यादें बसी थीं। दंगों और भाई की मौत के खौफनाक मंजर के बाद वहां रहना नामुमकिन हो गया था।"
किराए के मकान में गुजर-बसर: पीड़ित परिवार अब दिल्ली से दूर गाजियाबाद में एक किराए के मकान में रहने को मजबूर है। अंकुर ने आगे कहा, "हम सिर्फ एक सामान्य जीवन जीना चाहते हैं। हम इस अदालती फैसले से खुश हैं और अब उम्मीद करते हैं कि देश को अपनी सेवा देने वाले मेरे भाई के हत्यारों को फांसी की सजा दी जाएगी।"
न्याय पर भरोसा हुआ मजबूत: परिवार का कहना है कि 6 साल के लंबे इंतजार के बाद आए इस फैसले से कानून और देश की न्याय प्रणाली पर आम जनता का भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है।
अंकित शर्मा महज 22 साल की उम्र में देश की खुफिया एजेंसी आईबी (IB) में भर्ती हुए थे और अपने तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थे। वे अपने पूरे परिवार के इकलौते आर्थिक सहारे थे।
क्या हुआ था उस दिन: चार्जशीट के मुताबिक, 25 फरवरी 2020 की शाम करीब 5 बजे अंकित शर्मा दफ्तर से घर लौटने के बाद बाहर का माहौल देखने या सामान खरीदने घर से बाहर निकले थे।
भीड़ ने दबोचा: चांद बाग पुलिया के पास उग्र भीड़ ने उन्हें पकड़ लिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, दंगाइयों ने अंकित पर इस कदर बर्बरता की थी कि उनके शरीर पर 51 गहरे जख्म पाए गए थे।
नाले में फेंकी लाश: हत्या के बाद उनके शव को खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया था, जहां से अगले दिन (26 फरवरी) को उनकी नग्न लाश बरामद हुई थी।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए ताहिर हुसैन को मुख्य सूत्रधार माना है:
हत्या के दोषी: कोर्ट ने ताहिर हुसैन को दंगा भड़काने, भीड़ को उकसाने और हत्या का दोषी पाया है। हालांकि, उन्हें आपराधिक साजिश के आरोपों से बरी किया गया।
पार्टी से निष्कासन: घटना के वक्त ताहिर हुसैन आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद थे, लेकिन हत्या की एफआईआर में नाम आते ही पार्टी ने उन्हें तुरंत बाहर का रास्ता दिखा दिया था।
नहीं मिली बेल: ताहिर हुसैन मार्च 2020 से लगातार जेल में बंद हैं। पिछले साल चुनाव लड़ने के लिए उन्हें सुप्रीम कोर्ट से चंद दिनों की सशर्त जमानत मिली थी, जिसके बाद वे वापस जेल चले गए थे। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी उनकी जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि दंगों में उनकी भूमिका बेहद अहम थी।
| महत्वपूर्ण घटना / तारीख | अदालती कार्यवाही और जांच की कड़ियां |
| 25 फरवरी 2020 | ड्यूटी से लौटने के बाद चांद बाग पुलिया के पास अंकित शर्मा की हत्या। |
| 26 फरवरी 2020 | खजूरी खास नाले से अंकित शर्मा का क्षत-विक्षत शव बरामद। |
| 16 मार्च 2020 | मुख्य आरोपी और तत्कालीन 'आप' पार्षद ताहिर हुसैन की गिरफ्तारी। |
| जून-अगस्त 2020 | दिल्ली पुलिस द्वारा कोर्ट में चार्जशीट दाखिल और अदालत द्वारा संज्ञान। |
| मार्च 2023 | कोर्ट द्वारा ताहिर हुसैन और अन्य आरोपियों पर हत्या व दंगे के आरोप तय। |
| 13 जुलाई 2026 | सत्र न्यायालय (Session Court) ने ताहिर हुसैन समेत 5 आरोपियों को दोषी करार दिया। |
देश की सुरक्षा और खुफिया विंग (IB) के एक युवा कर्मचारी को जिस तरह दंगाइयों ने अपनी हैवानियत का शिकार बनाया, वह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास पर एक काला धब्बा था। तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह ने भी अंकित शर्मा को 'एक बहादुर और कर्तव्यनिष्ठ कर्मी' बताया था। उनके परिवार का अपना घर छोड़कर किराए के मकान में शरण लेना यह दिखाता है कि सांप्रदायिक दंगों की आग शांत होने के बाद भी निर्दोष परिवारों को उसकी कितनी भारी कीमत चुकानी पड़ती है।
बेबाक24 का मानना है कि ताहिर हुसैन जैसे रसूखदार जनप्रतिनिधि का इस दंगे और जघन्य हत्याकांड में दोषी पाया जाना उन सभी राजनीतिक चेहरों के लिए कड़ा संदेश है जो सत्ता की आड़ में नफरत का खेल खेलते हैं। अदालत ने आरोपियों को दोषी करार देकर इंसाफ की पहली सीढ़ी पार कर ली है, लेकिन पीड़ित परिवार को असली सुकून तब मिलेगा जब अदालत इन दोषियों को उनके किए की सख्त से सख्त सजा (फांसी) मुकर्रर करेगी।
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