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शुल्क पर यू-टर्न के बाद ट्रंप की ईरान को खुली धमकी; बातचीत न करने पर अगले सप्ताह बिजली संयंत्रों और पुलों को उड़ाने का अल्टीमेटम

by admin@bebak24.com on | 2026-07-15 18:16:28

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शुल्क पर यू-टर्न के बाद ट्रंप की ईरान को खुली धमकी; बातचीत न करने पर अगले सप्ताह बिजली संयंत्रों और पुलों को उड़ाने का अल्टीमेटम

वॉशिंगटन/तेहरान (बेबाक24): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति एक बार फिर बेहद आक्रामक और अप्रत्याशित मोड़ पर आ खड़ी हुई है। होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा के महज 24 घंटे के भीतर यू-टर्न लेने के बाद, अब ट्रंप ने ईरान के भीतर घुसकर बड़े हवाई और जमीनी हमलों की खुली धमकी दे डाली है।

अमेरिकी सेना अगले ही सप्ताह ईरान के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर देगी। 'बेबाक24' की यह विशेष अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा रिपोर्ट:

1. "अगले सप्ताह बिजली संयंत्र और पुल होंगे निशाना": ट्रंप का सीधा अल्टीमेटम

डोनाल्ड ट्रंप ने इंटरव्यू के दौरान कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए ईरान को चेतावनी दी:

  • बुनियादी ढांचे पर बमबारी: ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान ने बातचीत का रास्ता नहीं चुना, तो अमेरिकी वायुसेना और मिसाइल डिफेंस सिस्टम अगले सप्ताह ईरान के प्रमुख बिजली संयंत्रों (Power Plants) और पुलों (Bridges) को निशाना बनाकर बमबारी करेंगे।

  • रणनीतिक यू-टर्न: इससे पहले ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर 20% का भारी शुल्क (Tariff) लगाने का एलान किया था, लेकिन वैश्विक दबाव और तेल बाजारों में मची उथल-पुथल के बाद 24 घंटे में ही उन्होंने इस फैसले को वापस ले लिया और अब सीधे सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं।

2. क्या ईरान में मरीन उतारेगा अमेरिका? जमीनी हमले पर ट्रंप का सस्पेंस

जब फॉक्स न्यूज के संवाददाता ने ट्रंप से सीधा सवाल किया कि क्या अमेरिका ईरान के भीतर कोई जमीनी सैन्य अभियान (Ground Invasion) चलाने की योजना बना रहा है, तो ट्रंप ने एक बेहद रहस्यमयी और रणनीतिक जवाब दिया:

"मैं इस बारे में अभी कुछ भी खुलकर नहीं कहना चाहता, लेकिन अगर मुझे लगता है कि कहना सही होगा, तो मैं कह देता हूं। कभी-कभी जमीनी अभियान की जरूरत होती है, लेकिन हमारे पास ऐसे और भी लोग (सहयोगी देश/प्रॉक्सिस) हैं जो हमारे लिए जमीनी अभियान चलाएंगे।"

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का 'और लोग' कहना सीधे तौर पर मिडिल ईस्ट में उनके सबसे पक्के सहयोगी इसराइल या ईरान विरोधी अन्य क्षेत्रीय ताकतों की तरफ इशारा है, जो अमेरिकी वायुसेना के बैकअप के साथ जमीनी मोर्चा संभाल सकते हैं।

3. 28 फरवरी के हमले के बाद से सुलग रहा है मिडिल ईस्ट

गौरतलब है कि इसी साल 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इसराइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर एक बड़ा हमला बोल दिया था। इस हमले के जवाब में जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने प्रभावी रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापार मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था

होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि:

  • दुनिया के कुल तेल परिवहन (Global Oil Supply) का लगभग 25 फीसदी हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है।

  • वैश्विक स्तर पर लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की लगभग 20 प्रतिशत सप्लाई इसी होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते होती है। ईरान द्वारा इसे ब्लॉक किए जाने के बाद से ही अमेरिका बौखलाया हुआ है।

अमेरिका-ईरान तनाव: वर्तमान सैन्य व आर्थिक समीकरण

विषय / क्षेत्रवर्तमान स्थिति और प्रभाव (2026)
ट्रंप की सैन्य धमकीबातचीत न होने पर अगले सप्ताह से ईरान के बिजली ग्रिड और पुलों पर हवाई हमले की तैयारी।
जमीनी हमला (Ground War)अमेरिकी सैनिकों के बजाय सहयोगी ताकतों (इसराइल या क्षेत्रीय गुटों) के इस्तेमाल का संकेत।
आर्थिक नाकेबंदीईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद रखा गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया।
ग्लोबल एनर्जी शेयरवैश्विक तेल का 25% और एलएनजी (LNG) का 20% हिस्सा इसी ब्लॉक रूट के कारण फंसा हुआ है।

बेबाक24 टेक

डोनाल्ड ट्रंप की 'मैक्सिमम प्रेशर' की नीति अब खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। 28 फरवरी के हमले के बाद से मध्य-पूर्व बारूद के ढेर पर बैठा है, और होर्मुज स्ट्रेट को बंद करके ईरान ने अमेरिका की दुखती रग पर हाथ रख दिया है। जहाजों पर 20% शुल्क लगाने के फैसले से पीछे हटना यह दिखाता है कि ट्रंप प्रशासन भी वैश्विक तेल कीमतों में आने वाले ऐतिहासिक उछाल से डरा हुआ है।

बेबाक24 का मानना है कि हवाई हमलों के जरिए बिजली संयंत्रों को उड़ाने की धमकी देकर ट्रंप असल में ईरान को बातचीत के लिए मजबूर करने का मनोवैज्ञानिक खेल खेल रहे हैं। हालांकि, जमीनी हमले के लिए अमेरिकी सैनिकों के बजाय 'दूसरों' का इस्तेमाल करने का बयान यह साफ करता है कि अमेरिका सीधे तौर पर एक और लंबे और खर्चीले जमीनी युद्ध (जैसे इराक या अफगानिस्तान) में अपने सैनिकों को नहीं झोंकना चाहता। देखना यह होगा कि क्या तेहरान इस अल्टीमेटम के आगे झुकता है या फिर यह जंग पूरे विश्व को एक बड़े आर्थिक और सैन्य संकट में धकेल देती है।



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