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20 साल का निर्वासन खत्म; 1 अगस्त को कोलकाता लौटेंगी तसलीमा नसरीन, शुभेंदु सरकार के राज में वापसी के गहरे सियासी मायने

by on | 2026-07-14 22:08:42

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20 साल का निर्वासन खत्म; 1 अगस्त को कोलकाता लौटेंगी तसलीमा नसरीन, शुभेंदु सरकार के राज में वापसी के गहरे सियासी मायने

कोलकाता (बेबाक24): करीब दो दशक (20 साल) पहले अपने प्रगतिशील और बेबाक लेखों के कारण हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद जिस कोलकाता शहर को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था, उसी शहर में बांग्लादेश की प्रख्यात और निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन (Taslima Nasreen) एक बार फिर कदम रखने जा रही हैं।

समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) के अनुसार, तसलीमा नसरीन अगले महीने कोलकाता लौटेंगी। पश्चिम बंगाल में हुए हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद इस वापसी को केवल एक साहित्यिक घटना नहीं, बल्कि एक बेहद बड़ा राजनीतिक और वैचारिक यू-टर्न माना जा रहा है।

1 अगस्त को रवींद्र सदन में कविता पाठ: सोशल मीडिया पर दी जानकारी

लंबे समय से दिल्ली और विदेशों में रहकर निर्वासन का जीवन काट रहीं तसलीमा नसरीन ने खुद सोशल मीडिया के जरिए कोलकाता आने की आधिकारिक पुष्टि की है:

  • कार्यक्रम की तारीख: लेखिका आगामी 1 अगस्त 2026 को कोलकाता के ऐतिहासिक सांस्कृतिक केंद्र 'रभींद्र सदन' (Rabindra Sadan) में आयोजित एक भव्य साहित्यिक कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगी।

  • कविता पाठ और विमर्श: इस कार्यक्रम के दौरान वे मंच से अपनी कविताओं का पाठ करेंगी और पाठकों से रूबरू होंगी। इस साहित्यिक उत्सव का आयोजन पश्चिम बंगाल के कई धर्मनिरपेक्ष और कट्टरतावाद विरोधी संगठनों के एक संयुक्त समूह द्वारा किया जा रहा है।

शुभेंदु सरकार का बड़ा दांव; टीएमसी के 'तुष्टिकरण' पर साधा निशाना

राजनीतिक विश्लेषकों और समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार, तसलीमा नसरीन की यह वापसी पश्चिम बंगाल की नई शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) सरकार के लिए एक बड़ा कूटनीतिक और राजनीतिक नैरेटिव सेट करने का जरिया बन गई है:

  • कट्टरता के खिलाफ संदेश: राज्य की भाजपा सरकार तसलीमा की इस वापसी को 'अभिव्यक्ति की आजादी' की जीत और पिछली ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में हुए कथित 'धार्मिक तुष्टिकरण व कट्टरता' के आगे घुटने टेकने की नीति के अंत के रूप में पेश कर रही है।

  • 2007 का वह हिंसक दौर: साल 2007 में कोलकाता की सड़कों पर तसलीमा नसरीन के खिलाफ कट्टरपंथियों ने हिंसक दंगे और प्रदर्शन किए थे, जिसके बाद तत्कालीन वामपंथी सरकार और बाद की टीएमसी सरकार के दौरान उनके कोलकाता आने पर अघोषित पाबंदी जैसी स्थिति थी। नई सरकार अब इसे एक 'बदलाव के बड़े संकेत' के तौर पर भुना रही है।

तसलीमा नसरीन का सफर और वापसी: एक नजर में फैक्ट्स

मुख्य बिंदु / टाइमलाइनतसलीमा नसरीन के संघर्ष और वापसी का विवरण
बांग्लादेश से निर्वासनसाल 1994 में उपन्यास 'लज्जा' के बाद कट्टरपंथियों की मौत की धमकी के कारण बांग्लादेश छोड़ा।
कोलकाता से विदाईसाल 2007 में शहर में हुए हिंसक दंगों और सुरक्षा कारणों के बाद कोलकाता छोड़ना पड़ा था।
वापसी की तारीख1 अगस्त 2026 (करीब दो दशक बाद कोलकाता की धरती पर वापसी)।
मुख्य कार्यक्रम स्थलरवींद्र सदन, कोलकाता (साहित्यिक एवं कविता पाठ कार्यक्रम)।
राजनीतिक स्टैंडशुभेंदु सरकार इसे धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ एक वैचारिक जीत के रूप में पेश कर रही है।

बेबाक24 टेक

तसलीमा नसरीन की कोलकाता वापसी केवल एक लेखिका की घर-वापसी नहीं है, बल्कि बंगाल की बदलती राजनीति का एक स्पष्ट थर्मामीटर है। तसलीमा हमेशा से बंगाली संस्कृति और भाषा को अपनी रूह मानती रही हैं, और दो दशक तक उन्हें उसी भाषा के केंद्र से दूर रखना राजनीतिक मजबूरियों का नतीजा था। पिछली सरकारों ने वोट बैंक और कानून-व्यवस्था बिगड़ने के डर से उन्हें कोलकाता से दूर रखा, लेकिन नई शुभेंदु सरकार ने उन्हें सुरक्षा और मंच देकर यह साफ कर दिया है कि सूबे की वैचारिक दिशा अब पूरी तरह बदल चुकी है।

बेबाक24 का मानना है कि तसलीमा नसरीन की सुरक्षा सुनिश्चित करना 1 अगस्त को पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी। विपक्ष (टीएमसी और लेफ्ट) इस कदम को ध्रुवीकरण की राजनीति का हिस्सा बता सकता है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी लेखक को उसकी लेखनी के कारण शहर से बाहर रखना जायज नहीं ठहराया जा सकता। तसलीमा की यह वापसी बंगाल के बौद्धिक हल्कों (Intellectual Circles) में एक नई बहस को जन्म देगी, जो आने वाले दिनों में और दिलचस्प होने वाली है।



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