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दतिया में बवाल पर एसपी मयूर खंडेलवाल का बड़ा बयान; बोले—'3 हजार लोग जिला अशांत करने पर तुले थे', बाजार बंद कराने की भी थी कोशिश

by on | 2026-07-11 21:23:35

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दतिया में बवाल पर एसपी मयूर खंडेलवाल का बड़ा बयान; बोले—'3 हजार लोग जिला अशांत करने पर तुले थे', बाजार बंद कराने की भी थी कोशिश

भोपाल/दतिया (बेबाक24): मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा (BJP) नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद भड़की बगावत की आग शांत होने का नाम नहीं ले रही है। दतिया के पुलिस अधीक्षक (SP) मयूर खंडेलवाल ने इस पूरे हिंसक घटनाक्रम को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा किया है।

एसपी खंडेलवाल के मुताबिक, शुक्रवार शाम को करीब 3,000 उपद्रवियों की भीड़ ने दतिया जिले की कानून-व्यवस्था को बंधक बनाने और शांति भंग करने की सुनियोजित कोशिश की थी। इस उग्र भीड़ ने न केवल नेशनल हाईवे जाम किया, बल्कि जबरन दतिया का मुख्य बाजार बंद कराने का भी प्रयास किया। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे दतिया शहर में भारी पुलिस बल और अतिरिक्त सुरक्षा कंपनियां तैनात कर दी गई हैं।

एसपी मयूर खंडेलवाल का बयान: 'समझाइश के बीच अचानक शुरू की पत्थरबाजी'

दतिया के घायल एसपी मयूर खंडेलवाल ने समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) से बातचीत में शुक्रवार रात से लेकर शनिवार सुबह तक के घटनाक्रम की पूरी कहानी बयां की:

  • 10 घंटे का चक्काजाम और आचार संहिता का उल्लंघन: एसपी ने बताया, "इन लोगों ने यहां की मुख्य लाइफलाइन सड़कों को लगभग 10 घंटे तक पूरी तरह जाम कर रखा था। चुनाव के मद्देनजर जिले में आचार संहिता लागू है, इसलिए हम उन्हें कल रात से ही लगातार आचार संहिता का पालन करने और सड़क से हटने की हिदायत दे रहे थे, क्योंकि आम जनता और गाड़ियों की आवाजाही बुरी तरह ठप हो चुकी थी।"

  • अचानक हुआ हमला: उन्होंने आगे कहा कि जब प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल प्रदर्शनकारियों को समझाइश दे रहे थे, तभी भीड़ में शामिल अराजक तत्वों ने अचानक पुलिस पर ताबड़तोड़ पत्थरबाजी शुरू कर दी।

  • आंसू गैस का इस्तेमाल: पुलिस ने आत्मरक्षा और हाईवे खाली कराने के लिए तुरंत आंसू गैस (Tear Gas) के गोले छोड़े। इसके बाद उपद्रवियों ने और ज्यादा हिंसक होकर पथराव किया। हालांकि, एसपी ने साफ किया है कि फिलहाल कड़ी मशक्कत के बाद स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

कलेक्टर और एसपी समेत 8 पुलिस अफसर गंभीर रूप से घायल

इससे पहले दतिया के कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने घायल पुलिसकर्मियों का ब्यौरा देते हुए बताया था कि भीड़ के इस जानलेवा हमले में प्रशासन के शीर्ष अधिकारी जख्मी हुए हैं:

  • एसडीपीओ (SDPO): हाथ में गंभीर फ्रैक्चर और गहरी चोटें आई हैं।

  • एसपी और एएसपी: दतिया एसपी मयूर खंडेलवाल और एडिशनल एसपी भी पत्थरबाजी की सीधी चपेट में आने से घायल हुए हैं।

  • कलेक्टर: स्वप्निल वानखेड़े के सिर पर भी पत्थर लगा, लेकिन हेलमेट पहने होने की वजह से वे किसी बड़ी अनहोनी से बच गए। उनके अलावा 8 अन्य पुलिस जवान गंभीर रूप से अस्पताल में भर्ती हैं।

दतिया उपचुनाव 2026: तनाव के मुख्य बिंदु

मुख्य अपडेटविवरण
उपद्रवियों की संख्याकरीब 3,000 लोग (एसपी दतिया के अनुसार)
प्रशासन का एक्शनहाईवे खाली कराया गया, उपद्रवियों पर आंसू गैस छोड़ी गई, शहर में फ्लैग मार्च।
विवाद की जड़पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा (3 बार के विधायक) का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को बीजेपी उम्मीदवार बनाना।
शहर की स्थितिबाजार खोलने की कोशिश जारी, चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात।

बेबाक24 टेक

दतिया के एसपी मयूर खंडेलवाल का यह बयान कि '3,000 लोग जिले की शांति भंग करने की कोशिश कर रहे थे', यह साफ तौर पर दर्शाता है कि यह महज एक तात्कालिक और भावुक विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित भीड़ तंत्र काम कर रहा था। चुनावी माहौल में जब आदर्श आचार संहिता लागू हो, तब 3,000 लोगों का इकट्ठा होना, 10 घंटे तक नेशनल हाईवे को ठप रखना और बाजार बंद कराने की कोशिश करना खुफिया तंत्र (Intelligence Bureau) की भी एक बड़ी नाकामी है।

बेबाक24 का मानना है कि लोकतंत्र में अपनी पार्टी के फैसले के खिलाफ नाराजगी जताने का अधिकार सबको है, लेकिन कानून को हाथ में लेकर एसपी, एएसपी और कलेक्टर जैसे शीर्ष अधिकारियों को लहूलुहान कर देना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। भाजपा ने आशुतोष तिवारी को टिकट तो दे दिया है, लेकिन दतिया की धरती पर फैली इस सियासी अशांति को शांत करना और निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराना अब शिवराज-मोहन सरकार और चुनाव आयोग के लिए एक अग्निपरीक्षा बन चुका है। उपद्रवियों के खिलाफ अब प्रशासन को बिना किसी राजनीतिक दबाव के सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।



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