ब्रेकिंग न्यूज़
पीएम मोदी ने छात्रों के लिए रोका अपना काफिला: नीट परीक्षा के कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर 45 मिनट रुके
अंतरराष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय

ईरान से शनिवार की महा-वार्ता से पहले अमेरिका की दोटूक मांग; 'होर्मुज़ जलसंधि' पर सार्वजनिक आश्वासन दे तेहरान

by admin@bebak24.com on | 2026-07-11 20:12:50

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3051


ईरान से शनिवार की महा-वार्ता से पहले अमेरिका की दोटूक मांग; 'होर्मुज़ जलसंधि' पर सार्वजनिक आश्वासन दे तेहरान

वॉशिंगटन/तेहरान ब्यूरो (बेबाक24): मध्य पूर्व  में अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को होने वाली बेहद संवेदनशील और प्रस्तावित शांति वार्ता से ठीक पहले कूटनीतिक दबाव का खेल चरम पर पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के प्रशासन ने ईरान के सामने बातचीत की मेज पर बैठने से ठीक पहले दो बेहद सख्त और सार्वजनिक शर्तें रख दी हैं।

अमेरिका ने साफ कर दिया है कि ईरान को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्ग 'होर्मुज़ जलसंधि' को लेकर वैश्विक मंच पर सार्वजनिक आश्वासन देना होगा।

अमेरिका की वो 2 बड़ी मांगें, जिनपर फंसा है पेंच

अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, व्हाइट हाउस शनिवार की बैठक को तभी सार्थक मानेगा जब ईरान निम्नलिखित शर्तों पर आधिकारिक घोषणा करेगा:

होर्मुज़ जलसंधि पर सार्वजनिक गारंटी

अमेरिका चाहता है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने आधिकारिक रूप से यह घोषणा करे कि होर्मुज़ जलसंधि पूरी तरह से खुली है और वह इस मार्ग से गुजरने वाले किसी भी देश के कमर्शियल (व्यापारिक) जहाजों पर भविष्य में कोई गोलीबारी या हमला नहीं करेगा

'हमला एक गलती थी'—सार्वजनिक रूप से कबूल करे ईरान

सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन की दूसरी सबसे बड़ी मांग यह है कि ईरान केवल बंद कमरों में नहीं, बल्कि सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार करे कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर उसके द्वारा की गई गोलीबारी 'एक बड़ी गलती' (A Mistake) थी।

ईरान की सफाई: 'हमारे ही बागी गुट ने किया हमला'

अमेरिकी मीडिया ने अज्ञात शीर्ष अधिकारियों के हवाले से एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुख्य सलाहकारों के साथ हुई 'बैकचैनल' यानी निजी बातचीत में यह तो मान लिया है कि जहाजों पर गोलीबारी होना एक गलती थी, लेकिन इसके पीछे की जो वजह बताई है उसने अमेरिका को भी हैरत में डाल दिया है:

  • बातचीत को पटरी से उतारने की साजिश: ईरान सरकार का कहना है कि उनके देश के भीतर सक्रिय कट्टरपंथियों के एक बागी गुट ने इस गोलीबारी को अंजाम दिया है। यह गुट अमेरिका और ईरान के बीच चल रही ऐतिहासिक शांति वार्ता को पूरी तरह से फेल (पटरी से उतारना) करना चाहता है।

  • जून का युद्धविराम समझौता: गौरतलब है कि इसी साल जून में अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक युद्धविराम समझौता हुआ था, जिसके तहत ईरान ने सभी कमर्शियल जहाजों को सुरक्षित मार्ग (Safe Passage) देने का लिखित वादा किया था।

अमेरिकी अधिकारी का बयान: "ईरानी अधिकारी दोबारा बातचीत की मेज पर आए हैं और उन्होंने निजी तौर पर कहा है कि हमसे गलती हो गई, कृपया बातचीत जारी रखें।"

होर्मुज़ जलसंधि विवाद: एक नजर में पूरा घटनाक्रम

विषय / कूटनीतिक बिंदुवर्तमान स्थिति और विवरण
शनिवार की महा-वार्ताओमान (ओमान के मध्यस्थों की उपस्थिति में) में प्रस्तावित
अमेरिका का रुखट्रंप प्रशासन ने बातचीत जारी रखने की सहमति दी, लेकिन सार्वजनिक माफी और सुरक्षा की लिखित गारंटी मांगी।
ईरान का दावासरकार बातचीत के पक्ष में, हमलों के लिए 'आंतरिक बागी और कट्टरपंथी गुट' जिम्मेदार।
वैश्विक प्रभावहोर्मुज़ जलसंधि से दुनिया का लगभग 20% तेल व्यापार होता है; यहाँ तनाव बढ़ने से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू सकती हैं।

बेबाक24 टेक

ईरान और अमेरिका की इस नई कूटनीतिक रस्साकशी से साफ है कि डोनाल्ड ट्रंप अपनी 'मैक्सिमम प्रेशर' (Maximum Pressure) की नीति से पीछे हटने वाले नहीं हैं। बंद कमरे में ईरान का यह मानना कि 'हमसे गलती हो गई' यह दर्शाता है कि ईरान इस समय चौतरफा आर्थिक प्रतिबंधों और सैन्य दबाव के कारण बेहद कमजोर स्थिति में है और वह अमेरिका के साथ किसी भी सीधी जंग से बचना चाहता है।

लेकिन, ईरान के लिए अमेरिका की इन शर्तों को 'सार्वजनिक रूप से' मानना अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा। अगर ईरान सार्वजनिक रूप से माफी मांगता है, तो देश के भीतर मौजूद कट्टरपंथी और उसकी सेना (IRGC) सरकार के खिलाफ विद्रोह कर सकती है। वहीं अगर वह इस मांग को ठुकराता है, तो शनिवार की यह महा-वार्ता शुरू होने से पहले ही रद्द हो सकती है, जिससे मध्य पूर्व एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठ जाएगा।



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment