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'स्थायी शांति के लिए सच्चा मध्यस्थ बनने को तैयार पाकिस्तान'; पीएम शहबाज़ शरीफ़ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से की हाई-लेवल बातचीत

by admin@bebak24.com on | 2026-07-11 20:03:38

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'स्थायी शांति के लिए सच्चा मध्यस्थ बनने को तैयार पाकिस्तान'; पीएम शहबाज़ शरीफ़ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से की हाई-लेवल बातचीत

इस्लामाबाद/तेहरान ब्यूरो (बेबाक24): मध्य पूर्व (West Asia Crisis) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज़ जलसंधि (Strait of Hormuz) विवाद के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ (Shehbaz Sharif) ने शुक्रवार देर रात ईरान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियान (Masoud Pezeshkian) से फोन पर बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक बातचीत की है।

शहबाज़ शरीफ़ ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर इस हाई-लेवल बातचीत की जानकारी साझा करते हुए वैश्विक शांति के लिए पाकिस्तान की भूमिका को रेखांकित किया।

बातचीत के 3 मुख्य बिंदु: शहबाज़ शरीफ़ ने क्या कहा?

संयम, बातचीत और कूटनीति पर ज़ोर

पाकिस्तानी पीएम ने ईरान के बदलते और तनावपूर्ण हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान से कहा कि पिछले कुछ महीनों में क्षेत्र में जो शांति स्थापित हुई थी, उसे हर हाल में बचाया जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने तीन 'मूलमंत्र' दिए—संयम (Restraint), बातचीत (Dialogue) और कूटनीति (Diplomacy)

'ईमानदार और सच्चा मध्यस्थ' बनने की पेशकश

इस बातचीत का सबसे बड़ा रणनीतिक पहलू पाकिस्तान द्वारा मध्यस्थता (Mediation) की खुली पेशकश रहा। शहबाज़ शरीफ़ ने अपनी पोस्ट में लिखा:

"मैंने दोहराया कि पाकिस्तान इस क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए एक ईमानदार और सच्चा मध्यस्थ (Sincere Broker) बनने की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।"

द्विपक्षीय सहयोग के एजेंडे को आगे बढ़ाना

क्षेत्रीय सुरक्षा के अलावा दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों को मजबूत करने पर भी चर्चा की। ईरान-पाकिस्तान के बीच हाल ही में इस्लामाबाद यात्रा के दौरान जो द्विपक्षीय सहयोग (Bilateral Cooperation) और व्यापारिक एजेंडा तय हुआ था, दोनों देश उसे तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।

क्षेत्रीय समीकरण: क्यों महत्वपूर्ण है पाकिस्तान की यह पहल?

यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने की कगार पर है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 'नतीजे भुगतने' की खुली चेतावनी दी है।

  • बैकचैनल कूटनीति: गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले काफी समय से जारी तनाव को पूरी तरह खत्म कराने और दोनों परमाणु-सक्षम शक्तियों (या उनके सहयोगियों) के बीच शांति स्थापित करवाने के लिए पाकिस्तान पर्दे के पीछे से लगातार मध्यस्थता की कोशिशें कर रहा है।

  • रणनीतिक स्थिति: पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति ईरान के साथ सीमा साझा करती है, ऐसे में मध्य पूर्व में कोई भी बड़ा युद्ध पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित कर सकता है।

बेबाक24 टेक

मध्य पूर्व के इस बारूद के ढेर पर पाकिस्तान का 'सच्चा मध्यस्थ' बनने का दावा कूटनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके रास्ते में कई चुनौतियाँ हैं। एक तरफ जहाँ ईरान पाकिस्तान का पड़ोसी है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के आर्थिक हित और सुरक्षा संबंध अमेरिका व सऊदी अरब जैसे देशों से गहरे जुड़े हैं।

बेबाक24 का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप के आक्रामक रुख और ओमान में शनिवार को होने वाली महा-वार्ता से ठीक पहले शहबाज़ शरीफ़ का तेहरान को 'संयम' बरतने की सलाह देना यह दिखाता है कि इस्लामाबाद इस समय एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में खुद को स्थापित करना चाहता है। यदि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान को सीधी जंग से रोकने में थोड़ा भी कामयाब होता है, तो यह वैश्विक मंच पर उसकी धूमिल होती छवि के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत होगी। हालांकि, यह देखना बाकी है कि तेहरान इस 'मध्यस्थता' को कितनी गंभीरता से लेता है।



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