by admin@bebak24.com on | 2026-07-11 15:04:50
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पटना ब्यूरो (बेबाक24): बिहार की सबसे हॉट सीट माने जाने वाली बांकीपुर विधानसभा उप-चुनाव में शुक्रवार शाम को एक ऐसा सियासी भूचाल आया, जिसने एनडीए (NDA) कैंप से लेकर पूरे बिहार के राजनीतिक गलियारों को चौंका दिया। बीजेपी की ओर से घोषित उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा ने नामांकन दाखिल करने के महज कुछ ही घंटों के भीतर अचानक अपना नाम वापस ले लिया।
इस घटना के तुरंत बाद बीजेपी ने नीरज कुमार सिन्हा को अपना नया उम्मीदवार घोषित किया है। हालांकि अभिषेक सिन्हा ने नाम वापस लेने के पीछे 'पारिवारिक वजह' बताई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों और वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार इस अप्रत्याशित कदम के पीछे 3 बड़ी और गहरी वजहें सामने आ रही हैं:
वरिष्ठ पत्रकार लव कुमार मिश्रा और फैजान अहमद के मुताबिक, नाम वापसी की सबसे मुख्य वजह अभिषेक सिन्हा के परिवार का अतीत है:
माता-पिता को सजा: अभिषेक कुमार सिन्हा के माता-पिता को सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत ने चारा घोटाले से जुड़े मामले में दोषी ठहराया था।
नैतिकता का संकट: बीजेपी ने बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और लालू प्रसाद यादव के खिलाफ अपना पूरा राजनीतिक वजूद ही 'चारा घोटाले' के भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर खड़ा किया है। ऐसे में चारा घोटाले के दोषी के बेटे को टिकट देना पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के लिए भारी सार्वजनिक शर्मिंदगी का सबब बन रहा था, जिससे विपक्ष को बड़ा मुद्दा मिल जाता।
वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेलारी का विश्लेषण इस घटनाक्रम को एक अलग मोड़ देता है। उनका मानना है कि यह बीजेपी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान का नतीजा है:
अध्यक्ष की पसंद पर वार: अभिषेक कुमार सिन्हा को बीजेपी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन की पसंद माना जा रहा था (नितिन नबीन के राज्यसभा जाने के बाद ही यह सीट खाली हुई है)।
रणनीतिक लीक: कन्हैया भेलारी के अनुसार, पार्टी के ही विरोधी गुट ने जानबूझकर सियासी गलियारों में यह बात फैलाई कि अभिषेक के पिता का नाम चारा घोटाले में था। ऐसा इसलिए किया गया ताकि दिल्ली (शीर्ष नेतृत्व) को यह संदेश दिया जा सके कि नए अध्यक्ष की पसंद कितनी विवादित है।
इस सीट की चर्चा पूरे देश में इसलिए है क्योंकि चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (PK) पहली बार खुद चुनावी मैदान में उतर रहे हैं।
वोटरों से अपील: प्रशांत किशोर लगातार बांकीपुर के मतदाताओं के बीच कैंपेन कर रहे हैं कि वे बीजेपी को हराकर केंद्रीय नेतृत्व को अपनी नाराजगी का संदेश दें।
दबाव की राजनीति: विश्लेषकों का मानना है कि भले ही पिछले विधानसभा चुनाव में जन सुराज का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था, लेकिन प्रशांत किशोर के पास इस चुनाव में 'खोने के लिए कुछ नहीं है'। बीजेपी को डर था कि पीके मंचों से चारा घोटाले को बड़ा मुद्दा बनाकर बीजेपी के कोर वोट बैंक (सवर्ण/शहरी वोटर) में सेंध लगा सकते हैं।
अभिषेक सिन्हा के नाम वापस लेने पर प्रशांत किशोर ने तंज कसते हुए कहा—"जनता खड़ी हो गई तो अब इन्हें बांकीपुर से कोई उम्मीदवार ही नहीं मिल रहा।"
| सीट का इतिहास | पिछला वोटिंग ट्रेंड (2025) | मुख्य त्रिकोणीय मुकाबला | चुनाव की महत्वपूर्ण तारीखें |
| बीजेपी का गढ़: नितिन नबीन यहां से लगातार 5 बार (2006 से) विधायक रहे। | लो वोटिंग: सिर्फ 41% मतदान हुआ था। नितिन नबीन 52 हजार वोटों से जीते थे, लेकिन 75% वोटर्स ने बीजेपी को वोट नहीं दिया था। | 1. नीरज कुमार सिन्हा (बीजेपी) 2. प्रशांत किशोर (जन सुराज) 3. रेखा कुमारी उर्फ रेखा गुप्ता (RJD) | * नामांकन की आखिरी तारीख: 13 जुलाई * मतदान (Voting): 30 जुलाई 2026 * नतीजे (Results): 3 अगस्त 2026 |
बांकीपुर सीट पर टिकट देकर महज कुछ घंटों में उम्मीदवार बदल देना साफ तौर पर बीजेपी के स्थानीय थिंक-टैंक और स्क्रीनिंंग कमेटी की एक बहुत बड़ी प्रशासनिक व रणनीतिक चूक को दर्शाता है। फैजान अहमद की यह बात बिल्कुल तार्किक है कि जब चारा घोटाले में अभियुक्तों की सूची जगजाहिर है, तो टिकट फाइनल करने से पहले उम्मीदवार के बैकग्राउंड की जांच क्यों नहीं की गई?
बेबाक24 का मानना है कि बांकीपुर में सवर्ण वोटरों (विशेषकर कायस्थ और भूमिहार बहुल सीट) के बीच बीते कुछ समय से स्थानीय मुद्दों (जैसे भोजपुर के भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले के बाद उपजी नाराजगी) को लेकर अंदरूनी असंतोष है। ऐसे में आरजेडी की रेखा कुमारी और खुद मैदान में उतरे प्रशांत किशोर के कारण मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प हो गया है। बीजेपी ने नीरज कुमार सिन्हा को उतारकर डैमेज कंट्रोल की कोशिश तो की है, लेकिन उम्मीदवार के इस 'हाई-वोल्टेज सरेंडर' ने विपक्ष और जन सुराज को मनोवैज्ञानिक बढ़त दे दी है। 30 जुलाई को होने वाला यह उप-चुनाव अब सिर्फ एक सीट की जंग नहीं, बल्कि नितिन नबीन की प्रतिष्ठा और प्रशांत किशोर के राजनीतिक भविष्य का लिटमस टेस्ट बन चुका है।
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