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बिहार सियासत (बेबाक24): बांकीपुर उपचुनाव में बड़ा ट्विस्ट; BJP उम्मीदवार अभिषेक सिन्हा ने वापस लिया नाम, अब नीरज सिन्हा लड़ेंगे चुनाव; प्रशांत किशोर से होगी सीधी टक्कर

by on | 2026-07-10 22:16:38

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बिहार सियासत (बेबाक24): बांकीपुर उपचुनाव में बड़ा ट्विस्ट; BJP उम्मीदवार अभिषेक सिन्हा ने वापस लिया नाम, अब नीरज सिन्हा लड़ेंगे चुनाव; प्रशांत किशोर से होगी सीधी टक्कर

पटना ब्यूरो (बेबाक24): बिहार की हॉट सीट माने जाने वाली पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले एक बेहद चौंकाने वाला सियासी घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा घोषित उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा ने नामांकन दाखिल करने के ठीक अगले ही दिन अचानक अपना नाम वापस ले लिया है। इस अप्रत्याशित कदम के तुरंत बाद भाजपा ने डैमेज कंट्रोल करते हुए नए उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है।

पारिवारिक कारणों का हवाला, संजय सरावगी को सौंपा पत्र

भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के उपाध्यक्ष और पूर्व पटना महानगर अध्यक्ष अभिषेक कुमार सिन्हा ने गुरुवार को ही पूरे तामझाम के साथ बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर अपना पर्चा भरा था। लेकिन शुक्रवार को उन्होंने अचानक चुनाव लड़ने से कदम पीछे खींच लिए।

  • इस्तीफे की वजह: अभिषेक सिन्हा ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी से मुलाकात कर उन्हें अपना आधिकारिक पत्र सौंपा। पत्र में उन्होंने केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व का आभार जताते हुए लिखा, "मैं पारिवारिक कारणों से विधानसभा उपचुनाव लड़ने में असमर्थ हूँ।" हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पार्टी के एक निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में सेवा देते रहेंगे।

  • अब नीरज कुमार सिन्हा संभालेंगे कमान: अभिषेक सिन्हा के हटने के बाद बीजेपी ने आनन-फानन में नीरज कुमार सिन्हा को बांकीपुर से अपना नया उम्मीदवार घोषित किया है। नीरज सिन्हा साल 2006 से बीजेपी के समर्पित सदस्य हैं और संगठन में दो बार मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

क्यों हो रहा है बांकीपुर में उपचुनाव?

बांकीपुर सीट को पारंपरिक रूप से भाजपा का सबसे अभेद्य गढ़ माना जाता है।

  • नितिन नबीन के इस्तीफे से खाली हुई सीट: इस सीट से बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन लगातार विधायक चुने जा रहे थे। हाल ही में उनके राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद उन्होंने इस विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था, जिसके कारण यहां उपचुनाव कराया जा रहा है।

  • नामांकन की अंतिम तारीख: बांकीपुर उपचुनाव के लिए पर्चा दाखिल करने की आखिरी तारीख सोमवार, 13 जुलाई है।

प्रशांत किशोर की एंट्री से त्रिकोणीय मुकाबला; दिग्गज मैदान में

बीजेपी के इस आंतरिक फेरबदल के बीच बांकीपुर का यह चुनाव पूरे देश की नजरों में आ गया है, क्योंकि इस बार चुनावी बिसात पर सीधे 'किंगमेकर' की एंट्री हो गई है:

  • मैदान में उतरे प्रशांत किशोर: 'जन सुराज' के संस्थापक और जाने-माने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) ने खुद इस सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा कर सबको चौंका दिया है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में खाता न खुलने के बाद पीके के लिए यह चुनाव साख की लड़ाई बन चुका है।

  • RJD की रेखा गुप्ता: मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने एक बार फिर रेखा कुमारी उर्फ रेखा गुप्ता पर दांव खेला है। 2025 के आम चुनाव में वे नितिन नबीन के खिलाफ उपविजेता रही थीं।

  • तेज प्रताप की पार्टी भी रेस में: लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की नई नवेली पार्टी 'जनशक्ति जनता दल' ने भी यहां से सामाजिक कार्यकर्ता वीणा मानवी को अपना उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

बांकीपुर सीट का सामाजिक और चुनावी गणित

बांकीपुर (पुराना नाम पटना पश्चिम) शहरी मतदाताओं वाली एक ऐसी सीट है, जहां 1995 के बाद से बीजेपी कभी चुनाव नहीं हारी है। करीब 4 लाख मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में सामाजिक समीकरण बेहद अनूठे हैं:

  • कायस्थ और वैश्य बाहुल्य: इस सीट पर कायस्थ (लगभग 15-20%) और वैश्य (व्यापारी वर्ग) मतदाताओं का भारी प्रभाव है। यही कारण है कि बीजेपी ने अभिषेक सिन्हा के हटने के बाद भी कायस्थ कार्ड खेलते हुए नीरज कुमार सिन्हा को टिकट दिया है।

  • पिछले चुनाव के आंकड़े (2025): बीते साल हुए मुख्य विधानसभा चुनाव में बीजेपी के नितिन नबीन को 98 हजार से ज्यादा वोट मिले थे, जबकि आरजेडी की रेखा गुप्ता को करीब 47 हजार वोट मिले। वहीं, जन सुराज की तत्कालीन उम्मीदवार वंदना कुमारी महज 8 हजार वोटों पर सिमट गई थीं।

बेबाक24 टेक

नामांकन के अगले ही दिन बीजेपी उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा का नाम वापस लेना और पारिवारिक कारणों का हवाला देना, राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयासों को जन्म दे रहा है। क्या यह वाकई कोई पारिवारिक संकट है या प्रशांत किशोर की सीधी उम्मीदवारी के बाद बीजेपी के भीतर किसी आंतरिक सर्वे या रणनीति के तहत अंतिम समय में चेहरा बदला गया है? यह सवाल हवा में तैर रहा है।

'बेबाक24' का मानना है कि बांकीपुर को बीजेपी का 'सुपर सेफ ज़ोन' माना जाता है, जहां नितिन नबीन के पिता के जमाने से पार्टी का एकतरफा कब्जा रहा है। लेकिन इस बार चुनौती बिल्कुल अलग है। प्रशांत किशोर खुद मैदान में हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में करारी हार और जन सुराज का खाता न खुलने के बाद प्रशांत किशोर का इस गढ़ में उतरना एक बहुत बड़ा कूटनीतिक जुआ है। पीके जानते हैं कि अगर वो यहां बीजेपी को कड़ी टक्कर देने या उलटफेर करने में कामयाब रहे, तो बिहार में 'जन सुराज' को एक मृतप्राय आंदोलन से उठाकर मुख्यधारा का विकल्प बना देंगे। नए उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा के लिए इतने कम समय में जमीन पर पकड़ मजबूत करना और इस त्रिकोणीय (BJP, RJD, जन सुराज) चक्रव्यूह को भेदना एक बेहद कठिन अग्निपरीक्षा होने वाली है।



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