by admin@bebak24.com on | 2026-07-09 21:45:44
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तेहरान/वाशिंगटन (बेबाक24): पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) इस वक्त एक बेहद भयानक और विनाशकारी पूर्ण विकसित युद्ध की आग में झुलस रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए सीधे सैन्य टकराव और जवाबी हमलों के बीच दुनिया की सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री लाइफलाइन 'होर्मुज़ स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) से कमर्शियल जहाजों और तेल टैंकरों की आवाजाही गुरुवार को पूरी तरह ठप हो गई है।
वैश्विक शिपिंग डेटा और कूटनीतिक स्रोतों के अनुसार, इस सैन्य गतिरोध के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अब तक का सबसे बड़ा संकट मंडराने लगा है।
होर्मुज़ स्ट्रेट वह समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया के कुल कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति का एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है।
शिपिंग डेटा का खुलासा: शिपिंग इंटेलिजेंस फर्म 'केप्लर' के आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार तड़के तक इस पूरे रास्ते से केवल दो तेल टैंकर ही गुजरने का साहस कर पाए।
ग्लोबल सप्लाई चेन ध्वस्त: अमेरिकी बमबारी और ईरान की आक्रामक जवाबी सैन्य तैयारियों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल जहाजों ने इस रूट से पूरी तरह दूरी बना ली है, जिससे दुनिया भर में ईंधन संकट और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आना तय माना जा रहा है।
जमीन पर चल रही इस सैन्य जंग में अमेरिका ने ईरान के सबसे संवेदनशील रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है:
परमाणु ठिकाने पर खतरा: ईरान के बेहद महत्वपूर्ण बुशहर प्रमुख परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Bushehr Nuclear Power Plant) के निकटवर्ती इलाकों और रणनीतिक बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में गुरुवार को भीषण धमाकों की खबरें सामने आई हैं।
युद्ध अपराध का आरोप: इन हमलों के बाद बौखलाए ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर नागरिक बुनियादी ढांचों (Civilian Infrastructure) पर की जा रही अमेरिकी बमबारी को सीधे तौर पर 'युद्ध अपराध' (War Crime) करार दिया है।
अमेरिकी हमलों का सामना कर रहे तेहरान (ईरान) ने भी कड़ा रुख अख्तियार करते हुए पूरे मिडल ईस्ट को युद्ध क्षेत्र में तब्दील कर दिया है:
अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला: ईरान सरकार का दावा है कि उसने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत, बहरीन और कतर में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अड्डों को अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया है।
जॉर्डन ने मार गिराईं मिसाइलें: इस बीच, जॉर्डन ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि उसके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन कर ईरान की ओर से दागी गई आठ घातक मिसाइलों को उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने बीच रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर मार गिराया है।
रेलवे ब्रिज को नुकसान: 'बीबीसी वेरीफाई' ने ईरानी मीडिया द्वारा जारी उन तस्वीरों और सैटेलाइट वीडियो की सत्यता की पुष्टि की है, जिनमें उत्तरी ईरान के अक़-क़ला शहर में एक प्रमुख रेलवे पुल (Railway Bridge) को अमेरिकी हमलों में भारी नुकसान पहुंचते हुए दिखाया गया है।
कर्मचारियों की 70% कटौती: इस भीषण युद्ध का सबसे बड़ा और तत्काल असर ईरान के आर्थिक इंजन यानी पेट्रोकेमिकल उद्योग पर पड़ा है। दक्षिण-पश्चिमी ईरान में फारस की खाड़ी के तट पर स्थित माहशहर पेट्रोकेमिकल विशेष आर्थिक क्षेत्र संगठन ने एक आपातकालीन नोटिस जारी कर दिया है। युद्ध जैसी इन विभीषिकाओं को देखते हुए 10 जुलाई से कार्यस्थलों पर कर्मचारियों की संख्या में 70 प्रतिशत तक की भारी कटौती की जाएगी। यह इलाका ईरान के पेट्रोकेमिकल उत्पादन और निर्यात का सबसे बड़ा गढ़ माना जाता है।
यह अब कोई छद्म युद्ध (Proxy War) नहीं है, बल्कि यह सीधे-सीधे तीसरे विश्व युद्ध की आहट है। अमेरिका द्वारा ईरान के बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के इतने करीब बमबारी करना वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से एक आत्मघाती कदम है। अगर इस संयंत्र को मामूली नुकसान भी पहुंचता है, तो पूरे पश्चिम एशिया में परमाणु रेडिएशन का खतरा फैल सकता है। दूसरी तरफ, ईरान द्वारा कुवैत, बहरीन और कतर जैसे संप्रभु देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागना यह साबित करता है कि तेहरान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है और वह खाड़ी के अन्य देशों को भी इस जंग में घसीटने से पीछे नहीं हटेगा।
'बेबाक24' का मानना है कि होर्मुज़ स्ट्रेट का लगभग ठप हो जाना पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक कूटनीतिक और आर्थिक 'हार्ट अटैक' जैसा है। अगर यह रास्ता अगले 48 घंटों तक इसी तरह ब्लॉक रहा, तो भारत सहित पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी और वैश्विक महंगाई दर अनियंत्रित हो जाएगी। माहशहर पेट्रोकेमिकल ज़ोन में 70% स्टाफ की कटौती यह साफ इशारा कर रही है कि ईरान को भी भनक लग चुकी है कि अमेरिका उसके आर्थिक ढांचे को पूरी तरह अपाहिज करने की रणनीति पर काम कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) इस वक्त पूरी तरह अप्रासंगिक और मूकदर्शक बना हुआ है। यदि इस सैन्य तानाशाही और पागलपन को तुरंत बातचीत की मेज पर नहीं रोका गया, तो यह आधुनिक इतिहास का सबसे भयावह मानवीय और आर्थिक संकट साबित होगा।
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