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एक दशक का इंतजार खत्म; भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच ऐतिहासिक 'यूरेनियम सप्लाई' समझौता; पीएम मोदी के दौरे में 18 बड़े करारों पर मुहर

by admin@bebak24.com on | 2026-07-09 22:12:40

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एक दशक का इंतजार खत्म; भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच ऐतिहासिक 'यूरेनियम सप्लाई' समझौता; पीएम मोदी के दौरे में 18 बड़े करारों पर मुहर

कैनबरा/नई दिल्ली ब्यूरो (बेबाक24): वैश्विक मंच पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु कूटनीति के लिहाज से एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ी कामयाबी सामने आई है। लंबे समय से प्रतीक्षित और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण यूरेनियम आपूर्ति समझौते (Uranium Supply Agreement) पर आखिरकार भारत और ऑस्ट्रेलिया ने आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

इस बेहद अहम और दूरगामी समझौते के लिए दोनों देशों के बीच पिछले एक दशक (10 साल) से भी अधिक समय से बातचीत का लंबा दौर चल रहा था, जिसे अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा ऑस्ट्रेलिया दौरे में अंतिम रूप दे दिया गया है।

'शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए भारत को मिलेगा यूरेनियम' — एंथनी अल्बनीज़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ (Anthony Albanese) ने इस ऐतिहासिक असैन्य परमाणु सहयोग की पुष्टि की। उन्होंने कहा:

ऑस्ट्रेलियाई पीएम का आधिकारिक बयान:

"आज हम साल 2015 के ऑस्ट्रेलिया-भारत असैन्य परमाणु सहयोग समझौते (Civil Nuclear Cooperation Agreement) के तहत शांतिपूर्ण उद्देश्यों (Peaceful Purposes) के लिए भारत को यूरेनियम निर्यात करने की प्रशासनिक और व्यावहारिक व्यवस्था पर हस्ताक्षर की पुष्टि करते हैं। यह दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे का एक नया अध्याय है।"

 पीएम मोदी के दौरे में 'सुपर 18' समझौते; रक्षा से लेकर समुद्री सुरक्षा तक सब शामिल

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर इस दौरे की भव्य कूटनीतिक सफलताओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच कुल 18 द्विपक्षीय समझौतों पर सहमति बनी है, जो भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएंगे:

  • परमाणु और ऊर्जा सुरक्षा: यूरेनियम आपूर्ति के साथ-साथ दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापक तकनीकी सहयोग को लेकर भी सहमति बनी है, जो भारत की क्लीन एनर्जी (स्वच्छ ऊर्जा) की जरूरतों को पूरा करेगा।

  • रक्षा और रणनीतिक सहयोग: इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और अधिक मजबूत करने का संकल्प लिया है।

  • समुद्री सुरक्षा रोडमैप: हिंद महासागर में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और खुफिया जानकारी साझा करने के लिए एक विशेष 'समुद्री सुरक्षा रोडमैप' तैयार किया गया है।

बेबाक24 टेक

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम सप्लाई का यह समझौता सिर्फ एक व्यापारिक डील नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति में भारत की बढ़ती परमाणु साख (Nuclear Credibility) की एक बहुत बड़ी कूटनीतिक महाविजय है। दुनिया भर में यूरेनियम का सबसे बड़ा भंडार रखने वाले देशों में शुमार ऑस्ट्रेलिया का भारत को यूरेनियम देने के लिए राजी होना यह साबित करता है कि भारत ने बिना 'परमाणु अप्रसार संधि' (NPT) पर हस्ताक्षर किए भी दुनिया में एक बेहद जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में अपनी धाक जमाई है।

'बेबाक24' का मानना है कि साल 2015 के समझौते के बाद भी इस व्यावहारिक व्यवस्था (Operational Arrangement) को लागू होने में 11 साल का लंबा वक्त लग गया, जो यह दिखाता है कि ऑस्ट्रेलिया के भीतर भारत को लेकर परमाणु नियमों को लेकर कितनी हिचकिचाहट थी। लेकिन मौजूदा वैश्विक परिदृश्य, क्वाड (QUAD) गठबंधन की मजबूती और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन को संतुलित करने की मजबूरी ने ऑस्ट्रेलिया को भारत के साथ आने पर मजबूर किया है। इस यूरेनियम से भारत के परमाणु बिजलीघरों (Nuclear Power Plants) को भरपूर ईंधन मिलेगा, जिससे हमारी कोयले पर निर्भरता कम होगी। पीएम मोदी के इस दौरे में हुए 18 समझौते, खासकर रक्षा और समुद्री सुरक्षा रोडमैप, यह साफ संकेत हैं कि भारत और ऑस्ट्रेलिया अब सिर्फ व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि एक बेहद मजबूत सैन्य और रणनीतिक धुरी बन चुके हैं।



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