by on | 2026-07-07 20:22:02
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अयोध्या/लखनऊ ब्यूरो (बेबाक24): अयोध्या के राम मंदिर में सामने आए 'चंदा और चढ़ावा चोरी' मामले में मचे देशव्यापी बवाल के बीच स्थानीय सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। सोमवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की हाई-प्रोफाइल बैठक में आखिरकार ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया।
इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल और इस्तीफों पर अयोध्या के नवनिर्वाचित सांसद अवधेश प्रसाद ने अब तक का सबसे तीखा और हमलावर बयान जारी किया है। सांसद ने इस पूरे प्रकरण को 'चोरी' मानने से साफ इनकार करते हुए इसे भगवान के घर में हुई 'डकैती' करार दिया है।
समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बात करते हुए अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद ने राम मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष अधिकारियों के इस्तीफों को नाकाफी बताते हुए सीधे तौर पर खारिज कर दिया। उन्होंने कहा:
सांसद अवधेश प्रसाद का आधिकारिक बयान:
"इन इस्तीफों का अब कोई मतलब नहीं है। राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी सिर्फ एक सामान्य चोरी नहीं है, बल्कि यह सीधे-सीधे भगवान के घर में डकैती है। इस बेहद शर्मनाक घटना से निश्चित रूप से प्रभु श्री राम के पवित्र मंदिर की गरिमा और पवित्रता पर गंभीर आंच आई है, और पूरी दुनिया में अयोध्या के लोगों की छवि भी धूमिल हुई है।"
उन्होंने आगे मांग की कि जो भी रसूखदार लोग इस महा-घोटाले और डकैती के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें कोई सामान्य सजा नहीं दी जानी चाहिए। सरकार को इस मामले के लिए एक विशेष कानून (Special Law) बनाकर कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान करना चाहिए, ताकि इतिहास में इसे भगवान राम के मंदिर में हुई ऐतिहासिक डकैती के रूप में याद रखा जाए और भविष्य में कोई ऐसा दुस्साहस न कर सके।
सांसद अवधेश प्रसाद ने अपनी प्रतिक्रिया में ट्रस्ट के भीतर चल रही आपसी खींचतान और कुप्रबंधन का एक बड़ा आंतरिक सबूत सामने रखा। उन्होंने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष (Treasurer) के बयानों का हवाला देते हुए मंदिर के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए:
कोषाध्यक्ष का कबूलनामा: सांसद ने बताया— "कल मैंने खुद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष को मीडिया के सामने साफ तौर पर कहते हुए सुना कि— 'मैंने किसी भी तरह के हस्ताक्षर (Signature) की अनुमति नहीं दी थी। मैं कभी भी वित्तीय खातों (Financial Accounts) की मॉनिटरिंग या निगरानी करने नहीं गया और मैं इन सभी वित्तीय मामलों से पूरी तरह दूर रहा।'"
सांसद का सवाल: इस बयान पर तीखा कूटनीतिक प्रहार करते हुए अवधेश प्रसाद ने पूछा कि आखिर यह किस तरह का ट्रस्ट चलाया जा रहा है, जहां खुद पैसों का हिसाब-किताब रखने वाले कोषाध्यक्ष ही खुद को इतना उपेक्षित (Marginalized) महसूस कर रहे हैं और खुद को ट्रस्ट के रोजमर्रा के कामकाज से अलग बता रहे हैं? अगर कोषाध्यक्ष खातों को नहीं देख रहे थे, तो फिर चंदे के करोड़ों रुपयों और सोने-चांदी पर हस्ताक्षर कौन और किसकी मर्जी से कर रहा था? यह बेहद गंभीर और संदेहास्पद मामला है।
अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद ने जो सवाल उठाए हैं, वे चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद भी ट्रस्ट की पारदर्शिता को पूरी तरह कटघरे में खड़ा करते हैं। यह बेहद चौंकाने वाली और प्रशासनिक रूप से हजम न होने वाली बात है कि जिस ट्रस्ट पर देश-विदेश के करोड़ों हिंदुओं की आस्था और अरबों रुपयों के चढ़ावे को संभालने की जिम्मेदारी है, उसका कोषाध्यक्ष खुद यह कह रहा है कि वह खातों की निगरानी से दूर था। इसका सीधा मतलब यह है कि ट्रस्ट के भीतर कुछ चुनिंदा लोग अपनी मनमर्जी से 'वन-मैन शो' चला रहे थे, जिसकी परिणति इस महा-चोरी के रूप में सामने आई है।
'बेबाक24' का मानना है कि केवल चंपत राय का इस्तीफा ले लेने से मंदिर की धूमिल हुई छवि साफ नहीं होगी। सांसद अवधेश प्रसाद की यह बात बिल्कुल वाजिब है कि यह करोड़ों भक्तों की आस्था के साथ कूटनीतिक डकैती है। जब तक इस पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र न्यायिक संस्था या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नहीं होती और कोषाध्यक्ष के बयानों के आधार पर पिछले दो सालों के पूरे वित्तीय ऑडिट की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाती, तब तक अयोध्या की धरती से उठने वाले ये सियासी और सामाजिक सवाल शांत होने वाले नहीं हैं। सरकार को इस 'डकैती' के असली मास्टरमाइंड्स का चेहरा बेनकाब करना ही होगा।
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