ब्रेकिंग न्यूज़
पीएम मोदी ने छात्रों के लिए रोका अपना काफिला: नीट परीक्षा के कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर 45 मिनट रुके
राष्ट्रीय राष्ट्रीय

उत्तर प्रदेश (बेबाक24): राम मंदिर चढ़ावे में 'फर्जी रसीद' विवाद पर गरमाई सियासत; कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत बोले— 'जिस SIT प्रमुख पर खुद 420 का केस हो, वो क्या जांच करेंगे?'

by admin@bebak24.com on | 2026-07-09 22:02:24

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3064


उत्तर प्रदेश (बेबाक24): राम मंदिर चढ़ावे में 'फर्जी रसीद' विवाद पर गरमाई सियासत; कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत बोले— 'जिस SIT प्रमुख पर खुद 420 का केस हो, वो क्या जांच करेंगे?'

लखनऊ/अयोध्या ब्यूरो (बेबाक24): अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि से जुड़ी कथित फर्जी रसीद पुस्तिकाओं (Fake Receipt Books) की बरामदगी का मामला अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो चुका है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) पर तीखा हमला बोला है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने इस पूरे मामले को लेकर न केवल भाजपा की नीयत पर सवाल उठाए हैं, बल्कि एसआईटी प्रमुख की निष्पक्षता और उनके अतीत को लेकर एक बड़ा और सनसनीखेज दावा किया है।

'प्रभावशाली लोगों को एसआईटी के नाम पर मिल रहा संरक्षण'— सुरेंद्र राजपूत

न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) से बातचीत करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने फर्जी रसीद मिलने और आरोपियों की गिरफ्तारी के पूरे घटनाक्रम को जनता का ध्यान भटकाने की एक कूटनीतिक साजिश करार दिया। उन्होंने कहा:

सुरेंद्र राजपूत का आधिकारिक बयान:

"जब आस्था के केंद्र राम मंदिर के चंदे में इतनी बड़ी गड़बड़ी के आरोप लग रहे हों, जमीन पर 'फर्जी दान पेटियां' मिलने जैसी गंभीर बातें सामने आ रही हों और दूसरी तरफ प्रभावशाली व रसूखदार लोगों को एसआईटी की आड़ में राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा हो, तब भाजपा का यह पूरा अभियान सिर्फ और सिर्फ मूल मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने की एक नापाक कोशिश जैसा नजर आता है।"

 एसआईटी प्रमुख की साख पर सवाल: 'खुद पर दर्ज हैं धोखाधड़ी के मुकदमे'

सुरेंद्र राजपूत ने इस मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) के नेतृत्व पर बेहद गंभीर और कानूनी सवाल दागते हुए कहा कि इस टीम से निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना बेमानी है।

  • गंभीर धाराओं के तहत केस का दावा: कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया— "जिस विशेष जांच दल (SIT) के प्रमुख के खिलाफ ही भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 465 (जालसाजी/Forgeries) के तहत गंभीर आपराधिक मामले पहले से दर्ज हों, उनके नेतृत्व में इतनी बड़ी वित्तीय धांधली की निष्पक्ष और सच्ची जांच की उम्मीद भला देश कैसे कर सकता है?"

 '8 मोहरों की गिरफ्तारी काफी नहीं, बड़ी मछलियों पर हो कार्रवाई'

इस मामले में पुलिसिया कार्रवाई का जिक्र करते हुए राजपूत ने साफ किया कि इस घोटाले की जड़ें बेहद गहरी हैं और प्रशासन केवल छोटे स्तर के लोगों को बलि का बकरा बना रहा है।

  • 8 आरोपी पहले ही गिरफ्तार: पुलिस इस मामले में कथित रूप से छोटी रकम के हेरफेर और फर्जी रसीदें बांटने के आरोप में आठ आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।

  • जांच के दायरे को बढ़ाने की मांग: सुरेंद्र राजपूत के मुताबिक, मामला सिर्फ कुछ लाख या छोटी रकम के हेरफेर तक सीमित नहीं है। उन्होंने मांग की कि जांच की आंच और इसका दायरा उन सफेदपोश और रसूखदार लोगों तक पहुंचना चाहिए, जिन पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं (Financial Irregularities) और करोड़ों के घोटाले के वास्तविक आरोप हैं।

बेबाक24 टेक

राम मंदिर सिर्फ करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह देश के भरोसे का केंद्र है। ऐसे में मंदिर के नाम पर 'फर्जी रसीद पुस्तिकाएं' और 'फर्जी दान पेटियां' मिलना सीधे तौर पर राम भक्तों की आस्था के साथ बहुत बड़ा और अक्षम्य खिलवाड़ है। इस मामले में 8 लोगों की गिरफ्तारी यह साबित करती है कि जमीन पर कोई न कोई नेक्सस (गिरोह) सक्रिय जरूर था। लेकिन कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने एसआईटी प्रमुख पर जो 'धारा 420 और 465' का आरोप लगाया है, वह बेहद गंभीर है। अगर जांच एजेंसी के मुखिया की साख पर ही सवालिया निशान हैं, तो उनके द्वारा दी गई क्लोजर रिपोर्ट या जांच रिपोर्ट को जनता और अदालत किस भरोसे से स्वीकार करेगी?

'बेबाक24' का मानना है कि इस पूरे मामले की जांच किसी विवादित प्रशासनिक विंग के बजाय हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में होनी चाहिए। भाजपा सरकार को इस बात को समझना होगा कि चंदे और दान में पारदर्शिता रखना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। केवल छोटे-मोटे जालसाजों को पकड़कर वाहवाही लूटने से इस महा-घोटाले का सच सामने नहीं आएगा। जब तक इस फर्जीवाड़े के पीछे बैठे मुख्य मास्टरमाइंड्स और वित्तीय हेरफेर करने वाली 'बड़ी मछलियों' के नाम सार्वजनिक नहीं होते, तब तक विपक्ष को सरकार को कटघरे में खड़ा करने का पूरा कूटनीतिक मौका मिलता रहेगा। राम के नाम पर व्यापार और जालसाजी करने वाले हर एक शख्स को बेनकाब किया जाना जरूरी है।



Search
Recent News
Popular News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment