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ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की अंतिम यात्रा; पार्थिव शरीर पहुंचा जन्मस्थान मशहद, कुछ ही देर में सुपुर्द-ए-ख़ाक; उमड़ा जनसैलाब

by admin@bebak24.com on | 2026-07-09 21:59:13

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 ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की अंतिम यात्रा; पार्थिव शरीर पहुंचा जन्मस्थान मशहद, कुछ ही देर में सुपुर्द-ए-ख़ाक; उमड़ा जनसैलाब

तेहरान/मशहद (बेबाक24): पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी महायुद्ध की विभीषिका के बीच आज एक युग का औपचारिक अंत होने जा रहा है। ईरान के पूर्व सर्वोच्च धार्मिक और राजनैतिक नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) का पार्थिव शरीर गुरुवार दोपहर को विशेष विमान के जरिए उनके जन्मस्थान और शिया समुदाय के सबसे पवित्र शहरों में से एक मशहद (Mashhad) पहुंचा दिया गया है।

तमाम सुरक्षा चुनौतियों और अमेरिकी बमबारी के साए के बीच, कुछ ही समय बाद उन्हें मशहद की पवित्र धरती पर सुपुर्द-ए-ख़ाक (दफ़्न) किया जाएगा।

इमाम रज़ा दरगाह परिसर में होगी अंतिम रस्म; उमड़ी डेढ़ करोड़ की भीड़

पिछले छह दिनों से ईरान और इराक के अलग-अलग ऐतिहासिक व धार्मिक शहरों में जारी अंतिम संस्कार समारोहों का आज अंतिम और सबसे भावुक चरण है:

  • मशहद में अंतिम संस्कार: इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी आधिकारिक समाचार एजेंसी 'तस्नीम' के मुताबिक, अंतिम संस्कार का आखिरी चरण स्थानीय समयानुसार दोपहर 2 बजे शुरू होगा। यह पवित्र रस्म मशहद स्थित इमाम रज़ा दरगाह परिसर में पूरी गरिमा के साथ अदा की जाएगी।

  • समय का अंतर: ईरान और भारत के समय के बीच करीब दो घंटे का अंतर होने के कारण, यह अंतिम रस्म भारतीय समयानुसार शाम लगभग 4 बजे से शुरू होकर संपन्न होने की तरफ बढ़ रही है।

  • कर्बला में उमड़ा था जनसैलाब: इससे पहले इराक के कर्बला स्थित इमाम हुसैन दरगाह में हुई उनकी अंतिम यात्रा में लाखों शोकाकुल लोगों की आंखें नम थीं। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि पिछले 6 दिनों के दौरान ईरान-इराक में उनके ताबूत के अंतिम दर्शन के लिए देश-दुनिया से करीब डेढ़ करोड़ (15 मिलियन) लोग उमड़े।

अमेरिकी हमलों का साया: रेल सेवा ठप, बसों से भेजे गए लोग

एक तरफ जहां देश अपने सबसे बड़े नेता को विदाई दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के साथ जारी भीषण युद्ध का असर इस अंतिम विदाई पर भी साफ देखा गया:

  • रेलवे ट्रैक बाधित: 'बीबीसी फ़ारसी' की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में हुए अमेरिकी मिसाइल हमलों के कारण मशहद की ओर जाने वाली रेल पटरियां और ट्रेन सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं।

  • यात्रियों को उतारा गया: सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैक बाधित होने के चलते, ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने मशहद जा रहे हजारों यात्रियों को बीच रास्ते में ही ट्रेनों से उतारना पड़ा। इसके बाद प्रशासन ने आपातकालीन व्यवस्था करते हुए उन्हें बसों के जरिए मशहद के लिए रवाना किया।

'भीड़ देखकर हैरान हूँ'— अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा कबूलनामा

ईरान के साथ सीधे सैन्य टकराव में उलझे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस ऐतिहासिक और अकल्पनीय भीड़ को लेकर अपनी हैरानगी छुपाई नहीं है। कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ने कथित तौर पर स्वीकार किया है कि युद्ध की परिस्थितियों और भारी तनाव के बावजूद आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के जनाजे और अंतिम दर्शन में उमड़ी यह विशाल मानवीय भीड़ वाकई आश्चर्यचकित करने वाली है।

इंटरनेशनल मीडिया को खुली छूट: ईरान सरकार ने एक अप्रत्याशित और कूटनीतिक रूप से बेहद असामान्य कदम उठाते हुए इस पूरे अंतिम संस्कार के लाइव कवरेज के लिए सैकड़ों विदेशी पत्रकारों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया घरानों को देश में आने की अनुमति दी है। अमूमन विदेशी मीडिया पर सख्त पाबंदी लगाने वाले ईरान का यह कदम पूरी दुनिया को अपनी 'वैचारिक ताकत और एकजुटता' दिखाने की कोशिश माना जा रहा है।

बेबाक24 टेक

आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई का सुपुर्द-ए-ख़ाक होना सिर्फ एक व्यक्ति की अंत्येष्टि नहीं है, बल्कि यह उस ईरान की वैचारिक रीढ़ की विदाई है जिसने दशकों तक अमेरिका और पश्चिमी देशों की आंखों में आंखें डालकर बात की। एक ऐसे समय में जब अमेरिका सीरिया, इराक और खुद ईरान के भीतर लगातार बमबारी कर रहा है, होर्मुज़ स्ट्रेट ब्लॉक है और देश का पेट्रोकेमिकल उद्योग बंद होने की कगार पर है— उस युद्ध काल में भी डेढ़ करोड़ लोगों का सड़कों पर उतरना यह साबित करता है कि ईरान में 'सर्वोच्च नेता' का स्थान क्या था।

'बेबाक24' का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप का इस भीड़ को देखकर हैरान होना लाजिमी है, क्योंकि पश्चिम हमेशा यह समझता था कि प्रतिबंधों और हमलों से ईरानी जनता को अपनी सरकार के खिलाफ खड़ा किया जा सकता है। लेकिन इस जनाजे ने यह साफ कर दिया है कि बाहरी हमलों के समय ईरान की जनता अपने वैचारिक नेतृत्व के पीछे चट्टान की तरह खड़ी हो जाती है। सैकड़ों विदेशी पत्रकारों को देश में आने की अनुमति देना तेहरान का एक बेहद सोचा-समझा 'साइकोलॉजिकल वॉरफेयर' (मनोवैज्ञानिक युद्ध) है। ईरान दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि भले ही उसका इंफ्रास्ट्रक्चर अमेरिकी हमलों से दहल रहा हो, लेकिन उसका आत्मबल और हौसला अभी भी अटूट है। ख़ामेनेई के बाद अब नई हुकूमत और आईआरजीसी के सामने इस बिखरे हुए और युद्धग्रस्त देश को संभालने की सबसे कठिन कूटनीतिक परीक्षा होगी।



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