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बिहार की सियासत का सबसे बड़ा धमाका: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव लड़ेंगे प्रशांत किशोर; जन सुराज ने उतारा अपना सबसे बड़ा चेहरा

by on | 2026-07-06 12:35:32

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बिहार की सियासत का सबसे बड़ा धमाका: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव लड़ेंगे प्रशांत किशोर; जन सुराज ने उतारा अपना सबसे बड़ा चेहरा

पटना ब्यूरो (बेबाक24): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद सूबे की राजनीति में साल 2026 का सबसे बड़ा और अप्रत्याशित कूटनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने और जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) खुद चुनावी अखाड़े में उतरने जा रहे हैं। जन सुराज पार्टी ने रविवार (5 जुलाई 2026) को एक आपात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घोषणा की है कि प्रशांत किशोर पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ेंगे।

यह सीट भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। पीके के इस फैसले ने बांकीपुर के चुनावी मुकाबले को न केवल दिलचस्प बना दिया है, बल्कि इसे बिहार की साख की लड़ाई में तब्दील कर दिया है।

1. कोर कमेटी का फैसला: प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने की घोषणा

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने पटना में कोर कमेटी की मैराथन बैठक के बाद प्रशांत किशोर के नाम पर मुहर लगाई।

  • रणनीतिक यू-टर्न: गौर करने वाली बात यह है कि नवंबर 2025 में हुए बिहार मुख्य विधानसभा चुनाव में जन सुराज ने पूरी ताकत झोंकी थी, लेकिन खुद प्रशांत किशोर ने अंतिम समय में चुनाव लड़ने से मना कर दिया था। तब उन्होंने इसे सांगठनिक विस्तार की मजबूरी बताया था, लेकिन अब वे खुद मोर्चे पर आ गए हैं।

  • चुनाव की महत्वपूर्ण तारीखें (6 जुलाई आज जारी होगा नोटिफिकेशन):

    • गजट नोटिफिकेशन: 6 जुलाई 2026 (आज, सोमवार)

    • नामांकन की आखिरी तारीख: 13 जुलाई 2026

    • नामांकन वापसी: 16 जुलाई 2026

    • मतदान की तारीख: 30 जुलाई 2026

    • मतगणना/नतीजे: 3 अगस्त 2026

2. "सम्राट चौधरी पीछे के दरवाजे से बने सीएम, चेहरा-चरित्र पर भरोसा नहीं"— पीके का तीखा हमला

उम्मीदवारी का एलान होते ही प्रशांत किशोर ने सीधे बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर कूटनीतिक और तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:

प्रशांत किशोर का बड़ा बयान:

"सम्राट चौधरी के चाल, चरित्र और चेहरे पर बिहार की जनता को कोई विश्वास नहीं है। वे जनता द्वारा चुनकर नहीं आए हैं, उन्हें दिल्ली ने पीछे के दरवाजे से मुख्यमंत्री बनाया है। जनता ने जनादेश नीतीश कुमार को दिया था। अब बांकीपुर के प्रबुद्ध और समृद्ध मतदाताओं के कंधों पर यह बड़ी जिम्मेदारी है कि वे इस बेहतर उम्मीदवार को चुनकर सरकार की जनविरोधी नीतियों पर अपना कड़ा फैसला सुनाएं।"

3. 'राजनीति छोड़ने' के दावे पर दी सफाई, कार्यकर्ताओं में फूंकी जान

बीते 2025 के चुनाव में प्रशांत किशोर ने दावा किया था कि अगर नीतीश कुमार की जेडीयू 25 से ज्यादा सीटें जीतेगी तो वे राजनीति छोड़ देंगे, जबकि जेडीयू ने 85 सीटें जीतकर सरकार बना ली। इस पर सफाई देते हुए पीके ने कहा— "मैं अपनी बात पर कायम हूं, बशर्ते नीतीश सरकार ने ये वोट सरकारी मशीनरी से खरीदे न हों। अगर निष्पक्षता साबित होती है तो मैं संन्यास ले लूंगा।"

उन्होंने माना कि पिछले चुनाव में 243 में से 238 सीटों पर लड़ने के बावजूद जन सुराज एक भी सीट नहीं जीत पाई (प्रोफेसर संजय कुमार के विश्लेषण के अनुसार), जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा था। लेकिन बांकीपुर की जीत इस पूरे आंदोलन को दोबारा जीवित कर देगी।

बेबाक24 टेक

प्रशांत किशोर का बांकीपुर से खुद चुनाव लड़ना जन सुराज के लिए 'करो या मरो' (Do or Die) की कूटनीति है। 2025 के मुख्य चुनावों में खाता भी न खोल पाने वाली और कई सीटों पर ऐन वक्त पर उम्मीदवारों के नामांकन वापस होने से असहज हुई जन सुराज को इस समय एक संजीवनी की जरूरत थी। पीके जानते हैं कि दूसरों को चुनाव लड़ाने की रणनीति बिहार की जमीनी और जातीय राजनीति के सामने फेल हो चुकी है, इसलिए उन्होंने खुद को दांव पर लगा दिया है।

'बेबाक24' का मानना है कि बांकीपुर को चुनना पीके का एक बेहद साहसिक लेकिन जोखिम भरा फैसला है। यह सीट दशकों से बीजेपी का सबसे अभेद्य किला रही है, जहां पिछले चुनाव में नितिन नबीन ने 63% वोट पाकर 51 हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज की थी। पीके यहां की कायस्थ, शहरी और प्रबुद्ध आबादी के सहारे 'बदलाव' की राजनीति करना चाहते हैं। अगर पीके यह सीट निकाल लेते हैं, तो वे रातों-रात बिहार में नीतीश-सम्राट और तेजस्वी के विकल्प के रूप में स्थापित हो जाएंगे। लेकिन अगर वे हार जाते हैं, तो उनके राजनीतिक करियर और 'रणनीतिकार' के तमगे पर ऐसा दाग लगेगा जिससे उबरना जन सुराज के लिए नामुमकिन हो जाएगा। यह उपचुनाव 2026 का सबसे दिलचस्प सियासी दंगल बनने जा रहा है।



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