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"अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार आए हैं, ‘दर्शन’ करने नहीं जाएंगे?"— बीजेपी चीफ नितिन नबीन के यूपी दौरे पर अखिलेश यादव का तीखा कूटनीतिक तंज

by on | 2026-07-06 12:27:23

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"अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार आए हैं, ‘दर्शन’ करने नहीं जाएंगे?"— बीजेपी चीफ नितिन नबीन के यूपी दौरे पर अखिलेश यादव का तीखा कूटनीतिक तंज

लखनऊ ब्यूरो (बेबाक24): भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के उत्तर प्रदेश के पहले आधिकारिक संगठनात्मक दौरे को लेकर राज्य की सियासत में भूचाल आ गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीजेपी चीफ के इस दौरे को आड़े हाथों लेते हुए बैक-टू-बैक तीखे राजनीतिक हमले बोले हैं।

अयोध्या के राम मंदिर में मचे 'चढ़ावा चोरी विवाद' (Ram Mandir Donation Theft Case) के बीच अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर पोस्ट लिखकर बीजेपी अध्यक्ष से सीधा और बेहद कूटनीतिक सवाल पूछा है, जिसने यूपी की राजनीतिक सरगर्मी को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

1. "दर्शन करने नहीं जाएंगे?"— अखिलेश का अयोध्या विवाद पर सीधा वार

अखिलेश यादव ने सोमवार (6 जुलाई 2026) को 'एक्स' पर नितिन नबीन के दौरे से जुड़े सन्नाटे और स्वागत कार्यक्रमों की फीकी तस्वीरों को साझा करते हुए सीधे बीजेपी की दुखती रग पर हाथ रख दिया। सपा प्रमुख ने लिखा:

अखिलेश यादव का एक्स (X) पोस्ट:

"अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार आए हैं, ‘दर्शन’ करने नहीं जाएंगे?"

बयान के पीछे के राजनीतिक मायने:

अखिलेश यादव का यह सीधा इशारा अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में जाकर दर्शन करने को लेकर था। अमूमन बीजेपी का कोई भी राष्ट्रीय या प्रांतीय बड़ा नेता जब उत्तर प्रदेश के दौरे पर आता है, तो वह सबसे पहले अयोध्या जाकर रामलला के दरबार में हाजिरी लगाता है। लेकिन इन दिनों अयोध्या का राम मंदिर अपनी भव्यता के साथ-साथ 'चढ़ावा और दान चोरी' के गंभीर आरोपों के कारण देशव्यापी विवादों के केंद्र में है। अखिलेश ने इसी लूपहोल को पकड़कर बीजेपी संगठन को कटघरे में खड़ा किया है।

2. "चंदा चोरी का गुस्सा और डबल इंजन की टकराहट ही इस सन्नाटे की वजह है"

इससे ठीक पहले किए गए अपने एक अन्य आक्रामक पोस्ट में अखिलेश यादव ने बीजेपी अध्यक्ष के उत्तर प्रदेश आगमन पर कार्यकर्ताओं और जनता के बीच दिखे 'ठंडे रिस्पॉन्स' (सन्नाटे) पर भी बड़ी वजहें गिनाईं। उन्होंने लिखा:

"जनता पूछ रही है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के उत्तर प्रदेश के पहले दौरे में जनता ने ‘चढ़ावा-चंदा-दान चोरी’ के गुस्से की वजह से उनका बहिष्कार तो किया ही है, क्या डबल इंजन की टकराहट भी इस सन्नाटे की वजह है?"

सपा प्रमुख ने सीधे तौर पर दो बड़े दांव खेले हैं:

  • चंदा चोरी पर आक्रोश: उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर में हुए वित्तीय गबन और गड़बड़ी से पूरे उत्तर प्रदेश की जनता और रामभक्त बेहद आहत और गुस्से में हैं, जिसके कारण बीजेपी चीफ के स्वागत से आम जनता ने दूरी बना ली।

  • डबल इंजन में दरार: अखिलेश ने एक बार फिर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक बीजेपी के भीतर चल रही आंतरिक गुटबाजी और 'डबल इंजन' (केंद्र बनाम राज्य संगठन) की अंदरूनी कशमकश को हवा दे दी है।

अयोध्या विवाद की वर्तमान स्थिति: बैकफुट पर बीजेपी

अखिलेश यादव के इन हमलों को जमीन पर इसलिए भी भारी राजनीतिक माइलेज मिल रहा है क्योंकि राम मंदिर का मुद्दा इस समय बेहद नाजुक मोड़ पर है:

  • 8 गिरफ्तारियां: अयोध्या पुलिस के जांच अधिकारी अब तक चढ़ावा चोरी मामले में 8 लोगों को सलाखों के पीछे भेज चुके हैं।

  • चंपत राय का इस्तीफा: सबसे बड़ा प्रशासनिक भूचाल तब आया जब चौतरफा दबाव के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने आधिकारिक पदों से इस्तीफा दे दिया, जिसकी समीक्षा के लिए आज ही अयोध्या के मणिराम छावनी में ट्रस्ट की आपात बैठक भी चल रही है।

बेबाक24 टेक

सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव इस समय उत्तर प्रदेश की राजनीति में कूटनीतिक रूप से सबसे आक्रामक और 'पिंच-परफेक्ट' (सटीक चोट करने वाले) फॉर्म में नजर आ रहे हैं। नितिन नबीन के यूपी दौरे पर उनका यह पूछना कि 'दर्शन करने नहीं जाएंगे?'— बीजेपी के पूरे राष्ट्रवाद और धार्मिक नैरेटिव को सीधे चुनौती देना है। अगर बीजेपी अध्यक्ष इस समय अयोध्या जाते हैं, तो मीडिया उनसे चंपत राय के इस्तीफे और 8 गिरफ्तारियों पर सवाल पूछेगा, और अगर वे अयोध्या जाने से बचते हैं, तो विपक्ष इसे 'चोरी की वजह से मुंह छिपाना' करार देगा।

'बेबाक24' का मानना है कि अखिलेश यादव ने इस बयान के जरिए बहुत चालाकी से राम मंदिर चंदा विवाद को सीधे बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से जोड़ दिया है। बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन के सामने उत्तर प्रदेश में खोए हुए सांगठनिक जनाधार को वापस पाने की बड़ी चुनौती थी, लेकिन उनके पैर रखते ही 'चढ़ावा चोरी' और 'डबल इंजन की टकराहट' के नैरेटिव ने उनके इस पहले दौरे के प्रभाव को पूरी तरह से बैकफुट पर ला दिया है। उत्तर प्रदेश की सियासत अब पूरी तरह से इस बात पर टिकी है कि बीजेपी का नया केंद्रीय नेतृत्व लखनऊ और अयोध्या के इस चक्रव्यूह से बाहर निकलने के लिए क्या नई रणनीति अपनाता है।



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