by admin@bebak24.com on | 2026-07-05 11:51:40
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इंटरनेशनल डेस्क (बेबाक24): मध्य-पूर्व (Middle East) में शांति और स्थिरता की कोशिशों के बीच तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन (Recep Tayyip Erdogan) ने एक बार फिर इसराइल सरकार के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। शनिवार (4 जुलाई 2026) को इस्तांबुल में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अर्दोआन ने गंभीर आरोप लगाया कि इसराइल जानबूझकर अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते को तोड़ने की साजिश रच रहा है।
अर्दोआन ने वैश्विक शक्तियों को आगाह करते हुए कहा कि क्षेत्र को दोबारा युद्ध की आग में झोंकने की इसराइली कोशिशों पर लगाम लगाना बेहद जरूरी है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, राष्ट्रपति अर्दोआन ने द्विपक्षीय वार्ता के बाद पत्रकारों से बात करते हुए इसराइल की मौजूदा सैन्य और कूटनीतिक रणनीति पर तीखा प्रहार किया:
राष्ट्रपति अर्दोआन का बेबाक बयान:
"हम इसराइली सरकार की उन कोशिशों पर बहुत बारीक और कड़ी नज़र रखे हुए हैं, जिनका एकमात्र मकसद अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते को पूरी तरह पटरी से उतारना है। बेंजामिन नेतन्याहू की मौजूदा इसराइली सरकार लगातार केवल और केवल युद्ध का रास्ता अपना रही है। इसराइल को हमारे क्षेत्र (मिडिल ईस्ट) को एक बार फिर बारूद, धुएं और खून की गंध में डुबोने की इजाजत कतई नहीं दी जानी चाहिए।"
अर्दोआन ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन या किसी अन्य पश्चिमी राजधानी में बैठकर थोपा गया कोई भी फॉर्मूला मध्य-पूर्व में शांति नहीं ला सकता। इसके लिए उन्होंने क्षेत्रीय ताकतों के साझा सहयोग को अनिवार्य बताया:
टिकाऊ समाधान की शर्त: अर्दोआन ने कहा कि मध्य-पूर्व में शांति स्थापित करने की कोई भी कोशिश तब तक कामयाब नहीं हो सकती, जब तक उसे वहां के स्थानीय और क्षेत्रीय देशों का मजबूत समर्थन और योगदान न मिले।
थोप कूटनीति का विरोध: पाकिस्तान के पीएम शहबाज़ शरीफ़ की मौजूदगी में उन्होंने जोर देकर कहा, "क्षेत्रीय देशों की इच्छा पर आधारित समाधान ही लंबे समय तक टिक सकता है। ऐसा कोई भी कृत्रिम समाधान, जिसे क्षेत्र के मुल्कों का समर्थन हासिल न हो, नाकाम होना तय है।"
यह पहला मौका नहीं है जब तुर्की ने इसराइल को आड़े हाथों लिया है। अर्दोआन इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिका-ईरान वार्ता को कमजोर करने के इसराइली प्रयासों की पोल खोल चुके हैं। तुर्की लगातार गज़ा, लेबनान और सीरिया में इसराइल द्वारा किए जा रहे हवाई और जमीनी सैन्य हमलों की तीखी आलोचना करता रहा है।
इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए तुर्की के विदेश मंत्री हकान फ़िदान ने भी हाल ही में सीएनएन तुर्क से बातचीत में इसराइल की मंशा पर सवाल उठाए थे। फिदान ने कहा था, "इसराइल इस समय बौखलाहट में है और वह अपने लिए एक नए दुश्मन की तलाश में जुटा है। लेकिन जब तक इसराइल या दुनिया का कोई भी अन्य पक्ष तुर्की के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय हितों के खिलाफ काम करेगा, तब तक हमें किसी से डरने, हिचकिचाने या अपने कदम पीछे खींचने की कोई जरूरत नहीं है।"
साल 2026 की भू-राजनीति में अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी तरह का शांति समझौता या कूटनीतिक नरमी मध्य-पूर्व के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकती है। इसराइल का शुरू से यह मानना रहा है कि ईरान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता उसके अस्तित्व के लिए खतरा है, इसलिए वह अमेरिकी प्रशासन पर ईरान के खिलाफ कड़े प्रतिबंध और सैन्य दबाव बनाए रखने की वकालत करता रहा है। राष्ट्रपति अर्दोआन ने इसी दुखती रग पर हाथ रखा है। इस्तांबुल की धरती पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ को साथ बिठाकर दिया गया यह बयान केवल तुर्की का नहीं, बल्कि इस्लामिक जगत के एक बड़े धड़े की सामूहिक चिंता को दर्शाता है।
'बेबाक24' का मानना है कि गज़ा की तबाही, लेबनान में हिज़बुल्लाह के साथ जारी झड़पें और सीरिया में लगातार होते हमलों के बीच, अगर अमेरिका-ईरान समझौता टूटता है, तो पूरा मिडिल ईस्ट एक ऐसे आत्मघाती युद्ध में कूद जाएगा जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की आपूर्ति ठप हो सकती है। विदेश मंत्री हकान फिदान का यह कहना कि 'इसराइल नए दुश्मन की तलाश में है', यह इशारा करता है कि तुर्की अब इसराइल की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ सैन्य और कूटनीतिक रूप से अधिक आक्रामक भूमिका निभाने के लिए तैयार है। अमेरिका को अब यह तय करना होगा कि वह अपने सबसे पुराने सहयोगी इसराइल के युद्धप्रिय रवैये का साथ देगा या ईरान के साथ हुए इस शांति समझौते को बचाकर क्षेत्र में स्थिरता लाएगा।
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