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भारत-जापान के 'भाई-बहन' कूटनीति पर भड़का चीन: 'इंडो-पैसिफिक' रणनीति को बताया शांति के खिलाफ; पानी की बोतलों को लेकर ग्लोबल टाइम्स ने कसा तंज

by admin@bebak24.com on | 2026-07-05 11:47:53

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भारत-जापान के 'भाई-बहन' कूटनीति पर भड़का चीन: 'इंडो-पैसिफिक' रणनीति को बताया शांति के खिलाफ; पानी की बोतलों को लेकर ग्लोबल टाइम्स ने कसा तंज

इंटरनेशनल ब्यूरो (बेबाक24): जापान की प्रधानमंत्री सनाई तकाइची (Sanae Takaichi) के 1 से 3 जुलाई 2026 तक चले तीन दिवसीय आधिकारिक भारत दौरे ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र की भू-राजनीति (Geopolitics) में एक नई हलचल पैदा कर दी है। नई दिल्ली में आयोजित 16वें जापान-भारत वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी पीएम को अपनी 'बहन' और सनाई तकाइची ने पीएम मोदी को अपना 'बड़ा भाई' बताकर आत्मीय रिश्तों का प्रदर्शन किया, वहीं इस कूटनीतिक नजदीकी को देखकर बीजिंग पूरी तरह तिलमिला उठा है।

चीन के विदेश मंत्रालय से लेकर वहां के सरकारी मुखपत्र 'ग्लोबल टाइम्स' तक ने इस दौरे पर तीखी, आक्रामक और तंजभरी टिप्पणियां की हैं, जो दोनों देशों के गहरे ऐतिहासिक तनाव और ताइवान संकट को उजागर करती हैं।

1. "इंडो-पैसिफिक की अवधारणा शांति के खिलाफ"— चीनी विदेश मंत्रालय का आधिकारिक विरोध

भारत और जापान द्वारा नई दिल्ली में 'स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक' (Free and Open Indo-Pacific - FOIP) की वकालत किए जाने पर चीन ने आधिकारिक तौर पर कड़ा एतराज जताया है। भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यु जिंग ने बीजिंग के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जिकुन के बयान का हवाला देते हुए मोर्चा खोला:

  • क्षेत्रीय आकांक्षाओं के खिलाफ: चीनी प्रवक्ता गुओ जिकुन ने कहा, "कथित स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक की अवधारणा शांति, विकास और सहयोग को लेकर क्षेत्रीय देशों की साझा आकांक्षाओं के बिल्कुल खिलाफ है। इसे कभी भी वास्तविक अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति नहीं मिल सकती।"

  • तीसरे देश पर निशाना न साधें: बीजिंग ने स्पष्ट रूप से चेतावनी भरे लहजे में कहा कि दोनों देशों का द्विपक्षीय सहयोग किसी तीसरे देश (चीन) को निशाना बनाने वाला या किसी अन्य देश के हितों को नुकसान पहुंचाने वाला नहीं होना चाहिए।

2. "कुल्ला करने के लिए भी स्थानीय पानी पर रोक"— ग्लोबल टाइम्स का तीखा तंज

चीन की आधिकारिक प्रतिक्रिया से इतर, वहां की कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र 'ग्लोबल टाइम्स' ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए जापानी पीएम के व्यवहार को 'दोगुला' और 'तिरस्कारपूर्ण' करार दिया। जापानी मीडिया आउटलेट एबेमा टाइम्स की रिपोर्ट का हवाला देते हुए ग्लोबल टाइम्स ने लिखा:

ग्लोबल टाइम्स का दावा: "एक तरफ भारत यात्रा के दौरान जापान की प्रधानमंत्री मुस्कुराते हुए पीएम मोदी को अपना 'बड़ा भाई' बता रही थीं, वहीं दूसरी तरफ उनका पूरा प्रतिनिधिमंडल भारत के प्रति असंवेदनशील और औपचारिक रवैया दिखा रहा था। जापान सरकार ने स्वच्छता के इतने सख्त निर्देश जारी किए थे कि स्थानीय नल के पानी का इस्तेमाल कुल्ला करने तक के लिए प्रतिबंधित था। जापानी प्रतिनिधिमंडल अपने साथ सरकारी विमान में भारी मात्रा में बोतलबंद मिनरल वाटर लेकर आया था, जो दिखाता है कि उनके मन में भारत के प्रति कैसा तिरस्कार है।"

3. चीन के भड़कने की असली वजह: सामरिक और ऐतिहासिक गणित

रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी और वासेदा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बेन एशियोन के मुताबिक, चीन की इस बौखलाहट के पीछे कई गहरे भू-राजनीतिक और ऐतिहासिक कारण हैं:

A. 'इंडो-पैसिफिक' शब्दावली पर जापान का अड़ना

'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' की यह अवधारणा जापान के दिवंगत पूर्व पीएम शिंजो आबे ने दी थी। विश्लेषकों का मानना है कि आज जब अमेरिका व्यावहारिक रूप से "इंडो-पैसिफिक" से "इंडो" (भारत) शब्द को थोड़ा पीछे छोड़ रहा है, तब भी जापान भारत को चीन के खिलाफ एक मजबूत संतुलनकारी शक्ति (Balancing Power) के रूप में खड़ा रखने के लिए इस शब्दावली पर अड़ा हुआ है। चीन को डर है कि यह गठबंधन दक्षिण चीन सागर से लेकर हिंद महासागर तक उसके बढ़ते सैन्य प्रभाव को रोकने के लिए बनाया जा रहा है।

B. ताइवान को लेकर 'अस्तित्व का संकट'

चीन और जापान के बीच हालिया सबसे बड़ा टकराव ताइवान को लेकर है। जापानी पीएम सनाई तकाइची ने नवंबर 2025 में एक बेहद कड़ा बयान देते हुए कहा था कि अगर चीन ताइवान पर सैन्य हमला करता है, तो यह जापान के अस्तित्व पर संकट होगा। इस बयान के बाद जापान को अमेरिका के साथ मिलकर सेना तैनात करने का कानूनी कवच मिल जाता है, जिससे चीन पूरी तरह आगबबूला है।

C. नानजिंग नरसंहार (1937) का खूनी इतिहास

दोनों देशों के बीच दुश्मनी का इतिहास बहुत पुराना और दर्दनाक है। चीनी नागरिक आज भी 13 दिसंबर 1937 के उस 'नानजिंग नरसंहार' को नहीं भूले हैं, जब जापानी सैनिकों ने चीनी शहर पर कब्जा कर करीब ढाई से तीन लाख मासूमों (महिलाओं और बच्चों) की बेरहमी से हत्या और बलात्कार किया था। चीन आज भी इसके लिए जापान से आधिकारिक माफी की मांग करता है, जबकि कई जापानियों का मानना है कि चीन की किताबों में इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है।

बेबाक24 टेक

जापान की प्रधानमंत्री सनाई तकाइची के भारत दौरे पर चीन की यह तीखी प्रतिक्रिया दर्शाती है कि बीजिंग 'क्वाड' (QUAD) देशों और विशेष रूप से भारत-जापान की रणनीतिक जुगलबंदी से कितना असुरक्षित महसूस कर रहा है। 'ग्लोबल टाइम्स' द्वारा जापानी प्रतिनिधिमंडल के बोतलबंद पानी लाने जैसी बात को तूल देना यह साफ करता है कि जब कूटनीतिक मोर्चे पर चीन के पास विरोध का कोई ठोस अंतरराष्ट्रीय आधार नहीं बचता, तो वह इस तरह के बचकाने और प्रोपेगैंडा आधारित तंज कसने पर उतर आता है।

'बेबाक24' का मानना है कि भारत की विदेश नीति पूरी तरह से स्वतंत्र है। भारत और चीन के रिश्ते जब सीमा पर तनावपूर्ण होते हैं, तो भारत का झुकाव जापान-अमेरिका की तरफ बढ़ता है, और जब सीमा पर स्थिरता होती है, तो भारत रणनीतिक संतुलन बनाए रखता है। साल 2026 की इस नई वैश्विक व्यवस्था में, चीन भले ही अफ़ीम युद्ध से लेकर दूसरे विश्व युद्ध तक के अपने 'शताब्दी के अपमान' (Century of Humiliation) का कार्ड खेलकर अपने नागरिकों में राष्ट्रवाद भड़काता रहे, लेकिन उसे यह समझना होगा कि भारत और जापान जैसे दो मजबूत लोकतंत्रों को डराकर या उनके द्विपक्षीय दौरों पर उंगली उठाकर वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपना एकतरफा दबदबा कायम नहीं कर सकता।



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