by admin@bebak24.com on | 2026-07-01 10:44:08
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अंतरराष्ट्रीय डेस्क (बेबाक24): अफगानिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर निर्दोष नागरिकों पर की गई पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक के खिलाफ कार्यवाहक तालिबान सरकार ने अब बेहद आक्रामक सैन्य जवाबी कार्रवाई (Retaliation) शुरू कर दी है। तालिबान सेना ने पाकिस्तान सीमा से लगे ठिकानों और चौकियाें पर भारी गोलाबारी और ड्रोन से हमले किए हैं।
तालिबान शासन की इस सीधी सैन्य कार्रवाई के बाद पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत में भारी तबाही और कई लोगों के घायल होने की खबर है, जिसके बाद डूरंड लाइन (Durand Line) पर दोनों देशों के बीच पूर्ण युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई है।
रविवार को हुए पाकिस्तानी हमलों के ठीक बाद अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने जवाबी कार्रवाई के आदेश दिए थे:
तालिबान का आक्रामक रुख: तालिबान सरकार के आधिकारिक बयानों के मुताबिक, उनके सीमा सुरक्षा बलों (Border Forces) ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर आधुनिक हथियारों और सुसाइड ड्रोन से हमला किया। इस हमले में बलूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचने और कई फ्रंटलाइन सैनिकों के घायल होने का दावा किया गया है।
पाकिस्तानी सेना की सफाई: दूसरी ओर, दबाव में आई पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विंग (ISPR) ने एक बयान जारी कर दावा किया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने सीमा पार से आ रहे चार साधारण अफगान ड्रोन्स को हवा में ही मार गिराया है। पाकिस्तानी सेना ने तालिबान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि आगे किसी भी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई का "उचित और अधिक घातक जवाब" दिया जाएगा।
यह ताजा सैन्य टकराव रविवार को पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के कुनार, पक्तिया और पक्तिका प्रांतों में किए गए हवाई हमलों का सीधा नतीजा है।
यूएन का आंकड़ा: संयुक्त राष्ट्र (UNAMA) ने अपनी रिपोर्ट में पहले ही पुष्टि कर दी है कि पाकिस्तान के हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित कम से कम 28 निर्दोष नागरिक मारे गए हैं।
तालिबान का नया दावा: हालांकि, तालिबान सरकार ने हताहतों के नए और विस्तृत आंकड़े जारी करते हुए दावा किया है कि पाकिस्तानी बमबारी में पूरी तरह रिहायशी घरों (Residential Houses) को तबाह किया गया, जिसमें 36 आम नागरिकों की मौत (शहादत) हुई है और 160 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। तालिबान ने इसे पाकिस्तान की "कायराना हरकत" और "जघन्य अत्याचार" करार दिया है।
डूरंड लाइन पर कई महीनों की अपेक्षाकृत शांति के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य रिश्ते पूरी तरह से ध्वस्त हो चुके हैं:
पाकिस्तान का पुराना नैरेटिव: इस्लामाबाद लंबे समय से काबुल पर यह आरोप लगाता रहा है कि तालिबान अपनी सरजमीं का इस्तेमाल प्रतिबंधित संगठन टीटीपी (TTP) को करने दे रहा है, जो पाकिस्तान के भीतर घुसकर आत्मघाती हमले करते हैं। तालिबान इन आरोपों को हमेशा सिरे से खारिज करता आया है।
तालिबान का पलटवार: अफगान सरकार का कहना है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक राजनीतिक और सुरक्षा विफलताओं का ठीकरा अफगानिस्तान पर फोड़ने के लिए बिना किसी उकसावे के संप्रभु सीमा का उल्लंघन करता है। इस ताजा गोलाबारी के बाद पिछले साल अक्टूबर में कई हफ्तों के खूनी संघर्ष के बाद हुआ सीजफायर (युद्धविराम) अब इतिहास का हिस्सा बन चुका है।
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार द्वारा पाकिस्तान के भीतर बलूचिस्तान में सीधा सैन्य हमला करना यह साफ करता है कि काबुल अब इस्लामाबाद को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। अब तक तालिबान केवल सीमा पर मोर्टार दागकर अपनी नाराजगी जताता था, लेकिन पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर ड्रोन भेजना यह दिखाता है कि अफगान सेना की युद्ध क्षमता और हौसले इस समय चरम पर हैं।
पाकिस्तान के रणनीतिकारों ने सोचा था कि वे हवाई हमले करके तालिबान को डरा देंगे, लेकिन उनका यह दांव पूरी तरह उल्टा पड़ चुका है। पाकिस्तान इस समय खुद अंदरूनी मोर्चे पर बलूच विद्रोहियों और राजनीतिक अस्थिरता से खोखला हो रहा है, ऐसे में डूरंड लाइन पर तालिबान जैसी आक्रामक और गुरिल्ला युद्ध में माहिर सेना से सीधा पंगा लेना पाकिस्तानी सेना के लिए 'फाँस' बन सकता है।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा 28 नागरिकों की मौत की पुष्टि ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को 'आक्रामक' (Aggressor) साबित कर दिया है, जिससे अब तालिबान को अपने बचाव में किए गए हमलों के लिए एक मजबूत नैतिक और कूटनीतिक जमीन मिल गई है। भारत की नजरें भी इस सीमाई टकराव पर पूरी तरह टिकी हुई हैं, क्योंकि पाकिस्तान का दोनों पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी मोर्चों (ईरान और अफगानिस्तान) पर एक साथ घिरना, दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक संतुलन को पूरी तरह बदलने वाला है। आने वाले कुछ दिन इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिहाज से बेहद नाजुक होने वाले हैं।
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